भारतीय ग्रैंडमास्टर R Vaishali ने FIDE Candidates Tournament के 11वें राउंड में रूसी खिलाड़ी को हराकर शीर्ष स्थान बरकरार रखा। वहीं R Praggnanandhaa ने ड्रॉ खेला और 7वें स्थान पर कायम हैं।
स्पोर्ट्स : साइप्रस में जारी प्रतिष्ठित FIDE कैंडिडेट्स टूर्नामेंट 2026 में भारतीय शतरंज खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार चर्चा में है। भारतीय ग्रैंडमास्टर वैशाली रमेशबाबू ने विमेंस कैटेगरी के 11वें राउंड में रूस की अलेक्जेंड्रा गोर्याचकिना को हराकर अपनी बढ़त मजबूत कर ली है। इस जीत के बाद वैशाली 7 अंकों के साथ अंकतालिका में शीर्ष स्थान पर बनी हुई हैं।
दूसरी ओर, ओपन कैटेगरी में भारत के युवा स्टार आर प्रज्ञानानंदा ने जर्मनी के मथियास ब्लूबाउम के खिलाफ ड्रॉ खेला। इस परिणाम के बाद प्रज्ञानानंदा फिलहाल सातवें स्थान पर हैं। टूर्नामेंट में अभी तीन राउंड बाकी हैं, जिससे भारतीय उम्मीदें अभी भी पूरी तरह जीवित हैं।
वैशाली की बड़ी जीत: खिताब की ओर मजबूत कदम
विमेंस कैंडिडेट्स में वैशाली रमेशबाबू लगातार संयमित और आक्रामक खेल दिखा रही हैं। 11वें राउंड में उन्होंने पूर्व विश्व चैंपियनशिप चैलेंजर अलेक्जेंड्रा गोर्याचकिना के खिलाफ शानदार रणनीति अपनाई।
इस मुकाबले की खास बातें:
वैशाली ने शुरुआती चालों से ही दबाव बनाया
मिडल गेम में बेहतर पोजिशन हासिल की
एंडगेम में सटीक चालों से जीत दर्ज की
11 राउंड के बाद कुल 7 अंक हासिल किए
इस जीत के साथ वैशाली ने दूसरे स्थान पर मौजूद खिलाड़ियों पर 1 अंक की बढ़त बना ली है। शेष तीन राउंड में यदि वह यही लय बरकरार रखती हैं, तो विश्व चैंपियनशिप चुनौती के बेहद करीब पहुंच सकती हैं।

प्रज्ञानानंदा ने ड्रॉ से बनाए रखी उम्मीद
ओपन कैटेगरी में भारत के प्रतिभाशाली ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानानंदा ने 11वें राउंड में मथियास ब्लूबाउम के खिलाफ संतुलित खेल दिखाया। मुकाबला काफी रणनीतिक रहा और दोनों खिलाड़ियों ने सतर्कता बरती।
प्रज्ञानानंदा की स्थिति:
11वें राउंड के बाद अंकतालिका में 7वें स्थान पर
अब भी शेष तीन राउंड में वापसी की संभावना
मजबूत फिनिश से रैंकिंग में सुधार संभव
हालांकि प्रज्ञानानंदा अभी शीर्ष दावेदारों से पीछे हैं, लेकिन उनके अनुभव और आक्रामक शैली को देखते हुए आखिरी राउंड बेहद अहम होंगे।
भारत का स्वर्णिम दौर: लगातार उभर रही नई पीढ़ी
भारतीय शतरंज इस समय अपने सबसे मजबूत दौर में से गुजर रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने कई युवा ग्रैंडमास्टर्स दिए हैं, जो दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों को चुनौती दे रहे हैं।
भारत की हालिया बड़ी उपलब्धियां:
डी गुकेश ने पिछला कैंडिडेट्स जीता
विश्वनाथन आनंद पांच बार विश्व चैंपियन रहे
प्रज्ञानानंदा ने विश्व स्तर पर कई दिग्गजों को हराया
वैशाली महिलाओं की शीर्ष खिलाड़ियों में शामिल हुईं
भारत अब केवल प्रतिभा पैदा करने वाला देश नहीं, बल्कि विश्व शतरंज की महाशक्ति बनकर उभर रहा है।
कैंडिडेट्स टूर्नामेंट क्या है और क्यों है इतना अहम?
FIDE कैंडिडेट्स टूर्नामेंट शतरंज की दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण क्वालिफाइंग इवेंट माना जाता है। इसे अक्सर “विश्व चैंपियनशिप का सेमीफाइनल” कहा जाता है।
इसका महत्व
विश्व चैंपियन को चुनौती देने वाला खिलाड़ी यहीं से तय होता है
दुनिया के शीर्ष 8 खिलाड़ी इसमें भाग लेते हैं
विजेता को सीधे विश्व खिताब मुकाबले का टिकट मिलता है
2026 में क्या दांव पर है?
ओपन विजेता का मुकाबला मौजूदा विश्व चैंपियन डी गुकेश से होगा
विमेंस विजेता का मुकाबला मौजूदा महिला विश्व चैंपियन जू वेनजुन से होगा
कैसे खेला जाता है कैंडिडेट्स टूर्नामेंट?
कैंडिडेट्स टूर्नामेंट का फॉर्मेट बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। इसमें गलती की गुंजाइश बहुत कम होती है।
टूर्नामेंट फॉर्मेट
कुल 8 खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं
सभी खिलाड़ी एक-दूसरे से 2 बार खेलते हैं
कुल 14 राउंड होते हैं
हर जीत पर 1 अंक
ड्रॉ पर 0.5 अंक
हार पर 0 अंक
क्यों है यह कठिन?
लगातार उच्च स्तर का मानसिक दबाव
हर खिलाड़ी विश्वस्तरीय
लंबी तैयारी और रणनीतिक धैर्य की जरूरत
इसी वजह से कैंडिडेट्स जीतना किसी भी शतरंज खिलाड़ी के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है।
वैशाली की सफलता का भारतीय महिला शतरंज पर असर
वैशाली की मौजूदा सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि भारतीय महिला शतरंज के लिए भी प्रेरणादायक है।
इसका असर:
युवा महिला खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ेगा
भारत में महिला शतरंज को नई पहचान मिलेगी
अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की प्रतिष्ठा मजबूत होगी
वैशाली का शांत स्वभाव, तकनीकी मजबूती और दबाव में खेलने की क्षमता उन्हें खिताब की सबसे मजबूत दावेदारों में शामिल करती है।
आगे के तीन राउंड होंगे निर्णायक
अब टूर्नामेंट अपने सबसे अहम चरण में पहुंच चुका है। वैशाली के लिए अगले तीन मुकाबले खिताबी दौड़ तय करेंगे, जबकि प्रज्ञानानंदा के लिए ये राउंड सम्मानजनक वापसी का मौका हैं।
भारत के लिए आने वाले दिन बेहद अहम होंगे:
क्या वैशाली इतिहास रचेंगी?
क्या प्रज्ञानानंदा वापसी करेंगे?
क्या भारत एक और विश्व चैंपियनशिप चैलेंजर देगा?








