टाटा ग्रुप की नौ कंपनियों के पास टाटा संस की कुल 12.83% हिस्सेदारी है, जिनमें सात लिस्टेड और दो अनलिस्टेड कंपनियां शामिल हैं। इनमें लिस्टेड कंपनियों के पास करीब 11.9% हिस्सेदारी है।
TATA Sons IPO: टाटा संस के संभावित आईपीओ को लेकर बाजार में चर्चा तेज है। अगर टाटा समूह की प्रमुख होल्डिंग कंपनी शेयर बाजार में सूचीबद्ध होती है, तो इसका फायदा सिर्फ टाटा संस तक सीमित नहीं रहेगा। समूह की कई कंपनियों के लिए यह कदम वर्षों से फंसी हुई पूंजी को अनलॉक करने का रास्ता खोल सकता है।
टाटा समूह की नौ कंपनियों के पास टाटा संस की कुल 12.83 फीसदी हिस्सेदारी है। इनमें सात कंपनियां शेयर बाजार में सूचीबद्ध हैं, जबकि दो कंपनियां अनलिस्टेड हैं। केवल सूचीबद्ध सात कंपनियों के पास करीब 11.9 फीसदी हिस्सेदारी बताई जाती है। लंबे समय से इन कंपनियों के लिए यह निवेश ऐसी संपत्ति बना हुआ है, जिसे सीधे बाजार में बेचकर नकदी जुटाना आसान नहीं था।
अगर टाटा संस की लिस्टिंग होती है, तो स्थिति काफी बदल सकती है। सार्वजनिक बाजार में शेयर उपलब्ध होने के बाद समूह की संबंधित कंपनियों के लिए अपनी हिस्सेदारी को बेचकर पूंजी जुटाने का विकल्प खुल सकता है। यही वजह है कि संभावित TATA Sons IPO को टाटा समूह की कई कंपनियों के लिए पूंजी अनलॉक करने की घटना के तौर पर देखा जा रहा है।
टाटा संस में किस कंपनी की कितनी हिस्सेदारी?
टाटा समूह की अलग-अलग कंपनियों के पास टाटा संस में हिस्सेदारी अलग-अलग है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार टाटा स्टील और टाटा मोटर्स के पास 3.06-3.06 फीसदी हिस्सेदारी है। इसके अलावा टाटा केमिकल्स के पास 2.53 फीसदी, टाटा पावर के पास 1.65 फीसदी और इंडियन होटल्स के पास 1.11 फीसदी हिस्सेदारी है।
वहीं टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी करीब 0.43 फीसदी और टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन की हिस्सेदारी 0.08 फीसदी बताई जाती है। शेष करीब 0.93 फीसदी हिस्सा टाटा समूह की दो अनलिस्टेड कंपनियों के पास है।
10 लाख करोड़ की वैल्यूएशन पर कितना फायदा?

टाटा संस की संभावित वैल्यूएशन को लेकर अलग-अलग अनुमान हैं। यदि कंपनी का मूल्यांकन करीब 10 लाख करोड़ रुपये माना जाए, तो 3.06 फीसदी हिस्सेदारी की वैल्यू लगभग 30,600 करोड़ रुपये बैठती है। इस हिसाब से टाटा स्टील और टाटा मोटर्स के लिए टाटा संस में मौजूद हिस्सेदारी काफी महत्वपूर्ण संपत्ति साबित हो सकती है। अनुमानित 30,600 करोड़ रुपये का मूल्य टाटा स्टील की मौजूदा मार्केट कैप का लगभग 13 फीसदी और टाटा मोटर्स की मार्केट कैप का करीब 28 फीसदी बताया गया है।
सबसे उल्लेखनीय स्थिति टाटा केमिकल्स की हो सकती है। 10 लाख करोड़ रुपये की वैल्यूएशन के आधार पर टाटा संस में उसकी 2.53 फीसदी हिस्सेदारी करीब 25,300 करोड़ रुपये की हो सकती है। यह आंकड़ा कंपनी की उस समय बताई गई लगभग 15,594 करोड़ रुपये की मार्केट कैप से भी अधिक है।हालांकि, यह संभावित वैल्यूएशन है। वास्तविक मूल्यांकन और किसी हिस्सेदारी की बिक्री से मिलने वाली राशि टाटा संस के आईपीओ के आकार, इश्यू प्राइस और बाजार परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
तीन दशक पहले कैसे बनी थी हिस्सेदारी?
टाटा समूह की सात सूचीबद्ध कंपनियों ने वर्ष 1995-96 में राइट्स इश्यू के जरिए टाटा संस में हिस्सेदारी हासिल की थी। उस समय टाटा ट्रस्ट्स ने इस प्रक्रिया में भाग नहीं लिया था। इसके पीछे उस दौर में चैरिटेबल ट्रस्ट्स के कमर्शियल कंपनियों में निवेश से जुड़े कानूनी प्रतिबंधों को वजह बताया गया था। उस समय भी टाटा संस में निवेश को लेकर कुछ शेयरधारकों ने सवाल उठाए थे। उनका तर्क था कि सूचीबद्ध कंपनियों की पूंजी को ऐसी अनलिस्टेड कंपनी में लगाना उचित नहीं है, जिसके शेयरों को आसानी से बेचा नहीं जा सकता।
रिपोर्टों के मुताबिक, तत्कालीन टाटा संस चेयरमैन रतन टाटा ने इस निवेश का बचाव करते हुए कहा था कि टाटा संस के भविष्य में सार्वजनिक कंपनी बनने पर इन निवेशों से फायदा मिल सकता है।











