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Ganesh Chaturthi 2025: दस दिनों का महापर्व, जानें विसर्जन के पीछे की कथा

Ganesh Chaturthi 2025: दस दिनों का महापर्व, जानें विसर्जन के पीछे की कथा

27 अगस्त को गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन सुबह 11:05 से दोपहर 1:39 तक गणेश जी की स्थापना का शुभ मुहूर्त है। भक्त 1, 3, 5, 7 या 10 दिनों तक गणेश जी की पूजा और सेवा करते हैं। दसवें दिन अनंत चतुर्दशी पर गणेश जी का विसर्जन होता है, जो पौराणिक कथाओं और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है।

Ganesh Chaturthi 2025: देशभर में 27 अगस्त 2025 को गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन गणेश जी की स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 11:05 से दोपहर 1:39 तक है। भक्त अपने घरों में गणपति बप्पा की स्थापना कर 1, 3, 5, 7 या 10 दिनों तक उनकी सेवा करते हैं। अधिकांश लोग दसवें दिन अनंत चतुर्दशी पर विसर्जन करते हैं, जो पौराणिक कथा अनुसार गणेश जी के शरीर के ताप को संतुलित करने और धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुरूप होता है।

पूजा विधि

गणेश चतुर्थी के दौरान प्रतिमा की स्थापना के समय विशेष पूजा विधि का पालन किया जाता है। सुबह शुभ मुहूर्त में गणेश जी की प्रतिमा स्थापित की जाती है। भक्तजन प्रतिदिन भजन-कीर्तन और आरती करते हैं। रात्रि में जागरण कर गणपति बप्पा की सेवा की जाती है। पूजा के समय मोदक, लड्डू और फल अर्पित किए जाते हैं।

स्थापना और प्रारंभिक पूजा

गणेश चतुर्थी के दिन घरों में और पंडालों में गणपति बप्पा की स्थापना की जाती है। स्थापना के बाद भक्त गणेश जी की सेवा और पूजा करते हैं। प्रतिदिन भजन-कीर्तन और आरती के माध्यम से गणपति की उपासना होती है। इस दौरान भक्त जन दिनभर उनके प्रतीक रूप में सजाई गई प्रतिमा के साथ रहते हैं और उनकी सेवा करते हैं।

गणेश चतुर्थी का उत्सव सामान्यत: दस दिनों तक चलता है। हालांकि, कुछ लोग अपने समय और सुविधाओं के अनुसार जल्दी विसर्जन कर देते हैं। कुछ भक्त डेढ़, तीन, पांच, सात या ग्यारहवें दिन गणेश जी का विसर्जन करते हैं। वहीं, सार्वजनिक उत्सव में गणपति बप्पा की पूजा दस दिनों तक लगातार होती है।

डेढ़ या तीन दिन बाद विसर्जन

कई भक्त गणपति की पूजा केवल दो-तीन दिन करते हैं और उसके बाद प्रतिमा का विसर्जन करते हैं। इसका उद्देश्य गणेश जी की भक्ति को साधारण समय में पूरा करना और अपनी दिनचर्या में संतुलन बनाए रखना होता है। घर में गणेश जी का सेवा भाव उसी तरह चलता है जैसे कोई अतिथि आए। अतिथि की तरह गणेश जी की सेवा करने के बाद उन्हें विदा करना परंपरा का हिस्सा है।

पंचमी और पांचवें दिन विसर्जन

कुछ भक्त पांचवें दिन भी गणेश विसर्जन करते हैं। हालांकि शास्त्रों के अनुसार पंचमी तिथि को गणेश जी का विसर्जन नहीं करना चाहिए। पंचमी तिथि स्कंदमाता को समर्पित मानी जाती है। माता पार्वती को देवी स्कंदमाता भी कहा जाता है और इस दिन भगवान कार्तिकेय के साथ गणेश जी की पूजा की जाती है। इसलिए पंचमी तिथि पर गणेश जी को विदा करना शास्त्र संगत नहीं माना जाता।

अनंत चतुर्दशी का महत्व

परंपराओं के अनुसार, गणेश जी का विसर्जन अनंत चतुर्दशी के दिन किया जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, गणेश जी ने दस दिनों तक महाभारत ग्रंथ लिखने के कारण शरीर का ताप बढ़ गया था। शरीर पूरी तरह तपने के कारण वेद व्यास ने उन्हें सरोवर में स्नान करने की विनती की। इसके बाद गणेश जी ने अनंत चतुर्दशी के दिन जल में डुबकी लगाई। इसी परंपरा के चलते प्रत्येक वर्ष गणेश विसर्जन अनंत चतुर्दशी को किया जाता है।

धर्म पंडितों के अनुसार, गणेश जी कभी-कभी अपने बड़े भाई कार्तिकेय से मिलने उनके घर जाते हैं। वहां दस दिनों तक रहते हैं और फिर अपने लोक लौटते हैं। इस दौरान भक्तजन उन्हें विदा करने और दोबारा आने की विनती करते हैं। इस कारण गणेश विसर्जन का समय और अनुष्ठान विशेष महत्व रखते हैं।

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