अंतिम सोमवारी पर 10 हजार श्रद्धालुओं ने किया जलाभिषेक:लखीसराय के अशोक धाम में 2 KM लंबी लाइन

लखीसराय के अशोकधाम मंदिर में भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था संभालने के लिए गयाजी से 4 अफसर भेजे गए। पहले भगदड़ में 7 लोगों की मौत के बाद प्रशासन अलर्ट है।
अंतिम सोमवारी पर 10 हजार श्रद्धालुओं ने किया जलाभिषेक:लखीसराय के अशोक धाम में 2 KM लंबी लाइन
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लखीसराय: सावन के आखिरी सोमवार और अशोकधाम मंदिर में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया है। पिछले दिनों हुई भगदड़ में 7 श्रद्धालुओं की मौत की घटना के बाद अब किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतने की तैयारी है। इसी क्रम में गया से चार अधिकारियों को विशेष रूप से लखीसराय भेजा गया है। ये अधिकारी अशोकधाम में भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित कराने में स्थानीय प्रशासन की मदद करेंगे।

अशोकधाम मंदिर सावन के दौरान बिहार के प्रमुख शिवधामों में शामिल है। सावन के सोमवार को यहां बिहार के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करने पहुंचते हैं। अंतिम सोमवार होने के कारण भक्तों की संख्या और बढ़ने की संभावना है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि इतनी बड़ी भीड़ को सुरक्षित तरीके से मंदिर तक पहुंचाया जाए और दर्शन के बाद बाहर निकाला जाए।

गयाजी से भेजे गए चारों अधिकारियों को भीड़ नियंत्रण और धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था का अनुभव है। उन्हें अशोकधाम की मौजूदा व्यवस्था का जायजा लेने, श्रद्धालुओं की कतार को व्यवस्थित करने, प्रवेश और निकास मार्ग पर निगरानी रखने तथा किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है।

प्रशासन ने पिछले हादसे को ध्यान में रखते हुए इस बार पहले से ही कई स्तरों पर तैयारी की है। मंदिर परिसर के साथ-साथ आसपास के रास्तों पर भी पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई गई है। भीड़ की स्थिति पर नजर रखने के लिए अधिकारियों को लगातार क्षेत्र का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं।

अशोकधाम में आने वाले श्रद्धालुओं को निर्धारित रास्ते से मंदिर तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। कतार में खड़े श्रद्धालुओं के बीच पर्याप्त दूरी बनाए रखने और एक ही स्थान पर अत्यधिक भीड़ जमा नहीं होने देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मंदिर परिसर में प्रवेश और निकास को लेकर भी व्यवस्था को व्यवस्थित किया गया है।

सावन के आखिरी सोमवार को लेकर रविवार से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाता है। कई कांवड़िए रात में ही अशोकधाम पहुंचकर सोमवार को जलाभिषेक की तैयारी करते हैं। ऐसे में प्रशासन ने रात से ही सुरक्षा व्यवस्था को सक्रिय रखने का फैसला किया है।

भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालु अपने साथ गंगाजल और अन्य पूजन सामग्री लेकर मंदिर पहुंच रहे हैं। कई भक्त पैदल यात्रा कर मंदिर पहुंचते हैं। मंदिर के आसपास बोल बम और हर-हर महादेव के जयकारों से माहौल भक्तिमय बना रहता है।

हालांकि इस बार धार्मिक उत्साह के साथ सुरक्षा को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जा रही है। पिछले हादसे में सात लोगों की जान जाने के बाद प्रशासन किसी भी स्थिति में भीड़ को बेकाबू नहीं होने देना चाहता। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि भीड़ का दबाव बढ़ने पर तुरंत वैकल्पिक व्यवस्था लागू की जाए।

मंदिर परिसर में बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई है। श्रद्धालुओं को बैरिकेडिंग के जरिए कतार में आगे बढ़ाया जाएगा। जहां भीड़ ज्यादा बढ़ने की आशंका है, वहां अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। पुलिसकर्मी लगातार श्रद्धालुओं से कतार में रहने और जल्दबाजी नहीं करने की अपील करेंगे।

