क्या UPI पर लगेगा चार्ज? नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक लहिरी ने दिया बड़ा संकेत

UPI Charges को लेकर बड़ा संकेत सामने आया है। नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक लहिरी ने कहा कि UPI हमेशा मुफ्त नहीं रह सकता और कुछ लेनदेन पर मामूली शुल्क लगाया जा

UPI को लेकर कुछ दिन पहले ऐसी खबरें सामने आई थीं कि डिजिटल पेमेंट पर जल्द चार्ज लगाया जा सकता है। हालांकि, सरकार ने इन खबरों को निराधार बताते हुए साफ किया था कि UPI पर कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लगाया जाएगा।

UPI Charges: भारत में डिजिटल पेमेंट का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन चुके Unified Payments Interface (UPI) को लेकर एक बार फिर शुल्क की चर्चा तेज हो गई है। सरकार पहले UPI पर अतिरिक्त चार्ज लगाए जाने की खबरों को खारिज कर चुकी है, लेकिन नीति आयोग के वाइस चेयरमैन अशोक लहिरी के हालिया बयान ने इस बहस को फिर से सामने ला दिया है। उन्होंने संकेत दिया कि UPI को हमेशा मुफ्त रखना संभव नहीं हो सकता और भविष्य में कुछ तरह के डिजिटल ट्रांजैक्शन पर मामूली शुल्क लगाने पर विचार किया जा सकता है।

हालांकि, उनके बयान से यह स्पष्ट नहीं है कि UPI पर शुल्क कब से लागू होगा या आम यूजर्स को किसी तरह का भुगतान करना पड़ेगा। फिलहाल इस संबंध में कोई निश्चित समयसीमा भी सामने नहीं आई है।

UPI चार्ज को लेकर क्या बोले अशोक लहिरी?

मुंबई में आयोजित Global Fintech Fest 2026 (GFF 2026) के दौरान अशोक लहिरी ने डिजिटल पेमेंट के बिजनेस मॉडल और UPI की लागत को लेकर बात की। एक इंटरव्यू में उनसे पूछा गया कि मर्चेंट पेमेंट पर UPI शुल्क या Merchant Discount Rate (MDR) कब लागू किया जा सकता है। इस पर लहिरी ने कोई निश्चित तारीख बताने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि UPI जैसे डिजिटल पेमेंट सिस्टम को चलाने में तकनीकी ढांचे, ऑपरेशन और अन्य व्यवस्थाओं पर लागत आती है। इसलिए लंबे समय तक किसी सेवा को पूरी तरह मुफ्त बनाए रखना आर्थिक रूप से टिकाऊ मॉडल नहीं हो सकता।

उनके मुताबिक, फिनटेक कंपनियों के पास ऐसा वित्तीय मॉडल होना चाहिए, जिससे वे अपने संचालन का खर्च निकाल सकें। हालांकि, किस तरह के लेनदेन पर शुल्क लगेगा, कौन भुगतान करेगा और क्या कोई न्यूनतम सीमा तय होगी, इन मुद्दों पर विशेषज्ञों को फैसला करना होगा।

क्या आम UPI यूजर्स को देना होगा पैसा?

अशोक लहिरी के बयान में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि उन्होंने शुल्क को लेकर कोई विस्तृत प्रस्ताव या दर नहीं बताई। उन्होंने संकेत दिया कि यदि भविष्य में चार्ज लागू होते हैं, तो यह बहुत मामूली हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ बेसिस पॉइंट्स का शुल्क लगाया जा सकता है और यह एक प्रतिशत से कम हो सकता है। उनके अनुसार, भारतीय उपभोक्ताओं का एक बड़ा वर्ग केवल कीमत के बजाय भुगतान सेवा की गुणवत्ता, भरोसे और मजबूती को भी महत्व देता है।

इसका मतलब यह है कि यदि शुल्क व्यवस्था आती भी है, तो उसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि शुल्क किस प्रकार के ट्रांजैक्शन पर लगाया जाता है और उसका भुगतान व्यापारी, बैंक, पेमेंट कंपनी या ग्राहक में से कौन करता है।

UPI पर अभी क्या स्थिति है?

UPI भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम का महत्वपूर्ण हिस्सा है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक इसका व्यापक इस्तेमाल होता है। आमतौर पर बैंक अकाउंट से सीधे UPI के जरिए भुगतान करने वाले ग्राहकों के लिए कोई अलग ट्रांजैक्शन फीस नहीं ली जाती। कुछ समय पहले UPI पर शुल्क लगाए जाने की खबरों के बाद सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया था कि आम लोगों के लिए UPI पेमेंट पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का कोई तत्काल फैसला नहीं हुआ है। 

इसलिए अशोक लहिरी का बयान फिलहाल भविष्य की संभावित व्यवस्था को लेकर एक नीति-स्तरीय टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है, न कि शुल्क लागू होने की आधिकारिक घोषणा के तौर पर।

MDR को लेकर क्यों हो रही है चर्चा?

UPI से जुड़े शुल्क की बहस में Merchant Discount Rate यानी MDR एक अहम मुद्दा है। MDR वह शुल्क है जो डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने वाले कारोबारियों से संबंधित भुगतान व्यवस्था में लिया जा सकता है। खबर के मुताबिक, हालिया कानूनी बदलाव के बाद UPI ट्रांजैक्शन पर सभी परिस्थितियों में जीरो-MDR की अनिवार्यता को हटाने का रास्ता खुला है। इससे भविष्य में कुछ चुनिंदा या उच्च-मूल्य वाले डिजिटल ट्रांजैक्शन पर सीमित शुल्क लगाने की संभावना पर चर्चा हो रही है।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर UPI भुगतान पर तुरंत चार्ज लगने वाला है। शुल्क की दर, दायरा, भुगतानकर्ता और लागू होने की तारीख जैसे मुद्दों पर अभी स्पष्ट जानकारी का इंतजार है।

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