फीफा की विश्व कप प्रतियोगिताओं में निजी निवेशकों को हिस्सेदारी देने की योजना का यूईएफए और CONCACAF ने कड़ा विरोध किया है। यूईएफए ने चेतावनी दी है कि प्रस्ताव मंजूर होने पर उसके सदस्य देश फीफा प्रतियोगिताओं का बहिष्कार कर सकते हैं।
स्पोर्ट्स न्यूज़: विश्व फुटबॉल एक बड़े प्रशासनिक और व्यावसायिक विवाद के दौर से गुजर रहा है। यूरोपीय फुटबॉल महासंघ (UEFA) ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल महासंघ (FIFA) विश्व कप और अन्य प्रमुख प्रतियोगिताओं में निजी निवेशकों की हिस्सेदारी की अपनी विवादास्पद योजना को लागू करता है, तो यूरोप के सभी 55 सदस्य देश फीफा प्रतियोगिताओं का बहिष्कार कर सकते हैं। यह फैसला यूईएफए की आपात बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया, जिसमें सदस्य देशों ने फीफा के प्रस्ताव को विश्व फुटबॉल की परंपरा और स्वतंत्रता के लिए गंभीर खतरा बताया। दूसरी ओर, उत्तरी और मध्य अमेरिका के फुटबॉल महासंघ CONCACAF ने भी इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है।
क्या है फीफा का नया प्रस्ताव?
फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने हाल ही में एक नई व्यावसायिक योजना पेश की है। इसके तहत फीफा अपनी प्रमुख प्रतियोगिताओं, जैसे पुरुष और महिला फीफा विश्व कप तथा क्लब विश्व कप के व्यावसायिक संचालन के लिए एक नई सहायक कंपनी FIFA Forward Enterprise (FFE) स्थापित करना चाहता है। इस नई कंपनी में बाहरी निजी निवेशकों को अल्पांश (Minority) हिस्सेदारी खरीदने की अनुमति दी जाएगी। फीफा का कहना है कि इससे खेल के विकास के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध होंगे और सदस्य देशों को अधिक आर्थिक सहायता मिल सकेगी। हालांकि इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए फीफा के 211 सदस्य देशों की मंजूरी आवश्यक होगी।
यूईएफए ने क्यों जताया कड़ा विरोध?
यूईएफए का कहना है कि विश्व कप केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी खेल विरासतों में से एक है। इसे व्यावसायिक निवेश का माध्यम बनाना खेल की मूल भावना के खिलाफ है। यूईएफए ने अपने बयान में कहा कि विश्व कप खिलाड़ियों, राष्ट्रीय टीमों और करोड़ों प्रशंसकों की पीढ़ियों की मेहनत से बना है। इसे निजी निवेशकों के हाथों सौंपना उचित नहीं होगा। यूरोपीय संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि इतने महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर सदस्य संघों से कोई सार्थक चर्चा नहीं की गई और इसे गोपनीय तरीके से तैयार किया गया।
बहिष्कार की चेतावनी
यूईएफए ने स्पष्ट किया है कि यदि फीफा का प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो उसके सभी 55 सदस्य देश फीफा की प्रतियोगिताओं का बहिष्कार करने पर विचार करेंगे। इसमें पुरुष विश्व कप, महिला विश्व कप और फीफा क्लब विश्व कप जैसी सभी प्रमुख प्रतियोगिताएं शामिल होंगी। यदि ऐसा होता है, तो यह विश्व फुटबॉल के इतिहास की सबसे बड़ी प्रशासनिक टकराव की स्थिति बन सकती है।

CONCACAF ने भी किया विरोध
यूरोप के अलावा उत्तरी और मध्य अमेरिका तथा कैरेबियाई देशों का फुटबॉल महासंघ CONCACAF भी फीफा की योजना के खिलाफ खड़ा दिखाई दे रहा है।CONCACAF के 41 सदस्य देशों ने प्रस्ताव को अस्वीकार करने का फैसला किया है। रिपोर्टों के अनुसार, संगठन के कई सदस्य फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो की नेतृत्व शैली को लेकर भी असंतोष जता रहे हैं। यदि यूईएफए और CONCACAF दोनों इस प्रस्ताव के खिलाफ मतदान करते हैं, तो फीफा के लिए आवश्यक बहुमत हासिल करना कठिन हो सकता है।
मतदान में कितने वोट होंगे अहम?
