भागलपुर में गंगा नदी के बढ़े जलस्तर ने कोलकाता से वाराणसी जा रहे लग्जरी पर्यटक क्रूज ‘राजमहल’ की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया। गंगा में उफान और पुल के नीचे कम होती जगह को देखते हुए क्रूज को आगे बढ़ने से रोक दिया गया। क्रूज में सवार 9 विदेशी समेत 11 पर्यटकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। सिमरिया पुल के नीचे से क्रूज को निकालना जोखिम भरा माना गया, क्योंकि गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण पुल और पानी की सतह के बीच उपलब्ध ऊंचाई काफी कम हो गई थी।
बताया गया कि राजमहल क्रूज कोलकाता से वाराणसी की यात्रा पर निकला था। यह यात्रा राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या-1 यानी गंगा के रास्ते होनी थी। रास्ते में बिहार के भागलपुर पहुंचने के बाद गंगा के जलस्तर की स्थिति ने पूरे कार्यक्रम को प्रभावित कर दिया। नदी में पानी बढ़ने के साथ-साथ पुलों के नीचे जहाज के निकलने के लिए जरूरी वर्टिकल क्लियरेंस कम हो गया। ऐसे में जलमार्ग अधिकारियों ने सुरक्षा मानकों को देखते हुए क्रूज को आगे बढ़ाने की अनुमति नहीं दी।
भागलपुर में क्रूज को सुरक्षित स्थान पर लंगर डालकर रोक दिया गया। भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण यानी IWAI की टीम ने नदी की स्थिति और पुल के नीचे उपलब्ध जगह का जायजा लिया। अधिकारियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि ऊंचे जलस्तर के बीच इतने बड़े पर्यटक जहाज को पुल के नीचे से निकालना किसी भी तरह का जोखिम पैदा कर सकता था। इसलिए जल्दबाजी में क्रूज को आगे भेजने के बजाय यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई।
गंगा के बढ़े जलस्तर का असर केवल क्रूज के परिचालन पर ही नहीं पड़ा है, बल्कि भागलपुर में जलमार्ग परिवहन भी प्रभावित हुआ है। नदी में पानी बढ़ने से कई पुलों के गर्डर और पानी की सतह के बीच का अंतर कम हो गया है। बड़े जहाजों के लिए यह स्थिति बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि जहाज के ऊपरी हिस्से और पुल के बीच पर्याप्त दूरी नहीं रहने पर टक्कर का खतरा हो सकता है। इसी वजह से जलमार्ग प्राधिकरण की ओर से सुरक्षित क्लियरेंस मिलने तक क्रूज को रोकने का फैसला किया गया।
राजमहल क्रूज पर सवार पर्यटकों को लेकर भी प्रशासन और जलमार्ग अधिकारियों ने एहतियाती कदम उठाए। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार विदेशी यात्रियों को सुरक्षित तरीके से क्रूज से उतारकर आगे की यात्रा के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई। एक रिपोर्ट में 9 विदेशी पर्यटकों को छोटी नावों के माध्यम से किनारे लाकर भागलपुर रेलवे स्टेशन से ट्रेन के जरिए पटना भेजे जाने की जानकारी दी गई है। इसका उद्देश्य यात्रियों की यात्रा को पूरी तरह बाधित होने से बचाना और उन्हें सुरक्षित तरीके से आगे पहुंचाना था।
क्रूज को रोकने का फैसला उस समय लिया गया जब गंगा का जलस्तर काफी बढ़ा हुआ था। भागलपुर और आसपास के इलाकों में पहले से ही बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई थी। ऐसे में नदी के रास्ते बड़े जहाज का संचालन अतिरिक्त चुनौती बन गया था। अधिकारियों के सामने एक तरफ पर्यटकों की सुरक्षा थी और दूसरी तरफ जहाज को सुरक्षित स्थान पर रखने की जिम्मेदारी। दोनों पहलुओं को देखते हुए क्रूज को फिलहाल सुरक्षित तरीके से रोकना जरूरी समझा गया।
सिमरिया पुल के नीचे कम वर्टिकल क्लियरेंस इस पूरे घटनाक्रम की सबसे बड़ी वजह बनी। सामान्य परिस्थितियों में नदी का जलस्तर कम होने पर जहाज और पुल के बीच पर्याप्त दूरी उपलब्ध रहती है। लेकिन बाढ़ के दौरान पानी की सतह ऊपर आने से यह अंतर तेजी से घट जाता है। बड़े क्रूज के लिए कुछ मीटर का अंतर भी बेहद महत्वपूर्ण होता है। अगर जहाज को जबरन ऐसे स्थान से निकाला जाए जहां पर्याप्त जगह न हो तो जहाज के ऊपरी हिस्से के पुल से टकराने की आशंका बनी रहती है।
