कोर्ट में गवाही देने नहीं पहुंचे 4 दरोगा समेत 11 पुलिसकर्मी अदालत ने 28 अक्टूबर तक दिए सबूत पेश करने के आदेश

कोर्ट में गवाही देने नहीं पहुंचे 4 दरोगा समेत 11 पुलिसकर्मियों पर गिरफ्तारी का आदेश हुआ। जब्त हथियार भी पेश नहीं किए गए, 28 अक्टूबर तक साक्ष्य देने के निर्देश।
कोर्ट में गवाही देने नहीं पहुंचे 4 दरोगा समेत 11 पुलिसकर्मी अदालत ने 28 अक्टूबर तक दिए सबूत पेश करने के आदेश
Photo Credit / Attribution: Google

अदालत में चल रहे एक मामले में गवाही देने और जब्त हथियार समेत जरूरी साक्ष्य पेश करने में कथित तौर पर लापरवाही बरतना पुलिसकर्मियों पर भारी पड़ गया है। मामले में चार दरोगा समेत कुल 11 पुलिसकर्मियों के खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। बताया गया है कि संबंधित पुलिसकर्मी कई मौकों के बावजूद अदालत में गवाही देने के लिए उपस्थित नहीं हुए। इतना ही नहीं, मामले में जब्त किए गए हथियारों को भी अदालत के सामने पेश नहीं किया गया। अदालत ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों को 28 अक्टूबर तक आवश्यक साक्ष्य और जब्त हथियार पेश करने के निर्देश दिए हैं।

मामला अदालत में लंबे समय से चल रही सुनवाई से जुड़ा बताया जा रहा है। किसी आपराधिक मुकदमे में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका केवल जांच तक सीमित नहीं रहती, बल्कि जांच के दौरान तैयार किए गए दस्तावेज, बरामद सामान और अन्य साक्ष्यों को अदालत के सामने प्रस्तुत करना भी जरूरी होता है। पुलिसकर्मी अगर मामले के गवाह हैं तो उन्हें अदालत में उपस्थित होकर अपनी गवाही दर्ज करानी होती है। ऐसे में बार-बार अदालत में उपस्थित नहीं होने और महत्वपूर्ण साक्ष्य पेश नहीं किए जाने को न्यायिक प्रक्रिया में गंभीर बाधा के तौर पर देखा जा सकता है।

बताया गया है कि संबंधित मामले में चार दरोगा समेत 11 पुलिसकर्मियों को अदालत में गवाही के लिए बुलाया गया था। इसके बावजूद वे निर्धारित तारीखों पर अदालत में उपस्थित नहीं हुए। सुनवाई के दौरान जब अदालत के सामने यह बात सामने आई कि पुलिसकर्मी गवाही देने के लिए नहीं पहुंच रहे हैं और जब्त हथियार भी पेश नहीं किए जा रहे हैं, तो अदालत ने मामले को गंभीरता से लिया। इसके बाद संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ गिरफ्तारी के आदेश जारी किए गए।

अदालत की ओर से अब 28 अक्टूबर तक का समय दिया गया है। इस अवधि में संबंधित पुलिसकर्मियों को अदालत में उपस्थित होकर मामले से जुड़े आवश्यक साक्ष्य पेश करने होंगे। इनमें जब्त हथियार भी शामिल हैं। कोर्ट के आदेश के बाद अब पुलिस विभाग के सामने इन कर्मचारियों की मौजूदगी सुनिश्चित कराने और मुकदमे से संबंधित साक्ष्यों को अदालत में पेश करने की जिम्मेदारी होगी।

किसी आपराधिक मामले में बरामद हथियार महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जाता है। यदि किसी घटना के दौरान हथियार जब्त किया गया है तो उसकी बरामदगी, जब्ती की प्रक्रिया और उसे अदालत में प्रस्तुत करना मुकदमे की सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण हो सकता है। अदालत यह देखती है कि जांच एजेंसी ने जिस वस्तु को बरामदगी का हिस्सा बताया है, उसे नियमानुसार सुरक्षित रखा गया या नहीं और जरूरत पड़ने पर अदालत के सामने पेश किया गया या नहीं। इसलिए जब्त हथियार के अदालत में पेश नहीं होने से मुकदमे की कार्यवाही प्रभावित हो सकती है।