फीफा के इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के लिए 211 सदस्य संघों में से कम से कम 106 वोटों की आवश्यकता होगी। यूईएफए के 55 और CONCACAF के 41 सदस्य मिलाकर कुल 96 वोट रखते हैं। यदि ये सभी प्रस्ताव के खिलाफ मतदान करते हैं, तो फीफा को अन्य महाद्वीपीय महासंघों से पर्याप्त समर्थन जुटाना होगा।
सदस्य देशों को आर्थिक प्रोत्साहन
रिपोर्टों के अनुसार, फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने सदस्य संघों को पत्र लिखकर प्रस्ताव का समर्थन करने पर 4 करोड़ अमेरिकी डॉलर तक की वित्तीय सहायता देने की बात कही है। बताया गया है कि प्रारंभिक चरण में प्रस्ताव स्वीकार करने वाले देशों को 2 करोड़ डॉलर तक की राशि उपलब्ध कराई जा सकती है। हालांकि आलोचकों का कहना है कि इससे सदस्य देशों पर अप्रत्यक्ष दबाव बनाया जा रहा है।
निवेशक समूह में अमेरिकी कंपनी की भूमिका
यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो अमेरिकी निवेश कंपनी Thrive Eternal इस नई व्यावसायिक इकाई में प्रमुख निवेशक समूह का नेतृत्व कर सकती है। यह कंपनी अमेरिकी उद्यमी जोशुआ कुशनर द्वारा स्थापित की गई थी। हालांकि फीफा ने स्पष्ट किया है कि नई कंपनी के संचालन को लेकर अभी किसी अधिकारी की नियुक्ति पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
यूरोप का दबदबा क्यों अहम है?
विश्व फुटबॉल में यूरोप का प्रभाव बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हाल के फीफा विश्व कपों में अधिकांश सफल टीमें यूरोप से रही हैं। अब तक आयोजित 23 पुरुष फीफा विश्व कपों में 13 बार यूरोपीय देशों ने खिताब जीता है। हालिया टूर्नामेंटों में भी अधिकांश क्वार्टर फाइनलिस्ट यूरोप से रहे हैं। ऐसे में यदि यूरोपीय देश किसी प्रतियोगिता का बहिष्कार करते हैं, तो उसकी प्रतिस्पर्धात्मक गुणवत्ता और वैश्विक लोकप्रियता पर बड़ा असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों की राय
यूईएफए उपाध्यक्ष लॉरा मैकएलिस्टर ने कहा कि फीफा का प्रस्ताव विश्व फुटबॉल के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। उनके अनुसार यूरोप के सभी सदस्य देशों में इस मुद्दे पर असाधारण एकजुटता देखने को मिली है। उन्होंने उम्मीद जताई कि बातचीत के जरिए समाधान निकलेगा, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो यूरोप अपने रुख पर कायम रहेगा।
आगे क्या होगा?
फीफा के सदस्य संघों द्वारा प्रस्ताव पर मतदान आगामी महीनों में होना है। यदि प्रस्ताव पारित होता है, तो विश्व फुटबॉल की संरचना और व्यावसायिक मॉडल में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। वहीं यदि यूईएफए और अन्य महासंघ अपने विरोध पर कायम रहते हैं, तो फुटबॉल जगत में अभूतपूर्व टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है। आने वाले सप्ताहों में विभिन्न महाद्वीपीय महासंघों की बैठकों और सदस्य देशों के रुख पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।










