भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) के तहत तीन अलग-अलग चरणों में कुल 1 लाख करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियां बेचने की घोषणा की।
RBI OMO Sale: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग सिस्टम में उपलब्ध अतिरिक्त नकदी को प्रबंधित करने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियां बेचने का फैसला किया है। केंद्रीय बैंक यह बिक्री ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) के तहत तीन चरणों में करेगा। पहली नीलामी 17 सितंबर 2026 को होगी, जिसमें 50,000 करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियां बिक्री के लिए रखी जाएंगी।
इसके बाद 21 सितंबर और 28 सितंबर को दो और चरणों में 25,000-25,000 करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री की जाएगी। RBI के अनुसार, यह निर्णय बैंकिंग सिस्टम में फंड की मौजूदा स्थिति और उसमें हो रहे बदलाव की समीक्षा के बाद लिया गया है।
तीन चरणों में होगी 1 लाख करोड़ रुपये की बिक्री
RBI की योजना के मुताबिक कुल 1,00,000 करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियों को तीन अलग-अलग नीलामियों के जरिए बेचा जाएगा। इसका उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली में मौजूद नकदी की स्थिति को संतुलित करना और तरलता प्रबंधन को बेहतर बनाना है। पहले चरण में 17 सितंबर को 50,000 करोड़ रुपये की प्रतिभूतियों की नीलामी होगी।
इसके बाद 21 सितंबर को 25,000 करोड़ रुपये और 28 सितंबर को 25,000 करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियां बेची जाएंगी। इस तरह तीनों चरण पूरे होने के बाद RBI कुल एक लाख करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियां बाजार में बेच चुका होगा।
17 सितंबर की नीलामी में कौन-कौन सी प्रतिभूतियां होंगी?

17 सितंबर को होने वाली पहली नीलामी में छह अलग-अलग सरकारी प्रतिभूतियां शामिल होंगी। इनकी मैच्योरिटी वर्ष 2029 से 2032 के बीच है। नीलामी में शामिल प्रतिभूतियों में:
- 7.59% GS 2029
- 6.79% GS 2029
- 7.61% GS 2030
- 5.77% GS 2030
- 6.68% GS 2031
- 8.28% GS 2032
शामिल हैं। इन प्रतिभूतियों की मैच्योरिटी की तारीखें मार्च 2029 से फरवरी 2032 के बीच हैं।
सुबह 9:30 से 10:30 बजे तक जमा होंगी बोलियां
RBI के अनुसार, 17 सितंबर की नीलामी के लिए बोली जमा करने का समय सुबह 9:30 बजे से 10:30 बजे तक निर्धारित किया गया है। संबंधित प्रतिभागी RBI के इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म E-Kuber के जरिए अपनी बोलियां जमा कर सकेंगे। नीलामी के परिणाम उसी दिन घोषित किए जाएंगे। सफल बोलीदाताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि संबंधित सरकारी प्रतिभूतियां 18 सितंबर को दोपहर 12 बजे तक उनके Subsidiary General Ledger (SGL) अकाउंट में उपलब्ध हों। इस प्रक्रिया के जरिए RBI सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री को व्यवस्थित तरीके से पूरा करेगा और बैंकिंग सिस्टम की तरलता पर नजर बनाए रखेगा।
बैंकिंग सिस्टम में क्यों बढ़ी नकदी?
RBI का यह कदम ऐसे समय आया है जब भारतीय बैंकिंग सिस्टम में उपलब्ध नकदी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है। इसका एक कारण Foreign Currency Non-Resident (Bank) यानी FCNR(B) जमा के माध्यम से देश में विदेशी मुद्रा का आना भी है। बैंकों की ओर से FCNR(B) जमा के जरिए बड़ी मात्रा में फंड जुटाए जाने से सिस्टम में तरलता बढ़ी है। अतिरिक्त नकदी की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए RBI पहले से ही Variable Rate Reverse Repo (VRRR) नीलामियों का इस्तेमाल कर रहा है।










