हिमाचल में बारिश कम, तबाही ज्यादा: मानसून में 300 मौतें और ₹1683 करोड़ का नुकसान; 19 सितंबर तक बरसेंगे बादल

हिमाचल में मानसून से करीब 300 लोगों की मौत और ₹1683 करोड़ की संपत्ति तबाह हुई। 19 सितंबर तक हल्की बारिश के आसार हैं, तापमान में 3 डिग्री तक गिरावट होगी।
हिमाचल में बारिश कम, तबाही ज्यादा: मानसून में 300 मौतें और ₹1683 करोड़ का नुकसान; 19 सितंबर तक बरसेंगे बादल
Photo Credit / Attribution: Google

हिमाचल प्रदेश में इस साल मानसून ने भारी तबाही मचाई है। लगातार बारिश, भूस्खलन, अचानक आई बाढ़, बादल फटने और सड़क हादसों ने राज्य के कई हिस्सों में जनजीवन को प्रभावित किया है। मानसून सीजन के दौरान अब तक करीब 300 लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है, जबकि सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को भी बड़े स्तर पर नुकसान पहुंचा है। ताजा उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 11 सितंबर तक राज्य में मानसून से संबंधित घटनाओं और सड़क हादसों में 296 लोगों की जान जा चुकी थी और कुल नुकसान करीब 1,661.97 करोड़ रुपये आंका गया था। इसके बाद नुकसान और मौतों का आंकड़ा 300 के आसपास पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई है।

राज्य में मानसून का असर केवल जान-माल के नुकसान तक सीमित नहीं रहा है। कई जगह सड़कें बंद हुईं, पुल और संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त हुए, बिजली और पेयजल की योजनाएं प्रभावित हुईं तथा ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में लोगों को आवागमन में मुश्किलों का सामना करना पड़ा। पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश के कारण भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। कई स्थानों पर पहाड़ों से मलबा सड़कों पर आने से यातायात बाधित हुआ है। प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से बंद मार्गों को खोलने और जरूरी सेवाओं को बहाल करने का काम लगातार जारी है।

राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र यानी SEOC के आंकड़ों के मुताबिक 30 जून से 11 सितंबर तक के 74 दिनों में 296 लोगों की मौत हुई। इनमें 119 मौतें सीधे प्राकृतिक आपदाओं और मौसम से जुड़ी घटनाओं के कारण हुईं, जबकि 177 लोगों की जान सड़क हादसों में गई। इस अवधि में 520 लोगों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है। इससे साफ है कि मानसून के दौरान खराब मौसम के साथ-साथ पहाड़ी सड़कों पर बढ़ा जोखिम भी लोगों की जान पर भारी पड़ा है।

बारिश और आपदा से जुड़े हादसों में भूस्खलन, फ्लैश फ्लड और अन्य प्राकृतिक घटनाएं प्रमुख कारण रही हैं। इससे पहले 1 सितंबर तक के आंकड़ों में 259 मौतें दर्ज की गई थीं, जिनमें 106 मौतें बारिश और आपदा से सीधे जुड़ी थीं। इनमें भूस्खलन और डूबने जैसी घटनाएं भी शामिल थीं। वहीं बाकी मौतों का बड़ा हिस्सा सड़क दुर्घटनाओं से जुड़ा था। सितंबर के पहले सप्ताह के बाद भी मौसम की गतिविधियां जारी रहने से आंकड़ों में और वृद्धि हुई है।

संपत्ति के नुकसान की बात करें तो ताजा सरकारी आकलन में नुकसान करीब 1,662 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका था। सार्वजनिक निर्माण विभाग यानी PWD को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है और उसका नुकसान करीब 1,231 करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है। इसके अलावा जल शक्ति विभाग की योजनाओं को भी भारी क्षति पहुंची है। सड़कें, पुल, पेयजल योजनाएं और अन्य सार्वजनिक ढांचे बारिश और भूस्खलन की चपेट में आए हैं।

मानसून की बारिश से मकानों और पशुधन को भी नुकसान पहुंचा है। इससे पहले सितंबर की शुरुआत तक 460 से ज्यादा मकानों के पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने की जानकारी सामने आई थी। कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। खासकर ऐसे इलाकों में जहां सड़क संपर्क पहले से सीमित है, वहां एक मार्ग के बंद होने से गांवों और बस्तियों का संपर्क प्रभावित हो जाता है।

इसी बीच मौसम के मोर्चे पर प्रदेश को आने वाले दिनों में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन बारिश का दौर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश की संभावना बनी हुई है, जबकि कई इलाकों में धूप भी निकल सकती है। 14 सितंबर की रिपोर्ट में बताया गया कि बारिश और धूप के बीच अधिकतम तापमान में करीब दो डिग्री तक का अंतर दर्ज किया गया है।

