15 सितंबर 2008 की तारीख दुनिया के आर्थिक इतिहास की सबसे भयावह घटनाओं में गिनी जाती है। इसी दिन अमेरिका की दिग्गज इन्वेस्टमेंट बैंकिंग कंपनी लेहमन ब्रदर्स (Lehman Brothers) ने अमेरिकी कानून के तहत Chapter 11 bankruptcy protection के लिए आवेदन किया था।
बिजनेस न्यूज़: दुनिया के आर्थिक इतिहास में 15 सितंबर की तारीख एक बड़े वित्तीय संकट की शुरुआत के तौर पर याद की जाती है। 15 सितंबर 2008 को अमेरिका की प्रमुख इन्वेस्टमेंट बैंकिंग कंपनी Lehman Brothers ने अमेरिकी कानून के तहत Chapter 11 bankruptcy protection के लिए आवेदन किया था। यह उस समय अमेरिका के इतिहास का सबसे बड़ा कॉरपोरेट दिवालियापन था और इसके बाद वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में ऐसा संकट पैदा हुआ, जिसका असर कई वर्षों तक दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं पर रहा।
लेहमन ब्रदर्स के पास उस समय करीब 639 अरब डॉलर की संपत्ति थी, जबकि उसकी देनदारियां लगभग 613 अरब डॉलर थीं। कंपनी का पतन किसी एक दिन की घटना नहीं था। इसके पीछे अमेरिकी हाउसिंग मार्केट में वर्षों से बन रहा बुलबुला, आसान कर्ज, जोखिम भरे मॉर्गेज, भारी लीवरेज और जटिल वित्तीय उत्पादों का पूरा तंत्र जिम्मेदार था।
अमेरिकी हाउसिंग मार्केट से शुरू हुई कहानी
2000 के दशक की शुरुआत में अमेरिका में घरों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही थी। कम ब्याज दरों और आसान कर्ज की उपलब्धता ने हाउसिंग मार्केट को तेजी दी। वित्तीय संस्थानों ने बड़ी संख्या में लोगों को होम लोन दिए, जिनमें ऐसे कर्जदार भी शामिल थे जिनकी भुगतान क्षमता अपेक्षाकृत कमजोर थी।
इन मॉर्गेज लोन को बाद में अलग-अलग वित्तीय उत्पादों में बदला गया और दुनिया भर के निवेशकों को बेचा गया। जब तक घरों की कीमतें बढ़ती रहीं, यह मॉडल लाभदायक दिखाई देता रहा। लेकिन 2006-07 के आसपास अमेरिकी रियल एस्टेट बाजार कमजोर पड़ने लगा। घरों की कीमतों में गिरावट के साथ मॉर्गेज डिफॉल्ट बढ़े और उनसे जुड़े वित्तीय उत्पादों का मूल्य तेजी से गिरने लगा।
लेहमन ब्रदर्स पर बढ़ता दबाव
लेहमन ब्रदर्स की सबसे बड़ी कमजोरी उसकी जोखिम लेने की रणनीति और भारी leverage थी। कंपनी ने बड़ी मात्रा में उधार लेकर कारोबार बढ़ाया था। उसकी बैलेंस शीट पर ऐसी संपत्तियां भी थीं जिन्हें संकट के समय जल्दी बेच पाना मुश्किल था। इसके अलावा, कंपनी अपने कारोबार के लिए अल्पकालिक फंडिंग पर काफी निर्भर थी। जैसे-जैसे निवेशकों और कर्जदाताओं का भरोसा कम हुआ, लेहमन पर अतिरिक्त collateral और margin की मांग बढ़ने लगी।
बाद की जांच में कंपनी की कुछ अकाउंटिंग प्रथाओं, खासकर Repo 105 transactions, को लेकर भी गंभीर सवाल उठे। इन लेनदेन से रिपोर्टिंग अवधि के दौरान कंपनी की देनदारियां अस्थायी रूप से कम दिखाई देती थीं।

बचाव की कोशिशें भी नहीं आईं काम
2008 में संकट गहराने के साथ लेहमन को बचाने के प्रयास तेज हुए। कंपनी ने नई पूंजी जुटाने और अपनी संपत्तियां बेचने की कोशिश की। जून 2008 में करीब 6 अरब डॉलर की नई पूंजी जुटाई गई, लेकिन बाजार का भरोसा बहाल नहीं हो सका। सितंबर तक संभावित खरीदारों के साथ बातचीत चल रही थी। 12 से 14 सितंबर के बीच अमेरिकी Treasury Department, Federal Reserve और Securities and Exchange Commission से जुड़े अधिकारियों तथा प्रमुख वॉल स्ट्रीट कंपनियों के प्रतिनिधियों ने समाधान खोजने के लिए बैठकें कीं।
Barclays और Bank of America जैसे संभावित खरीदारों के नाम सामने आए, लेकिन लेहमन की जोखिम भरी संपत्तियों और सौदे की शर्तों को लेकर कोई अंतिम समाधान नहीं निकल सका। अमेरिकी सरकार ने भी कंपनी के लिए सीधे बेलआउट की गारंटी देने से इनकार किया।
15 सितंबर 2008 को हुआ ऐतिहासिक दिवालियापन
आखिरकार 15 सितंबर 2008 को Lehman Brothers Holdings Inc. ने Chapter 11 के तहत bankruptcy protection के लिए आवेदन कर दिया। इसके साथ ही वैश्विक वित्तीय बाजारों में घबराहट तेजी से फैल गई। लेहमन के कारोबार का संबंध दुनिया भर के बैंकों, निवेशकों और वित्तीय संस्थानों से था। इसलिए इसके दिवालिया होने के बाद बाजार में यह डर पैदा हुआ कि अगला बड़ा वित्तीय संस्थान कौन हो सकता है।
इसके तुरंत बाद अमेरिकी सरकार और Federal Reserve को AIG को बचाने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा। क्रेडिट बाजारों में भरोसा कमजोर हुआ, शेयर बाजारों में भारी गिरावट आई और बैंकों के बीच कर्ज देने की प्रक्रिया प्रभावित हुई।
लेहमन ब्रदर्स से दुनिया ने क्या सीखा?
लेहमन ब्रदर्स का पतन 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट का सबसे बड़ा प्रतीक बन गया। इसके बाद कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं में मंदी आई, कंपनियों के लिए फंडिंग मुश्किल हुई और बेरोजगारी बढ़ी। बाद की जांचों में अत्यधिक लीवरेज, कमजोर जोखिम प्रबंधन, अल्पकालिक फंडिंग पर निर्भरता, जटिल वित्तीय उत्पादों और नियामकीय कमियों को संकट के महत्वपूर्ण कारणों में शामिल किया गया।