प्रशासन की नजर मंदिर के आसपास के प्रमुख मार्गों पर भी है। बाहर से आने वाले वाहनों के कारण सड़क पर जाम की स्थिति न बने, इसके लिए पार्किंग और यातायात व्यवस्था पर भी ध्यान दिया जा रहा है। वाहनों को मंदिर के बिल्कुल पास पहुंचने से रोकने की व्यवस्था की जा रही है, ताकि पैदल श्रद्धालुओं के लिए रास्ता खुला रहे।

गयाजी से आए अधिकारियों के अनुभव का इस्तेमाल भीड़ प्रबंधन की कमियों को पहचानने में किया जा रहा है। अधिकारियों की टीम स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर मंदिर परिसर, प्रवेश मार्ग, निकास मार्ग, बैरिकेडिंग, पार्किंग और श्रद्धालुओं की कतार का निरीक्षण कर रही है।

प्रशासन ने मेडिकल व्यवस्था को भी अलर्ट रखा है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के कारण मंदिर के आसपास मेडिकल टीम और एंबुलेंस को तैयार रखने की व्यवस्था की गई है। किसी श्रद्धालु की तबीयत बिगड़ने, चोट लगने या गर्मी और भीड़ के कारण परेशानी होने पर उसे तत्काल उपचार उपलब्ध कराने की कोशिश की जाएगी।

पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार भीड़ की स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। जरूरत पड़ने पर श्रद्धालुओं की संख्या को अलग-अलग समूहों में नियंत्रित करने और प्रवेश की गति कम करने का फैसला लिया जा सकता है। इसका उद्देश्य मंदिर के अंदर और बाहर भीड़ का दबाव एक साथ बढ़ने से रोकना है।

अशोकधाम में सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरों और अन्य निगरानी साधनों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। संदिग्ध गतिविधियों के साथ-साथ भीड़ के घनत्व पर नजर रखी जा रही है। किसी भी स्थान पर लोगों की भीड़ अचानक बढ़ती दिखाई देने पर वहां मौजूद पुलिसकर्मियों को तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश हैं।

प्रशासन ने श्रद्धालुओं से भी सहयोग करने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि मंदिर में दर्शन और जलाभिषेक के लिए आने वाले लोग धैर्य बनाए रखें। कतार तोड़ने, आगे निकलने या धक्का-मुक्की करने से दूसरे श्रद्धालुओं को परेशानी होती है और ऐसी स्थिति में हादसे का खतरा बढ़ जाता है।

महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को लेकर भी विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है। भीड़ में बच्चों का हाथ पकड़कर रखने और बुजुर्गों को सुरक्षित तरीके से कतार में आगे बढ़ाने की अपील की जा रही है।

पिछली घटना के बाद प्रशासन की कोशिश है कि इस बार धार्मिक आयोजन शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से पूरा हो। अधिकारियों की अतिरिक्त तैनाती इसी रणनीति का हिस्सा है। गयाजी से चार अधिकारियों को भेजे जाने से स्थानीय प्रशासन को भीड़ प्रबंधन में अतिरिक्त सहयोग मिलेगा।

सावन के आखिरी सोमवार पर अशोकधाम में श्रद्धालुओं की संख्या काफी अधिक रहने की संभावना है। ऐसे में प्रशासन ने पूरे इलाके को अलर्ट मोड पर रखा है। मंदिर परिसर से लेकर बाहर तक पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी जारी है।

श्रद्धालुओं की आस्था और सुरक्षा दोनों को ध्यान में रखते हुए प्रशासन लगातार व्यवस्था को बेहतर बनाने में जुटा है। एक तरफ मंदिर में भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए भक्तों की कतारें लगेंगी, वहीं दूसरी तरफ अधिकारी यह सुनिश्चित करने में जुटे हैं कि किसी भी स्थान पर भीड़ का दबाव खतरनाक स्तर तक न पहुंचे।

पिछली भगदड़ में 7 लोगों की मौत के बाद अशोकधाम मंदिर में इस बार सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने खास तैयारी की है। गयाजी से चार अफसरों को लखीसराय भेजा गया है, जो स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा की निगरानी करेंगे। सावन के आखिरी सोमवार पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए पुलिस, प्रशासन, मेडिकल टीम और ट्रैफिक व्यवस्था को अलर्ट मोड में रखा गया है।

 

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