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 13 से 16 सितंबर के बीच हिमाचल प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश के दौर देखने को मिल सकते हैं। इसका मतलब यह है कि मानसून की गतिविधियां अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। स्थानीय स्तर पर बारिश होने से पहले से कमजोर हो चुकी पहाड़ी ढलानों और सड़कों पर खतरा बना रह सकता है। प्रशासन की ओर से संवेदनशील क्षेत्रों पर निगरानी बनाए रखना जरूरी है।

बारिश के कारण तापमान में भी गिरावट देखने को मिल रही है। मौसम साफ होने पर कुछ स्थानों पर धूप निकलने की संभावना है, लेकिन बादल और बारिश के कारण तापमान में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा। अगले कुछ दिनों में तापमान में करीब तीन डिग्री तक गिरावट आने की संभावना को लेकर भी पूर्वानुमान सामने आया है। इससे प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम अपेक्षाकृत ठंडा हो सकता है। हालांकि पहाड़ी क्षेत्रों में दिन और रात के तापमान में स्थानीय परिस्थितियों के कारण अंतर बना रहेगा।

हिमाचल में इस बार मानसून की स्थिति एक विरोधाभास भी दिखाती है। एक तरफ राज्य में बारिश से बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है, वहीं सितंबर की शुरुआत तक पूरे मानसून सीजन में बारिश सामान्य से कम दर्ज की गई थी। 9 सितंबर तक प्रदेश में मानसूनी बारिश में करीब 10 प्रतिशत की कमी बताई गई थी। इसके बावजूद कम समय में हुई तेज बारिश और संवेदनशील पहाड़ी भूभाग के कारण नुकसान बहुत ज्यादा रहा।

जानकारों के मुताबिक पहाड़ी राज्यों में बारिश की कुल मात्रा से ज्यादा महत्वपूर्ण उसका वितरण और कम समय में होने वाली अत्यधिक बारिश होती है। कुछ घंटों में बहुत अधिक पानी गिरने से नदियों-नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ जाता है और ढलानों पर दबाव बढ़ने से भूस्खलन की घटनाएं हो सकती हैं। यही वजह है कि सामान्य से कम मानसूनी बारिश के बावजूद हिमाचल को इस सीजन में भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है।

सड़क संपर्क इस पूरे संकट का सबसे संवेदनशील हिस्सा बना हुआ है। सितंबर की शुरुआत में ही राज्य की करीब 150 सड़कें बंद होने की जानकारी सामने आई थी। मंडी और शिमला जैसे जिलों में बड़ी संख्या में सड़कें प्रभावित हुई थीं। सड़कें बंद होने से ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यक सामान पहुंचाने, मरीजों को अस्पताल ले जाने और स्थानीय लोगों के दैनिक आवागमन में परेशानी बढ़ जाती है।

बारिश के बाद सड़क बहने, पहाड़ों से पत्थर और मलबा गिरने तथा पुलों को नुकसान पहुंचने की घटनाओं से परिवहन व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ता है। ऐसे में प्रशासन की प्राथमिकता बंद सड़कों को खोलने के साथ-साथ संवेदनशील मार्गों पर सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यात्रियों को भी मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी लेकर ही पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने की सलाह दी जाती है।

हिमाचल के लिए सितंबर का दूसरा पखवाड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मानसून की विदाई के पहले भी स्थानीय स्तर पर बारिश जारी रह सकती है। 19 सितंबर तक हल्की बारिश की संभावना को देखते हुए लोगों को मौसम में अचानक बदलाव के लिए तैयार रहने की जरूरत है। विशेष रूप से भूस्खलन संभावित क्षेत्रों, नदी-नालों के किनारे और पहले से क्षतिग्रस्त सड़कों पर अतिरिक्त सावधानी जरूरी होगी।

कुल मिलाकर इस मानसून सीजन में हिमाचल प्रदेश को जान-माल और बुनियादी ढांचे दोनों स्तरों पर बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। करीब 300 मौतें और 1,600 करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान राज्य के सामने मानसून की गंभीर तस्वीर पेश करता है। आने वाले दिनों में बारिश की तीव्रता कम रहने की उम्मीद है, लेकिन तापमान में गिरावट और स्थानीय बारिश के बीच संवेदनशील इलाकों में खतरा पूरी तरह खत्म नहीं माना जा सकता। प्रशासन के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती क्षतिग्रस्त सड़कों, बिजली-पानी की योजनाओं और अन्य सार्वजनिक ढांचे को जल्द बहाल करना तथा लोगों को सुरक्षित रखना है।

Leave a comment