ग्रासिम इंडस्ट्रीज के नागदा प्लांट में 11-12 सितंबर 2026 को कस्टम्स अधिकारियों ने आयात-निर्यात लेनदेन की जांच के लिए तलाशी ली। कंपनी ने दस्तावेज उपलब्ध कराकर सहयोग किया और वित्तीय प्रदर्शन पर असर की संभावना से इनकार किया।
Business: ग्रासिम इंडस्ट्रीज ने बताया कि मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के नागदा स्थित बिरलाग्राम प्लांट में कस्टम्स अधिकारियों ने आयात-निर्यात लेनदेन की जांच के लिए तलाशी ली। कार्रवाई 11 सितंबर 2026 की शाम शुरू हुई और 12 सितंबर की सुबह पूरी हुई। कंपनी के अनुसार, अधिकारियों को जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराए गए और संबंधित कर्मचारियों ने भी जांच में पूरा सहयोग किया।
ग्रासिम इंडस्ट्रीज के नागदा प्लांट में कस्टम्स की तलाशी
कुमार मंगलम बिड़ला की फ्लैगशिप कंपनी ग्रासिम इंडस्ट्रीज ने अपने नागदा प्लांट में कस्टम्स अधिकारियों की तलाशी को लेकर बड़ा अपडेट दिया है। कंपनी ने बताया कि मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के नागदा स्थित बिरलाग्राम में उसकी सेल्युलोजिक स्टेपल फाइबर बनाने वाली यूनिट में यह कार्रवाई की गई। कस्टम्स कमिश्नर, इंदौर के कार्यालय की ओर से की गई तलाशी का संबंध कंपनी के आयात-निर्यात लेनदेन की जांच से था।

कंपनी के अनुसार, यह कार्रवाई कस्टम्स एक्ट, 1962 की धारा 105 के तहत की गई। इस प्रावधान के तहत कस्टम्स अधिकारियों को संबंधित मामलों की जांच के दौरान परिसर में तलाशी लेने का अधिकार मिलता है। ग्रासिम इंडस्ट्रीज ने नियामकीय जानकारी में इस कार्रवाई से जुड़े तथ्यों को साझा किया है।
11 सितंबर की शाम शुरू हुई कार्रवाई
ग्रासिम इंडस्ट्रीज के अनुसार, कस्टम्स अधिकारियों ने 11 सितंबर 2026 की शाम नागदा यूनिट में तलाशी शुरू की थी। यह कार्रवाई 12 सितंबर 2026 की सुबह तक चली और इसके बाद अधिकारियों ने अपना सर्च ऑपरेशन पूरा कर लिया।
तलाशी के दौरान अधिकारियों ने कंपनी के रिकॉर्ड की जांच की। इसके अलावा कंपनी की आयात-निर्यात गतिविधियों से संबंधित जानकारी भी जुटाई गई। इस प्रक्रिया के दौरान कंपनी की ओर से अधिकारियों को मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध कराए गए।
ग्रासिम इंडस्ट्रीज ने कहा कि उसकी नागदा यूनिट ने जांच के दौरान कस्टम्स अधिकारियों को पूरा सहयोग दिया। संबंधित कर्मचारियों ने अधिकारियों के साथ बातचीत में भी मदद की। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह आगे भी जांच से जुड़ी किसी आवश्यक जानकारी और दस्तावेज को उपलब्ध कराने में सहयोग करेगी।
कंपनी ने जांच में सहयोग की बात कही
कस्टम्स की तलाशी के बाद ग्रासिम इंडस्ट्रीज ने अपनी ओर से सहयोग का रुख स्पष्ट किया है। कंपनी ने बताया कि अधिकारियों की ओर से मांगे गए रिकॉर्ड और दस्तावेज उपलब्ध कराए गए। साथ ही संबंधित कर्मचारियों को जांच प्रक्रिया में सहयोग करने के लिए उपलब्ध कराया गया।
कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, जांच की यह प्रक्रिया आयात-निर्यात लेनदेन से संबंधित है। हालांकि, कंपनी ने फिलहाल इस कार्रवाई के आधार पर किसी तरह की अनियमितता या उल्लंघन का निष्कर्ष नहीं बताया है।
अभी तक कोई शो कॉज नोटिस या आदेश नहीं
ग्रासिम इंडस्ट्रीज ने अपने खुलासे में यह भी बताया कि जानकारी दाखिल करने की तारीख तक कस्टम्स अधिकारियों की ओर से कोई शो कॉज नोटिस जारी नहीं किया गया था। इसके अलावा अधिकारियों की ओर से कोई आदेश भी जारी नहीं किया गया है।
इसका मतलब है कि कंपनी के पास उपलब्ध जानकारी के अनुसार, तलाशी की कार्रवाई के बाद उस समय तक कोई औपचारिक शो कॉज नोटिस या आदेश प्राप्त नहीं हुआ था। आगे की प्रक्रिया कस्टम्स जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।
कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर असर की उम्मीद नहीं
ग्रासिम इंडस्ट्रीज ने कहा है कि इस कार्रवाई से उसके वित्तीय प्रदर्शन पर कोई महत्वपूर्ण असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। कंपनी के मुताबिक, उसके सामान्य कारोबारी संचालन भी बिना किसी रुकावट के जारी रहने की उम्मीद है।
कंपनी ने यह संकेत दिया है कि कस्टम्स की तलाशी के बावजूद उसकी कारोबारी गतिविधियां सामान्य रूप से चलती रहेंगी। निवेशकों के लिए यह अपडेट इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कस्टम्स की जांच से जुड़ी किसी भी आगे की कार्रवाई का असर कंपनी के संचालन या वित्तीय स्थिति पर पड़ सकता है।
सेबी नियमों के तहत दी गई जानकारी
ग्रासिम इंडस्ट्रीज ने कस्टम्स की तलाशी से जुड़ी जानकारी सेबी के लिस्टिंग ऑब्लिगेशन्स एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स रेगुलेशंस, 2015 के रेगुलेशन 30 के तहत साझा की है। कंपनी ने सेबी मास्टर सर्कुलर के प्रावधानों के अनुसार भी संबंधित जानकारी दाखिल की है।
12 सितंबर 2026 को जारी कंपनी की सूचना आम लोगों और रिकॉर्ड के लिए उसकी वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई है। इस खुलासे के जरिए कंपनी ने तलाशी की तारीख, कार्रवाई की अवधि, जांच का विषय और कंपनी की ओर से दिए गए सहयोग की जानकारी साझा की है।
ग्रासिम इंडस्ट्रीज ने पूरी प्रक्रिया के दौरान स्टेकहोल्डर्स के साथ पारदर्शिता बनाए रखने पर भी जोर दिया है। कंपनी का कहना है कि उसका रुख कंप्लायंस और कॉर्पोरेट गवर्नेंस से जुड़े मानकों के अनुरूप है।













