बाबा नीब करौरी की पैतृक संपत्ति पर विवाद, पौत्रियों ने राजस्व रिकॉर्ड दिखाकर ट्रस्ट को दान से किया इनकार

बाबा नीब करौरी की पैतृक संपत्ति को लेकर विवाद में छह पौत्रियों ने घरौनी और परिवार रजिस्टर की प्रतियां देकर ट्रस्ट को दान या बिक्री से इनकार किया।

फिरोजाबाद में बाबा नीब करौरी की छह पौत्रियों ने दावा किया कि पैतृक घर और डाक बंगला अब भी राजस्व अभिलेखों में उनके नाम दर्ज हैं। उन्होंने प्रशासन को घरौनी और परिवार रजिस्टर की प्रतियां सौंपकर संपत्ति दान या बिक्री से इनकार किया।

फिरोजाबाद: बाबा नीब करौरी महाराज की पैतृक संपत्ति को लेकर विवाद सामने आया है। उनकी छह पौत्रियों ने प्रशासन को दिए जवाब में दावा किया कि पैतृक मकान और डाक बंगला न तो बेचा गया है और न ही किसी ट्रस्ट को दान किया गया। इसके समर्थन में उन्होंने घरौनी और परिवार रजिस्टर की प्रतियां प्रस्तुत की हैं। मामले की जांच के लिए प्रशासन ने तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है।

राजस्व अभिलेखों में अब भी दर्ज है बाबा का नाम

बाबा नीब करौरी के पैतृक घर और डाक बंगले को लेकर उनकी पौत्रियों ने प्रशासन के सामने अपने दावे के समर्थन में दस्तावेज पेश किए हैं। उनके मुताबिक, संबंधित संपत्तियां अभी भी राजस्व अभिलेखों में बाबा नीब करौरी के नाम दर्ज हैं।

पौत्रियों ने बताया कि भूखंड संख्या 220 में स्थित पैतृक मकान की घरौनी में अब भी बाबा का नाम दर्ज है। वहीं, भूखंड संख्या 211 स्थित डाक बंगले को अभिलेखों में बाबा नीब करौरी की जन्मस्थली के रूप में दर्ज बताया गया है।

छहों पौत्रियों ने संपत्ति को किसी ट्रस्ट को दान या बेचने से इनकार किया है। उन्होंने प्रशासन से घरौनी में कानूनी वारिसों के नाम दर्ज करने और उन्हें संपत्ति पर कब्जा दिलाने की मांग की है।

डीएम को दी गई थी शिकायत

24 अगस्त को बाबा नीब करौरी की छह पौत्रियों की ओर से उनके पति मनोज रावत ने जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा को शिकायत पत्र सौंपा था। इसमें श्री ठाकुर हनुमान जी ट्रस्ट पर बाबा के पैतृक घर और उसके पास स्थित डाक बंगले पर जबरन कब्जा करने का आरोप लगाया गया है।

शिकायत के अनुसार, बाबा का जन्म इसी पैतृक घर में हुआ था और उन्होंने अपना अधिकांश समय डाक बंगले में बिताया था। ट्रस्ट की अध्यक्ष बाबा की बेटी गिरिजा भटेले हैं, जो आगरा में रहती हैं। ट्रस्ट के अधिकांश कार्य सचिव संजय गुप्ता द्वारा देखे जाने की बात भी शिकायत में कही गई है।

मामले की जांच के लिए डीएम ने एडीएम न्यायिक अरविंद द्विवेदी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है। कमेटी ने दोनों पक्षों को सात दिन के भीतर अपना पक्ष और संबंधित साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए कहा था।

जवाब दर्ज होने में हुई प्रशासनिक चूक

पौत्रियों ने तहसीलदार कार्यालय से मिले नोटिस के जवाब में अपना पक्ष रखा था। भावना रावत, सुनीता शर्मा, अर्चना शर्मा, वंदना शर्मा, रितु तिवारी और रिचा रावत ने सात सितंबर को जवाब दाखिल किया।

हालांकि, संपूर्ण समाधान दिवस होने के कारण कर्मचारियों ने उनके जवाब को गलती से शिकायती पत्र के रूप में दर्ज कर लिया। इस वजह से दस्तावेज जांच कमेटी के अध्यक्ष एडीएम न्यायिक तक समय पर नहीं पहुंच सके।

राजस्व निरीक्षक योगेंद्र उपाध्याय के अनुसार, पौत्रियों का जवाब उन्हें प्राप्त हुआ है। उस पर गलती से समाधान दिवस की मुहर लग गई थी। उन्होंने कहा कि जवाब को उच्चाधिकारियों तक भेजा जाएगा।

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