बंगाल में 232 मदरसों पर बंदी की कार्रवाई, 100 को नोटिस; जांच में सामने आईं गंभीर अनियमितताएं

बांग्लादेश ने भारत के साथ रिश्ते रीसेट करने की इच्छा जताई है। विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा कि दोनों देशों के बीच सीधे द्विपक्षीय संवाद जरूरी है।

बांग्लादेश ने भारत के साथ रिश्ते रीसेट करने की इच्छा जताई है। विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा कि दोनों देशों के बीच सीधे द्विपक्षीय संवाद जरूरी है। उन्होंने शेख हसीना के कार्यकाल में संबंधों को असहज बताया और आपसी हितों पर जोर दिया।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में सरकारी अनुमति या आवश्यक मान्यता के बिना संचालित किए जा रहे 232 मदरसों के खिलाफ तत्काल बंदी की कार्रवाई शुरू की गई है। राज्य सरकार ने 100 अन्य मदरसों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। प्रशासनिक जांच में पंजीकरण, प्रबंधन, शिक्षण व्यवस्था, बुनियादी ढांचे और वित्तपोषण से जुड़ी अनियमितताएं सामने आई हैं।

क्या है पूरा मामला?

पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में संचालित मदरसों की व्यापक जांच के बाद बिना आवश्यक अनुमति चल रहे 232 संस्थानों को तत्काल बंद करने का आदेश दिया है। इसके अलावा 100 मदरसों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। राज्य के अल्पसंख्यक मामले और मदरसा शिक्षा मंत्री खुदीराम टुडू के अनुसार, जिला प्रशासन ने राज्य के 22 जिलों और कोलकाता के विभिन्न इलाकों में मदरसों की जांच की थी।

जांच के दौरान मदरसों के प्रबंधन, शिक्षकों, छात्रों, कक्षाओं, बुनियादी सुविधाओं, पंजीकरण और वित्तपोषण के स्रोतों से संबंधित जानकारी जुटाई गई। इसके बाद सरकार की ओर से गठित विशेष टीम ने उपलब्ध जानकारी का सत्यापन किया।

2,132 मदरसे मान्यता के साथ संचालित

मंत्री के अनुसार, जांच में लगभग 2,132 मदरसों के पास आवश्यक सरकारी मंजूरी, पंजीकरण या संबद्धता होने की जानकारी सामने आई। दूसरी ओर, 2,396 मदरसे ऐसे पाए गए जो किसी सरकारी बोर्ड या आवश्यक संस्थान से संबद्धता के बिना संचालित हो रहे थे।

सरकार ने इसी जांच के आधार पर पहले चरण में 232 मदरसों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई का निर्णय लिया है। इन संस्थानों को संचालन बंद करने का आदेश दिया गया है। हालांकि, बाकी बिना अनुमति संचालित संस्थानों के संबंध में भी आगे की प्रक्रिया जारी रहने की बात कही गई है।

100 मदरसों को कारण बताओ नोटिस

सरकार ने 100 मदरसों में गंभीर खामियां पाए जाने के बाद उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इन संस्थानों को यह स्पष्ट करना होगा कि वे किस आधार पर कानूनी रूप से संचालित हो रहे हैं।

यदि संबंधित मदरसे आवश्यक दस्तावेज, अनुमति या वैधता साबित करने में असफल रहते हैं, तो उनके खिलाफ निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत बंद करने की कार्रवाई की जा सकती है।

सरकार का कहना है कि कार्रवाई जांच और सत्यापन की प्रक्रिया के बाद की जा रही है। इसलिए जिन संस्थानों को नोटिस मिला है, उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा।

मालदा में सबसे अधिक मदरसों पर कार्रवाई

मदरसा शिक्षा विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, 232 मदरसों में सबसे अधिक कार्रवाई मालदा जिले में हुई है। यहां लगभग 44 से 45 मदरसों को बंद करने का आदेश दिया गया है।

इसके बाद उत्तर दिनाजपुर में करीब 37 से 38 मदरसों के खिलाफ कार्रवाई की गई। दक्षिण 24 परगना में लगभग 32 मदरसों और मुर्शिदाबाद तथा नादिया में करीब 25-25 मदरसों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी सामने आई है।

जिला प्रशासन की ओर से की गई जमीनी जांच में इन संस्थानों की वास्तविक स्थिति का आकलन किया गया। जांच में केवल दस्तावेज ही नहीं, बल्कि शिक्षण व्यवस्था और उपलब्ध सुविधाओं को भी देखा गया।

जांच में क्या-क्या देखा गया?

