आज भारतीय सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिका से आए मजबूत रोजगार आंकड़ों (नॉन-फार्म पेरोल डेटा) और डॉलर के मजबूत होने के कारण वैश्विक बाजारों में मुनाफावसूली देखने को मिली।
बिजनेस न्यूज़: वैश्विक आर्थिक संकेतों और मजबूत अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के बीच भारत सहित अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। कीमती धातुओं में आई इस नरमी का असर घरेलू सर्राफा बाजार और वायदा कारोबार दोनों पर देखने को मिला है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती और ब्याज दरों को लेकर बढ़ती उम्मीदों ने निवेशकों का रुख सुरक्षित निवेश विकल्पों से कुछ हद तक दूर कर दिया है।
शुक्रवार को भारतीय बाजार में सोने की कीमतों में प्रति 10 ग्राम लगभग 1,600 से 1,850 रुपये तक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि चांदी की कीमतों में प्रति किलोग्राम 4,000 से 5,800 रुपये तक की कमी आई। सप्ताहांत के दौरान बाजार बंद रहने के कारण यही स्तर फिलहाल बरकरार हैं।
प्रमुख शहरों में सोने के भाव

ताजा बाजार दरों के अनुसार, भारत के प्रमुख शहरों में 24 कैरेट और 22 कैरेट सोने की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत लगभग 1,55,870 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोने की कीमत 1,42,890 रुपये प्रति 10 ग्राम रही। मुंबई और कोलकाता में 24 कैरेट सोना लगभग 1,55,720 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना 1,42,740 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार करता रहा।
दक्षिण भारत के प्रमुख बाजार चेन्नई में सोने के दाम अपेक्षाकृत अधिक रहे, जहां 24 कैरेट सोना लगभग 1,57,950 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना 1,44,290 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया।
चांदी की कीमतों में भी नरमी
सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट आई है। देशभर में चांदी की औसत खुदरा कीमत लगभग 2,74,900 रुपये से 2,79,900 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच बनी हुई है। दिल्ली में चांदी लगभग 2,79,900 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार कर रही है, जबकि मुंबई और कोलकाता में यह करीब 2,75,000 रुपये प्रति किलोग्राम रही। चेन्नई में चांदी की कीमत अपेक्षाकृत अधिक होकर लगभग 2,80,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंची।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सोने और चांदी की कीमतें आने वाले समय में अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीति, डॉलर की मजबूती और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों से प्रभावित होती रहेंगी।