इसी तरह पुलिसकर्मियों की गवाही भी किसी मामले में महत्वपूर्ण हो सकती है। जांच अधिकारी या अन्य पुलिसकर्मी अगर घटना की जांच, बरामदगी, गिरफ्तारी या जब्ती की प्रक्रिया से जुड़े रहे हों तो अदालत में उनकी गवाही के जरिए अभियोजन पक्ष अपने मामले को साबित करने की कोशिश करता है। ऐसे में गवाह के अदालत में उपस्थित नहीं होने पर सुनवाई आगे बढ़ाने में परेशानी हो सकती है।

इस मामले में चार दरोगा समेत 11 पुलिसकर्मियों का अदालत में पेश नहीं होना इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उन्हें मामले से जुड़े गवाह और साक्ष्य पेश करने वाले अधिकारियों के रूप में अदालत के सामने उपस्थित होना था। यदि निर्धारित तारीख पर गवाह उपस्थित नहीं होते हैं तो मुकदमे की सुनवाई लंबी खिंच सकती है। यही वजह है कि अदालत ने अब मामले में सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अदालत की ओर से गिरफ्तारी का आदेश दिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित पुलिसकर्मी किसी आपराधिक मामले में दोषी साबित हो चुके हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई अदालत में उपस्थिति और साक्ष्य पेश करने से संबंधित आदेशों के पालन के संदर्भ में है। मामले में उनकी वास्तविक भूमिका और किसी भी अन्य आरोप का निर्धारण संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगा।

अब सभी की नजर 28 अक्टूबर की अगली कार्रवाई पर रहेगी। उस तारीख तक संबंधित पुलिसकर्मियों की अदालत में मौजूदगी और जब्त हथियार समेत अन्य आवश्यक साक्ष्यों की प्रस्तुति महत्वपूर्ण होगी। यदि आदेश का पालन होता है तो मामले की सुनवाई को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। वहीं अगर निर्धारित समय तक भी पुलिसकर्मी अदालत में पेश नहीं होते या जरूरी साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराते हैं तो अदालत आगे की कार्रवाई पर निर्णय ले सकती है।

पुलिस विभाग के लिए भी यह मामला महत्वपूर्ण है, क्योंकि न्यायालय में लंबित मुकदमों में पुलिस अधिकारियों की समय पर उपस्थिति और केस से जुड़े दस्तावेज तथा साक्ष्य उपलब्ध कराना जांच की विश्वसनीयता और न्यायिक प्रक्रिया दोनों से जुड़ा होता है। पुलिस की जांच के आधार पर ही कई मामलों में आरोप तय होते हैं और अदालत में मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ती है। ऐसे में जांच के दौरान जब्त किए गए सामान और संबंधित अधिकारियों की गवाही को समय पर अदालत के सामने लाना आवश्यक होता है।

मामले में अदालत के सख्त रुख के बाद अब संबंधित पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। चार दरोगा समेत 11 पुलिसकर्मियों को लेकर जारी आदेश पर विभाग को भी कार्रवाई करनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि न्यायालय के निर्देशों का पालन हो। 28 अक्टूबर तक साक्ष्य और जब्त हथियार पेश करने के आदेश के बाद आने वाले दिनों में इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई पर सबकी नजर रहेगी।

फिलहाल इस मामले की सबसे बड़ी बात यही है कि अदालत ने गवाही के लिए नहीं पहुंचने वाले चार दरोगा समेत 11 पुलिसकर्मियों के खिलाफ गिरफ्तारी के आदेश दिए हैं और 28 अक्टूबर तक जब्त हथियार समेत जरूरी साक्ष्य पेश करने को कहा है। अब अगली सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि संबंधित पुलिसकर्मी अदालत में पेश होते हैं या नहीं और मामले से जुड़े साक्ष्य किस तरह प्रस्तुत किए जाते हैं।

Leave a comment