लखीसराय: सावन की अंतिम सोमवारी पर लखीसराय के प्रसिद्ध अशोकधाम मंदिर में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतार लग गई। मंदिर में दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचे भक्तों की लाइन करीब 2 किलोमीटर तक पहुंच गई। इसके बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। हाथों में जल और पूजन सामग्री लिए भक्त अपनी बारी का इंतजार करते रहे और लगातार हर-हर महादेव तथा बोल बम के जयकारे लगाते रहे।
अंतिम सोमवारी होने के कारण अशोकधाम में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक रही। सुबह से ही आसपास के इलाकों और दूसरे जिलों से भक्त मंदिर पहुंचने लगे थे। कई श्रद्धालु रात में ही लखीसराय पहुंच गए थे, ताकि सोमवार सुबह भगवान शिव का जलाभिषेक कर सकें। मंदिर परिसर और आसपास के रास्तों पर भक्तों की भीड़ बढ़ती गई और देखते ही देखते कतार लंबी होती चली गई।
मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं में कांवड़िए भी बड़ी संख्या में शामिल रहे। कई भक्त दूर-दराज के क्षेत्रों से पैदल यात्रा कर कांवर में जल लेकर अशोकधाम पहुंचे। श्रद्धालुओं ने पहले पूजा सामग्री तैयार की और इसके बाद कतार में लगकर बाबा भोलेनाथ के दर्शन किए। अपनी बारी आने पर उन्होंने शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और फूल अर्पित किए।
सुबह से ही मंदिर परिसर में धार्मिक माहौल बना हुआ था। चारों ओर भगवान शिव के जयकारे सुनाई दे रहे थे। श्रद्धालु हर-हर महादेव, बम-बम भोले और बोल बम का उद्घोष करते हुए आगे बढ़ते रहे। लंबी कतार के बावजूद भक्तों में उत्साह और आस्था बनी रही।
मंदिर के बाहर करीब 2 किलोमीटर लंबी कतार लगने के कारण प्रशासन ने भीड़ को व्यवस्थित रखने के लिए अतिरिक्त इंतजाम किए। बैरिकेडिंग के जरिए श्रद्धालुओं को कतार में आगे बढ़ाया गया। पुलिसकर्मी लगातार भीड़ की स्थिति पर नजर रखते रहे और लोगों से धैर्य बनाए रखने की अपील करते रहे।
हाल में अशोकधाम में श्रद्धालुओं की भीड़ के दौरान हुई भगदड़ में 7 लोगों की मौत की घटना को देखते हुए इस बार प्रशासन पहले से ज्यादा सतर्क रहा। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया और अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई। अधिकारियों ने मंदिर परिसर और श्रद्धालुओं की कतार वाले इलाकों का लगातार निरीक्षण किया।
भीड़ के दबाव को देखते हुए प्रशासन ने कोशिश की कि श्रद्धालु एक साथ मंदिर के प्रवेश द्वार पर जमा न हों। कतार को अलग-अलग हिस्सों में व्यवस्थित कर आगे बढ़ाया गया। किसी भी स्थान पर अत्यधिक भीड़ होने की स्थिति में पुलिसकर्मियों ने लोगों को रोककर व्यवस्था को सामान्य करने का प्रयास किया।
अशोकधाम में जलाभिषेक के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पेयजल की व्यवस्था भी की गई। लंबी कतार में खड़े लोगों को पानी उपलब्ध कराया गया। गर्मी और उमस के बीच श्रद्धालुओं को परेशानी न हो, इसके लिए स्वयंसेवक भी लोगों की मदद करते दिखाई दिए।
मंदिर के आसपास मेडिकल व्यवस्था को भी अलर्ट रखा गया। किसी श्रद्धालु की तबीयत खराब होने या भीड़ में चोट लगने की स्थिति में तत्काल उपचार देने की तैयारी की गई थी। एंबुलेंस और स्वास्थ्यकर्मियों को भी तैयार रखा गया।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर के आसपास पूजा सामग्री और प्रसाद की दुकानें भी सुबह से खुली रहीं। फूल, बेलपत्र, दूध, प्रसाद और अन्य पूजन सामग्री खरीदने के लिए दुकानों पर भी काफी भीड़ दिखाई दी। कांवरियों के लिए स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों की ओर से पानी और शरबत की व्यवस्था भी की गई।
