Bond Investment: 11-15% रिटर्न का लालच पड़ सकता है भारी, निवेश से पहले समझें जोखिम और सुरक्षा

Bond Investment: 11-15% रिटर्न वाले बॉन्ड निवेशकों को आकर्षित करते हैं, लेकिन ज्यादा रिटर्न के साथ जोखिम भी बढ़ता है। निवेश से पहले क्रेडिट, डिफॉल्ट और

सलमान खान के शो 'बिग बॉस 20' के पहले वीकेंड का वार में नॉमिनेटेड चारों कंटेस्टेंट्स—अरिश्फा खान, कनिका मान, लव गिल और उदिति सिंह—में से इस हफ्ते किसी को भी घर से बाहर नहीं किया गया।

बिजनेस न्यूज़: बैंक एफडी से ज्यादा रिटर्न की तलाश में निवेशक अक्सर कॉरपोरेट बॉन्ड का रुख करते हैं। ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म और फिनटेक कंपनियों पर कई ऐसे बॉन्ड दिखाई देते हैं, जिनमें 11 से 15 फीसदी तक सालाना रिटर्न का दावा किया जाता है। पहली नजर में यह रिटर्न आकर्षक लग सकता है, लेकिन ज्यादा ब्याज दर के पीछे आमतौर पर ज्यादा जोखिम भी छिपा होता है। इसलिए बॉन्ड में निवेश करने से पहले केवल रिटर्न पर ध्यान देना समझदारी नहीं है।

बॉन्ड को सामान्य तौर पर डेट निवेश का अपेक्षाकृत स्थिर विकल्प माना जाता है। सरकारी प्रतिभूतियों और उच्च गुणवत्ता वाले कॉरपोरेट बॉन्ड से पोर्टफोलियो में नियमित आय और विविधता लाई जा सकती है। लेकिन हर बॉन्ड समान स्तर की सुरक्षा नहीं देता। खासतौर पर हाई-यील्ड बॉन्ड में क्रेडिट, डिफॉल्ट और लिक्विडिटी का जोखिम काफी बढ़ सकता है।

11-15 फीसदी रिटर्न क्यों देता है बॉन्ड?

किसी कंपनी के बॉन्ड पर मिलने वाली ब्याज दर उसके जोखिम का संकेत भी हो सकती है। यदि कोई कंपनी बाजार की सामान्य ब्याज दरों से काफी ज्यादा रिटर्न ऑफर कर रही है, तो इसका मतलब यह हो सकता है कि निवेशकों को उस कंपनी को पैसा देने के लिए अतिरिक्त जोखिम उठाने की जरूरत है।इसलिए 13 या 14 फीसदी का कूपन देखकर इसे बैंक एफडी की तुलना में सिर्फ ज्यादा मुनाफे वाला विकल्प समझना ठीक नहीं है। ज्यादा ब्याज दर अक्सर कंपनी की कमजोर वित्तीय स्थिति, कम क्रेडिट रेटिंग या सीमित बाजार मांग से जुड़ी हो सकती है।

हाई-यील्ड बॉन्ड में बढ़ रही खुदरा निवेशकों की भागीदारी

बॉन्ड में छोटे निवेशकों की पहुंच बढ़ने के बाद हाई-यील्ड डेट इंस्ट्रूमेंट्स में भी उनकी दिलचस्पी बढ़ी है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में AA और उससे नीचे रेटिंग वाले हाई-यील्ड बॉन्ड में खुदरा निवेशकों की हिस्सेदारी 5.8 फीसदी तक पहुंच गई। वित्त वर्ष 2023-24 में यह आंकड़ा 3.8 फीसदी था।

इसके विपरीत, AAA रेटिंग वाले अपेक्षाकृत सुरक्षित कॉरपोरेट पेपर में खुदरा हिस्सेदारी केवल 0.2 फीसदी बताई गई। यह बदलाव बताता है कि ज्यादा रिटर्न की तलाश में कुछ निवेशक ज्यादा जोखिम वाले बॉन्ड की ओर बढ़ रहे हैं।

क्रेडिट रेटिंग को समझना जरूरी

बॉन्ड खरीदते समय क्रेडिट रेटिंग को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। AAA से लेकर BB और B जैसी रेटिंग तक अलग-अलग स्तर का क्रेडिट जोखिम होता है। उच्च रेटिंग आम तौर पर कंपनी की कर्ज चुकाने की बेहतर क्षमता का संकेत देती है, जबकि कम रेटिंग में डिफॉल्ट का जोखिम बढ़ जाता है। हालांकि, किसी रेटिंग को सुरक्षा की गारंटी समझना भी गलत होगा। 

रेटिंग एजेंसी का आकलन कंपनी की वित्तीय स्थिति और कर्ज चुकाने की क्षमता पर आधारित होता है और परिस्थितियों के बदलने पर रेटिंग में बदलाव हो सकता है।

बॉन्ड खरीदने से पहले इन बातों की करें जांच

निवेश से पहले कंपनी का कारोबार, आय, मुनाफा और ऑपरेटिंग कैश फ्लो जरूर देखें। सिर्फ मुनाफा होना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि बॉन्ड का ब्याज वास्तविक नकदी से चुकाया जाता है। इसके अलावा बॉन्ड की क्रेडिट रेटिंग के साथ उसका आउटलुक भी जांचें। यह भी पता करें कि बॉन्ड secured है या unsecured। सिक्योर्ड बॉन्ड में किस संपत्ति पर सुरक्षा दी गई है, इसकी जानकारी महत्वपूर्ण होती है।

मैच्योरिटी अवधि भी उतनी ही जरूरी है। जिस पैसे की जरूरत निकट भविष्य में पड़ सकती है, उसे लंबे समय के बॉन्ड में लॉक करना जोखिम भरा हो सकता है। बॉन्ड की लिक्विडिटी भी जांचें, क्योंकि जरूरत पड़ने पर बाजार में खरीदार न मिलने से आपको कम कीमत पर बॉन्ड बेचना पड़ सकता है।

पूरा पैसा एक बॉन्ड में न लगाएं

बॉन्ड निवेश में विविधीकरण बेहद महत्वपूर्ण है। पूरी पूंजी किसी एक कंपनी या सेक्टर के बॉन्ड में लगाने के बजाय अलग-अलग कंपनियों, उद्योगों और मैच्योरिटी अवधि में निवेश बांटना जोखिम को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। इसके अलावा निवेश से पहले इंफॉर्मेशन मेमोरेंडम, बॉन्ड के नियम और शर्तें तथा संबंधित कॉवेनेंट्स को समझना जरूरी है। जिस प्लेटफॉर्म के जरिए निवेश किया जा रहा है, उसकी नियामकीय स्थिति भी जांचनी चाहिए।

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