Shapoorji Pallonji: टाटा संस में हिस्सेदारी बेचकर 25,000 करोड़ जुटाने की तैयारी, नोएल टाटा को लिखा पत्र

Shapoorji Pallonji Group ने Tata Sons में अपनी हिस्सेदारी के एक हिस्से को बेचकर अगले 24 महीनों में करीब ₹25,000 करोड़ जुटाने का प्रस्ताव दिया है। जानें मामला।

कर्ज के बोझ से जूझ रहे भारत के दिग्गज कारोबारी समूह शापूरजी पलोनजी ग्रुप को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रुप अपने कर्ज का बोझ कम करने और उसे चुकाने के लिए टाटा संस में अपनी कुछ हिस्सेदारी बेचकर करीब 25 हजार करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रहा है।

Shapoorji Pallonji Tata Sons Stake: शापूरजी पलोनजी (SP) ग्रुप की वित्तीय स्थिति और टाटा संस में उसकी हिस्सेदारी को लेकर कारोबारी जगत में चर्चा तेज हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारी कर्ज के दबाव का सामना कर रहा SP ग्रुप टाटा संस में अपनी कुछ हिस्सेदारी बेचकर करीब 25,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना पर काम कर रहा है। इस प्रस्ताव के संबंध में ग्रुप के चेयरमैन शापूर मिस्त्री ने टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा को पत्र लिखकर अपनी योजना से अवगत कराया है।

बताया जा रहा है कि समूह का लक्ष्य अगले दो वर्षों में इस हिस्सेदारी बिक्री के जरिए रकम जुटाना और अपने कर्ज से जुड़े दायित्वों को पूरा करना है। हालांकि, यह प्रस्ताव अभी प्रक्रिया और बातचीत के स्तर पर है और इसे अंतिम सौदा नहीं माना जा सकता।

टाटा संस में SP ग्रुप की कितनी हिस्सेदारी?

टाटा समूह की प्रमुख होल्डिंग कंपनी टाटा संस में शापूरजी पलोनजी ग्रुप की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है। रिपोर्ट के अनुसार, SP ग्रुप के पास टाटा संस में करीब 18.37 प्रतिशत हिस्सेदारी है। समूह इस हिस्सेदारी में से लगभग 7 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचकर 25,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रहा है। प्रस्तावित बिक्री से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल मुख्य रूप से कर्ज संबंधी दायित्वों को पूरा करने के लिए किए जाने की बात सामने आई है।

टाटा संस एक अनलिस्टेड कंपनी है और इसमें हिस्सेदारी की बिक्री सामान्य सूचीबद्ध शेयरों की तरह खुले बाजार में नहीं की जा सकती। इसलिए किसी भी संभावित हिस्सेदारी बिक्री के लिए संबंधित पक्षों के बीच सहमति और प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

सितंबर में करीब 3,500 करोड़ रुपये का भुगतान

रिपोर्ट्स के मुताबिक, SP ग्रुप के सामने निकट अवधि में एक बड़ी वित्तीय जिम्मेदारी भी है। समूह को सितंबर 2026 में करीब 3,500 करोड़ रुपये का भुगतान करना है। बताया गया है कि समूह पर कुल कर्ज 50,000 करोड़ रुपये से अधिक है और इसका एक बड़ा हिस्सा टाटा संस में रखी हिस्सेदारी के बदले जुटाई गई वित्तीय व्यवस्था से जुड़ा है। ऐसे में तय समय पर भुगतान करना समूह के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अगर निर्धारित भुगतान पूरा नहीं किया जाता है, तो वित्तीय समझौतों की शर्तों के आधार पर डिफॉल्ट की स्थिति पैदा हो सकती है। इसी वजह से समूह टाटा संस में हिस्सेदारी के संभावित विनिवेश के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रहा है।

नोएल टाटा को भेजा प्रस्ताव

रिपोर्ट के अनुसार, शापूर मिस्त्री ने टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा को पत्र भेजकर हिस्सेदारी बिक्री से जुड़े प्रस्ताव की जानकारी दी है। अब इस प्रस्ताव पर टाटा संस और संबंधित पक्षों के स्तर पर चर्चा होने की संभावना है। SP ग्रुप और टाटा समूह के बीच कारोबारी संबंध कई दशकों पुराने हैं। इसलिए हिस्सेदारी बिक्री का कोई भी प्रस्ताव दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण माना जा सकता है। हालांकि, संभावित सौदे की कीमत, खरीदार और अंतिम हिस्सेदारी कितनी बेची जाएगी, जैसे विवरण अभी स्पष्ट नहीं हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, शापूर मिस्त्री की टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन और नोएल टाटा के साथ इस मुद्दे पर बातचीत चल रही थी। हालांकि, जुलाई के बाद चंद्रशेखरन के आगे की बातचीत में शामिल नहीं होने की बात कही गई है। रिपोर्ट में उनके कार्यकाल और नेतृत्व में बदलाव से जुड़े घटनाक्रम का भी उल्लेख किया गया है। ऐसे में अब प्रस्ताव पर आगे की बातचीत और निर्णय की दिशा टाटा संस तथा टाटा ट्रस्ट्स के स्तर पर होने वाली चर्चा पर निर्भर करेगी।

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