जलमार्ग अधिकारियों की निगरानी में स्थिति का आकलन किया जाता रहा। पानी के स्तर में कमी आने और सुरक्षित रास्ता उपलब्ध होने के बाद ही आगे की यात्रा को लेकर फैसला किया जा सकता है। इसी वजह से क्रूज को भागलपुर में रोकना यात्रियों के लिए अस्थायी परेशानी जरूर बना, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से इसे जरूरी कदम माना गया।
राजमहल क्रूज की यात्रा बिहार के लिए पर्यटन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। गंगा के रास्ते कोलकाता, पटना और वाराणसी जैसे प्रमुख शहरों को जोड़ने वाले नदी पर्यटन में विदेशी पर्यटकों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है। ऐसे क्रूज के जरिए यात्रियों को सड़क या रेल मार्ग से अलग गंगा के किनारे बसे ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों को देखने का मौका मिलता है। भागलपुर भी इस जल पर्यटन मार्ग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
हालांकि इस बार गंगा का बढ़ा जलस्तर इस पर्यटन यात्रा के लिए बड़ी चुनौती बन गया। भागलपुर पहुंचने के बाद क्रूज को आगे बढ़ने में परेशानी हुई। पहले भी गंगा में पानी बढ़ने की वजह से बड़े क्रूज के संचालन को लेकर सावधानी बरती जाती रही है। जलस्तर और पुलों के नीचे उपलब्ध जगह के आधार पर ही जहाजों को आगे बढ़ने की अनुमति दी जाती है।
इस घटना ने यह भी दिखाया कि नदी पर्यटन में मौसम और जलस्तर की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। सड़क या रेल परिवहन की तरह नदी के रास्ते जहाज का संचालन केवल तय समय-सारणी पर निर्भर नहीं करता। नदी की गहराई, बहाव, जलस्तर, पुलों के नीचे उपलब्ध जगह और मौसम की स्थिति के अनुसार यात्रा में बदलाव करना पड़ सकता है। खासकर मानसून के दौरान गंगा में पानी बढ़ने पर यह चुनौती और बड़ी हो जाती है।
भागलपुर में क्रूज के रुकने के दौरान यात्रियों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन और जलमार्ग से जुड़े अधिकारियों ने निगरानी बनाए रखी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार बाद में क्रूज को सुरक्षित ठहराव के लिए अपस्ट्रीम की ओर मुंगेर की दिशा में भी बढ़ाया गया। यात्रियों को तय पर्यटक स्थलों तक पहुंचाने के लिए वैकल्पिक परिवहन की व्यवस्था की गई।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे राहत वाली बात यह रही कि क्रूज में सवार पर्यटकों को सुरक्षित रखा गया और किसी बड़े हादसे की सूचना नहीं है। गंगा में तेज बहाव और ऊंचे जलस्तर के बीच पुल के नीचे से बड़े जहाज को निकालने की कोशिश करने के बजाय उसे रोकना और यात्रियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करना सुरक्षा की दृष्टि से अहम कदम रहा।
कोलकाता से वाराणसी तक की यह यात्रा सामान्य परिस्थितियों में गंगा के किनारे बसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों से होकर गुजरती है। विदेशी पर्यटकों के लिए यह केवल एक यात्रा नहीं बल्कि भारत की नदी संस्कृति, धार्मिक विरासत और ऐतिहासिक स्थलों को करीब से देखने का अवसर भी होती है। लेकिन इस बार गंगा के उफान ने यात्रा का कार्यक्रम प्रभावित कर दिया।
भागलपुर में राजमहल क्रूज के रुकने की घटना ऐसे समय हुई है जब बिहार में गंगा समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ है। बाढ़ के कारण कई इलाकों में सामान्य जनजीवन प्रभावित है। ऐसे में नदी मार्ग पर चलने वाले बड़े पर्यटक जहाजों के लिए भी सुरक्षा संबंधी अतिरिक्त सावधानी जरूरी हो जाती है। जलस्तर सामान्य होने और पुलों के नीचे पर्याप्त क्लियरेंस मिलने के बाद ही इस तरह के जहाजों की आवाजाही पूरी तरह सामान्य हो सकती है।
फिलहाल राजमहल क्रूज से जुड़े इस घटनाक्रम ने भागलपुर में गंगा के बढ़े जलस्तर और नदी पर्यटन के बीच संबंध को सामने ला दिया है। सिमरिया पुल के नीचे पर्याप्त जगह नहीं मिलने के कारण यात्रा की रफ्तार थमी, लेकिन यात्रियों को सुरक्षित रखने के लिए समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था की गई। 9 विदेशी समेत 11 पर्यटकों के सुरक्षित होने से राहत है। अब गंगा के जलस्तर और पुलों के नीचे उपलब्ध क्लियरेंस के आधार पर आगे की यात्रा को लेकर फैसला लिया जाएगा।











