गांधी सागर अभ्यारण में एक साल पहले लाए गए दक्षिण अफ्रीकी चीते प्रभास और पावक ने अपनी मजबूत बॉन्डिंग और सफल शिकार रणनीति से विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है। दोनों भाई अभ्यारण में तेजी से खुद को स्थापित कर चुके हैं।
मंदसौर: गांधी सागर अभ्यारण में रह रहे चीता भाई प्रभास और पावक अपने व्यवहार और आपसी तालमेल के कारण चर्चा में हैं। करीब एक वर्ष पहले कूनो से यहां लाए गए दोनों चीतों ने न केवल नए वातावरण में खुद को सफलतापूर्वक ढाला है, बल्कि उनकी मजबूत बॉन्डिंग और शिकार की अनोखी शैली ने वन्यजीव विशेषज्ञों को भी प्रभावित किया है।
एक साल में नए ठिकाने पर जमाई मजबूत पकड़
दक्षिण अफ्रीका से भारत लाए गए चीते प्रभास और पावक को 25 अप्रैल 2025 को गांधी सागर अभ्यारण में स्थानांतरित किया गया था। उस समय विशेषज्ञों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि दोनों नए वातावरण में कितनी आसानी से खुद को ढाल पाएंगे। हालांकि बीते एक वर्ष में दोनों चीतों ने उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन किया है।
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वन अधिकारियों के अनुसार दोनों भाई अभ्यारण में पूरी तरह सक्रिय हैं और उन्होंने अपने क्षेत्र में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। उनकी गतिविधियों की नियमित निगरानी की जा रही है, जिसमें उनके व्यवहार में असाधारण समन्वय देखने को मिला है।
शिकार के दौरान दिखती है शानदार टीमवर्क
प्रभास और पावक की सबसे बड़ी विशेषता उनकी आपसी समझ और शिकार की रणनीति है। वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक दोनों भाई मिलकर शिकार करते हैं और उनकी ट्यूनिंग बेहद प्रभावशाली है।
अक्सर देखा गया है कि एक चीता शिकार का पीछा कर उसे थकाने का काम करता है, जबकि दूसरा सही मौके पर हमला कर शिकार को पकड़ लेता है। इस रणनीति के कारण शिकार के बच निकलने की संभावना काफी कम हो जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का समन्वय जंगली जीवन में उनके सफल अस्तित्व का महत्वपूर्ण कारण है।
एक-दूसरे की सुरक्षा का भी रखते हैं ध्यान
गांधी सागर अभ्यारण में निगरानी के दौरान यह भी पाया गया है कि दोनों भाई केवल शिकार में ही नहीं, बल्कि सुरक्षा के मामले में भी एक-दूसरे का पूरा साथ देते हैं। जब एक चीता शिकार का भोजन कर रहा होता है, तब दूसरा आसपास सतर्क निगरानी करता रहता है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह व्यवहार जंगली जीवों में सामाजिक सहयोग और दीर्घकालिक जीवित रहने की रणनीति का हिस्सा माना जाता है। इससे दोनों चीतों को संभावित खतरों से बचाव करने में मदद मिलती है।
मजबूत बॉन्डिंग ने खींचा विशेषज्ञों का ध्यान
वन अधिकारियों और विशेषज्ञों ने कई बार दोनों भाइयों को एक-दूसरे की सफाई करते और स्नेहपूर्ण व्यवहार करते हुए देखा है। वे अक्सर एक-दूसरे को चाटकर साफ करते हैं, जो आपसी विश्वास और सामाजिक जुड़ाव का संकेत माना जाता है।
जानकारों का कहना है कि नर चीते अक्सर अपने भाई-बहनों के साथ लंबे समय तक समूह में रह सकते हैं। प्रभास और पावक की बॉन्डिंग भी इसी व्यवहार का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जा रही है। यही कारण है कि दोनों की गतिविधियां वन्यजीव शोधकर्ताओं के लिए विशेष रुचि का विषय बनी हुई हैं।
गांधी सागर परियोजना के लिए सकारात्मक संकेत
गांधी सागर अभ्यारण में चीतों की सफल मौजूदगी को चीता पुनर्स्थापन परियोजना के लिए भी सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। दोनों भाइयों का स्वस्थ रहना, नियमित शिकार करना और नए वातावरण में सक्रिय भूमिका निभाना यह दर्शाता है कि अभ्यारण का पारिस्थितिक तंत्र उनके लिए अनुकूल साबित हो रहा है।
वन विभाग का मानना है कि प्रभास और पावक का प्रदर्शन भविष्य में यहां अन्य चीतों को बसाने की योजनाओं के लिए भी उपयोगी अनुभव प्रदान करेगा। फिलहाल दोनों चीता भाई अपनी शानदार बॉन्डिंग और प्रभावशाली व्यवहार के कारण गांधी सागर अभ्यारण के प्रमुख आकर्षण बने हुए हैं।