राज्य सरकार की जांच में मदरसों के संचालन से जुड़े कई पहलुओं को शामिल किया गया था। अधिकारियों ने संस्थानों के पंजीकरण और संबद्धता की स्थिति के साथ-साथ प्रबंधन व्यवस्था की जानकारी भी जुटाई।

इसके अलावा छात्रों के नामांकन और पहचान, शिक्षकों की उपलब्धता, कक्षाओं और बुनियादी ढांचे तथा संस्थानों को मिलने वाले वित्तीय संसाधनों के स्रोतों की भी जांच की गई।

जांच के दौरान कुछ संस्थानों में निर्धारित पाठ्यक्रम से अलग तरीके से पढ़ाई कराए जाने और कक्षाओं में पर्याप्त जगह नहीं होने जैसी समस्याओं की भी जानकारी सामने आई।

22 जिलों और कोलकाता में हुई जांच

प्रशासनिक जांच का दायरा राज्य के 22 जिलों के साथ कोलकाता के अलग-अलग क्षेत्रों तक था। संबंधित जिलों के जिला मजिस्ट्रेटों ने अपने अधिकार क्षेत्र में संचालित मदरसों को लेकर रिपोर्ट तैयार की।

इन रिपोर्टों में संस्थानों के पंजीकरण, संबद्धता, प्रबंधन, छात्रों की संख्या, शिक्षण स्टाफ, बुनियादी सुविधाओं और फंडिंग से संबंधित विवरण शामिल किए गए। राज्य स्तर पर इन रिपोर्टों का सत्यापन कराने के लिए विशेष टीम भी भेजी गई थी।

सरकार ने सत्यापन के बाद उन संस्थानों को अलग किया जिनके संचालन में गंभीर नियमगत खामियां मिलीं।

कार्रवाई का पहला चरण

232 मदरसों को बंद करने का आदेश इस कार्रवाई का पहला चरण बताया गया है। इसका अर्थ है कि जांच के आधार पर सरकार ने सबसे पहले उन संस्थानों के खिलाफ कदम उठाया है जिनके संचालन को लेकर अनुमति और नियामकीय स्थिति स्पष्ट नहीं पाई गई।

वहीं, 100 मदरसों को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस के जरिए उन्हें अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर दिया गया है। यदि वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपनी वैधता साबित कर देते हैं, तो आगे की कार्रवाई का स्वरूप उसी के अनुसार तय किया जाएगा।

सरकार की जांच का उद्देश्य

राज्य सरकार की ओर से की गई यह कार्रवाई मदरसा शिक्षा व्यवस्था में पंजीकरण, संबद्धता और प्रशासनिक मानकों की स्थिति की जांच से जुड़ी है। अधिकारियों ने संस्थानों की संख्या और उनके संचालन की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए जिला स्तर पर जानकारी एकत्र की।

इस प्रक्रिया में यह भी जांचा गया कि संबंधित संस्थान किस बोर्ड या सरकारी व्यवस्था से जुड़े हैं और क्या उनके पास संचालन के लिए आवश्यक अनुमति मौजूद है।

आगे क्या होगा?

232 मदरसों के खिलाफ बंदी की कार्रवाई के बाद अब 100 नोटिस प्राप्त संस्थानों के जवाब महत्वपूर्ण होंगे। यदि वे आवश्यक अनुमति और दस्तावेज पेश नहीं कर पाते हैं, तो उनके खिलाफ भी नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।

इसके अलावा, जांच में सामने आए अन्य संस्थानों की स्थिति पर भी प्रशासनिक स्तर पर आगे निर्णय लिया जा सकता है। फिलहाल सरकार ने पहले चरण में 232 मदरसों को बंद करने और 100 संस्थानों से स्पष्टीकरण मांगने की प्रक्रिया शुरू की है।

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