गया कांग्रेस में ‘डबल कमान’ से घमासान, संगठन में गुटबाजी तेज

गया कांग्रेस में डबल कमान की एंट्री से विवाद, जिलाध्यक्ष के ऐलान के बाद गुटबाजी बढ़ी, संगठन में एक गुट को ही मिल रहा समर्थन।
गया कांग्रेस में ‘डबल कमान’ से घमासान, संगठन में गुटबाजी तेज
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बिहार के गया में कांग्रेस संगठन के भीतर इन दिनों ‘डबल कमान’ को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। जिलाध्यक्ष के ऐलान के बाद पार्टी के अंदर गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है, जिससे स्थानीय स्तर पर संगठनात्मक एकता पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

बताया जा रहा है कि हाल ही में जिलाध्यक्ष पद को लेकर हुए फैसले के बाद पार्टी के दो अलग-अलग धड़े सक्रिय हो गए हैं। दोनों गुट अपने-अपने नेता को सही ठहराते हुए संगठन में प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। इस स्थिति को लेकर कार्यकर्ताओं के बीच भी भ्रम की स्थिति बन गई है कि आखिर संगठन का नेतृत्व किसके हाथ में है।

सूत्रों के अनुसार, ‘डबल कमान’ की स्थिति तब बनी जब एक तरफ आधिकारिक तौर पर जिलाध्यक्ष की घोषणा की गई, वहीं दूसरी ओर एक अन्य गुट ने भी अपने स्तर पर नेतृत्व का दावा पेश कर दिया। इससे पार्टी के भीतर अंदरूनी खींचतान तेज हो गई है और कई नेता खुलकर एक-दूसरे के विरोध में आ गए हैं।

इस पूरे घटनाक्रम में यह भी सामने आया है कि संगठन के भीतर एक गुट को ही अधिक समर्थन मिल रहा है, जबकि दूसरे गुट के नेता और कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। इससे असंतोष और बढ़ता जा रहा है, जो आने वाले समय में पार्टी के लिए चुनौती बन सकता है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह की स्थिति पार्टी की जमीनी पकड़ को कमजोर कर सकती है, खासकर तब जब संगठन को मजबूत करने की जरूरत हो। यदि समय रहते इस विवाद को सुलझाया नहीं गया, तो इसका असर आगामी चुनावों पर भी पड़ सकता है।

स्थानीय स्तर पर कई वरिष्ठ नेताओं ने इस विवाद को खत्म करने के लिए हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि पार्टी नेतृत्व को तुरंत स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए और यह तय करना चाहिए कि आधिकारिक तौर पर संगठन का नेतृत्व किसके हाथ में रहेगा, ताकि कार्यकर्ताओं के बीच भ्रम की स्थिति खत्म हो सके।

वहीं, कुछ नेताओं का यह भी कहना है कि इस तरह के विवाद पार्टी के अंदर लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं, लेकिन इन्हें ज्यादा लंबा खींचना नुकसानदायक हो सकता है।

फिलहाल, गया में कांग्रेस संगठन के भीतर चल रही यह खींचतान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। सभी की नजर अब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर टिकी है कि वह इस ‘डबल कमान’ की स्थिति को कैसे सुलझाता है और संगठन में एकजुटता कैसे कायम करता है।

इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि संगठनात्मक मजबूती के लिए स्पष्ट नेतृत्व और समन्वय बेहद जरूरी है, वरना अंदरूनी मतभेद पार्टी की स्थिति को कमजोर कर सकते हैं।

 

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