आज मंगलवार के कारोबार में टाटा केमिकल्स के शेयरों में जोरदार तेजी देखने को मिली और स्टॉक 20 फीसदी के अपर सर्किट पर पहुंच गया। यह तेजी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा टाटा संस की नॉन-बैंक लेंडर के तौर पर डी-रजिस्टर करने की अर्जी खारिज किए जाने के बाद आई है।
बिजनेस न्यूज़: टाटा समूह की कंपनियों के शेयरों में मंगलवार को जोरदार तेजी देखने को मिली। कारोबार के दौरान टाटा केमिकल्स (Tata Chemicals) के शेयर में 20 फीसदी का अपर सर्किट लग गया। शेयर में इस तेजी की प्रमुख वजह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का टाटा संस से जुड़ा हालिया फैसला माना जा रहा है।
RBI ने टाटा संस की नॉन-बैंक लेंडर के तौर पर डी-रजिस्ट्रेशन की अर्जी को मंजूरी नहीं दी है। इस घटनाक्रम के बाद टाटा संस के भविष्य में शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की संभावना को लेकर बाजार में चर्चा तेज हो गई है। टाटा केमिकल्स के अलावा टाटा समूह की कुछ अन्य सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में भी तेजी दर्ज की गई। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि RBI के फैसले का टाटा संस और उसकी प्रमुख निवेश वाली कंपनियों पर आगे क्या असर पड़ सकता है।
RBI के फैसले से क्यों बढ़ी टाटा केमिकल्स में खरीदारी?
टाटा संस, टाटा समूह की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है और इसके पास समूह की कई बड़ी कंपनियों में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है। कंपनी ने RBI के सामने खुद को Core Investment Company (CIC) के तौर पर डी-रजिस्टर करने का अनुरोध किया था। इसके पीछे एक अहम वजह यह थी कि CIC से जुड़े नियामकीय नियमों के तहत कंपनी को शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की आवश्यकता पड़ सकती है।
RBI द्वारा आवेदन ठुकराए जाने के बाद टाटा संस के सामने अब लिस्टिंग से जुड़ी स्थिति अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। बाजार में इसे टाटा समूह की कंपनियों के लिए संभावित रूप से सकारात्मक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। इसी उम्मीद के चलते टाटा केमिकल्स के शेयर में निवेशकों की खरीदारी बढ़ी।
टाटा संस के लिए लिस्टिंग क्यों अहम है?

टाटा संस 100 साल से अधिक पुरानी टाटा समूह की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है। यह समूह की कई बड़ी कंपनियों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इनमें Tata Consultancy Services (TCS), Tata Motors, Tata Steel और Air India जैसे बड़े कारोबार शामिल हैं। RBI के नियामकीय ढांचे के तहत टाटा संस को Core Investment Company के रूप में वर्गीकृत किया गया है। ऐसे मामलों में बड़ी एसेट बेस और सार्वजनिक फंड से जुड़ी पहुंच वाली कंपनियों पर लिस्टिंग से संबंधित नियम लागू हो सकते हैं।
मार्च 2025 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, टाटा संस की स्टैंडअलोन एसेट्स करीब 1.75 लाख करोड़ रुपये थीं। यह आंकड़ा उस सीमा से काफी ऊपर है, जिसके कारण कंपनी की नियामकीय स्थिति बाजार के लिए महत्वपूर्ण बन जाती है।
दूसरे Tata Stocks में भी तेजी
RBI के फैसले के बाद सिर्फ टाटा केमिकल्स ही नहीं, बल्कि टाटा समूह की अन्य सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली। टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन का शेयर मंगलवार को 13 फीसदी से अधिक चढ़ा। यह टाटा केमिकल्स के साथ निफ्टी 500 इंडेक्स में प्रमुख तेजी वाले शेयरों में शामिल रहा। वहीं, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के शेयर में करीब 4.5 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई। टाटा स्टील के शेयर में भी मामूली तेजी देखने को मिली।
बाजार विशेषज्ञों की नजर अब इस बात पर है कि टाटा संस की संभावित लिस्टिंग से समूह की कंपनियों के वैल्यूएशन और शेयरहोल्डिंग स्ट्रक्चर पर किस तरह का असर पड़ सकता है।
टाटा संस में किन कंपनियों की हिस्सेदारी?
टाटा समूह की कई सूचीबद्ध कंपनियों के पास टाटा संस में हिस्सेदारी है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, टाटा स्टील और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स की टाटा संस में करीब 3.06-3.06 फीसदी हिस्सेदारी है। वहीं, टाटा केमिकल्स की हिस्सेदारी करीब 2.53 फीसदी है। इसके अलावा टाटा पावर के पास करीब 1.65 फीसदी, इंडियन होटल्स के पास 1.11 फीसदी, टाटा कंज्यूमर के पास 0.40 फीसदी और टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन के पास करीब 0.25 फीसदी हिस्सेदारी है।