अंतिम सोमवारी पर मंदिर में पूजा-अर्चना को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह रहा। कई भक्तों ने परिवार की सुख-समृद्धि और मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना की। महिलाओं ने भगवान शिव को बेलपत्र और फूल चढ़ाए, जबकि कांवड़ियों ने कांवर में लाए जल से बाबा का अभिषेक किया।
सुबह जैसे-जैसे समय बढ़ा, श्रद्धालुओं की कतार भी लंबी होती गई। 2 किलोमीटर तक पहुंची लाइन में लोग शांतिपूर्वक अपनी बारी का इंतजार करते रहे। कुछ भक्त शिव भजन और मंत्रों का जाप करते हुए आगे बढ़ रहे थे। कई जगहों पर श्रद्धालुओं ने समूह में हर-हर महादेव का जयघोष किया।
अशोकधाम में अंतिम सोमवारी के अवसर पर प्रशासन की चुनौती केवल भीड़ को नियंत्रित करना नहीं थी, बल्कि मंदिर के आसपास यातायात व्यवस्था को सुचारु रखना भी था। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के साथ वाहन भी पहुंचे। ऐसे में प्रमुख मार्गों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती कर यातायात को व्यवस्थित किया गया।
मंदिर के आसपास वाहनों की आवाजाही सीमित रखने की कोशिश की गई, ताकि पैदल श्रद्धालुओं को परेशानी न हो। पार्किंग के लिए निर्धारित स्थानों पर वाहनों को खड़ा कराया गया। पुलिस ने लोगों से अपील की कि वे सड़क के किनारे वाहन खड़ा कर जाम की स्थिति पैदा न करें।
प्रशासन ने श्रद्धालुओं से लगातार अपील की कि वे कतार तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश न करें। धक्का-मुक्की से बचने और बच्चों तथा बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने को कहा गया। पिछले हादसे के मद्देनजर प्रशासन ने भीड़ के बीच किसी तरह की अफवाह फैलने पर तुरंत जानकारी देने की अपील भी की।
अशोकधाम की धार्मिक महत्ता के कारण सावन के दौरान यहां हर सोमवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। लेकिन अंतिम सोमवारी पर भक्तों की संख्या और बढ़ जाती है। इस बार भी यही तस्वीर देखने को मिली। मंदिर के बाहर से लेकर आसपास के मार्ग तक श्रद्धालुओं की भीड़ दिखाई दी।
करीब 10 हजार श्रद्धालुओं के जलाभिषेक करने की जानकारी सामने आई है। भक्तों ने भगवान शिव के दर्शन कर अपनी श्रद्धा अर्पित की। लंबी कतार के बावजूद लोगों में भगवान भोलेनाथ के प्रति आस्था और उत्साह बना रहा।
अशोकधाम में जलाभिषेक का सिलसिला कई घंटे तक जारी रहा। कतार में लगे श्रद्धालु अपनी बारी आने का इंतजार करते रहे और मंदिर में प्रवेश के बाद कम समय में दर्शन और जलाभिषेक कर बाहर निकलते रहे, ताकि पीछे खड़े दूसरे भक्तों को भी मौका मिल सके।
मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-पाठ का क्रम भी जारी रहा। पुजारियों ने विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा कराई। श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक के बाद मंदिर में दीप जलाए और प्रसाद चढ़ाया।
अंतिम सोमवारी पर अशोकधाम में जुटी भीड़ ने पूरे लखीसराय को भक्तिमय बना दिया। मंदिर की ओर जाने वाले रास्तों पर जगह-जगह शिवभक्तों के जत्थे दिखाई दिए। कई श्रद्धालु पैदल चलकर मंदिर पहुंचे और भगवान शिव का आशीर्वाद लिया।
पिछले हादसे के बाद प्रशासन की ओर से सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती गई। अधिकारियों की टीमें लगातार स्थिति का जायजा लेती रहीं। पुलिसकर्मियों ने भीड़ को व्यवस्थित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सावन की अंतिम सोमवारी पर लखीसराय का अशोकधाम पूरी तरह शिवमय नजर आया। करीब 10 हजार श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया, जबकि मंदिर के बाहर करीब 2 किलोमीटर लंबी कतार लगी रही। हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारों के बीच भक्त अपनी बारी का इंतजार करते रहे। पिछले हादसे को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल और मेडिकल व्यवस्था तैनात की।