Faceless Trade Facilitation: व्यापारियों को बड़ी राहत, अक्टूबर से शुरू होगी नई प्रणाली

Faceless Trade Facilitation: सरकार अक्टूबर 2026 से फेसलेस, पेपरलेस और क्षेत्राधिकार-मुक्त व्यापार सुविधा प्रणाली शुरू करने जा रही है। जानें कारोबारियों और

निर्यातकों और आयातकों के लिए कारोबार को आसान बनाने की दिशा में वाणिज्य मंत्रालय ने बड़ा कदम उठाया है। मंत्रालय ने महानिदेशालय विदेश व्यापार (DGFT) में एक केंद्रीय प्रसंस्करण विभाग (CPD) स्थापित करने का निर्णय लिया है, जो ‘फेसलेस’ व्यापार सुविधा प्रणाली को लागू करेगा।

बिजनेस न्यूज़: भारत सरकार निर्यातकों और आयातकों के लिए कारोबार की प्रक्रिया को आसान और तेज बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। वाणिज्य मंत्रालय ने महानिदेशालय विदेश व्यापार (DGFT) में केंद्रीय प्रसंस्करण विभाग (Central Processing Department) स्थापित करने का फैसला किया है। इस विभाग के जरिए ‘फेसलेस’ व्यापार सुविधा प्रणाली को लागू किया जाएगा। सरकार की योजना के मुताबिक यह नई व्यवस्था अक्टूबर 2026 के दूसरे पखवाड़े में शुरू की जा सकती है।

नई प्रणाली लागू होने के बाद व्यापार से जुड़े आवेदनों के निपटारे की प्रक्रिया अधिक डिजिटल, पारदर्शी और तेज होने की उम्मीद है। खास बात यह है कि इसमें आवेदकों को अधिकारियों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क करने या अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी।

क्या है 'फेसलेस' व्यापार सुविधा प्रणाली?

‘फेसलेस’ व्यापार सुविधा प्रणाली का उद्देश्य विदेश व्यापार से जुड़े आवेदन और उनकी प्रोसेसिंग को फेसलेस, पेपरलेस और अधिकार क्षेत्र-मुक्त बनाना है। यानी आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल माध्यम से होगी और उसे किसी खास क्षेत्रीय कार्यालय के अधिकार क्षेत्र तक सीमित नहीं रखा जाएगा। DGFT के कार्यालय ज्ञापन के अनुसार, केंद्रीय प्रसंस्करण विभाग व्यापार से संबंधित आवेदनों के प्रसंस्करण के लिए एक केंद्रीय इकाई के रूप में काम करेगा। यह विभाग दिल्ली के केंद्रीय लाइसेंसिंग क्षेत्र में स्थापित किया जा रहा है।

इस व्यवस्था के तहत आवेदन जमा करने से लेकर उसके निपटारे तक की प्रक्रिया डिजिटल तरीके से संचालित की जाएगी। इससे मानवीय हस्तक्षेप कम होगा और पूरी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी।

अक्टूबर 2026 में शुरू होने की तैयारी

सरकार इस नई व्यापार सुविधा प्रणाली को अक्टूबर 2026 के दूसरे पखवाड़े में देश को समर्पित करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए DGFT के स्तर पर जरूरी प्रशासनिक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य व्यापारियों के लिए लाइसेंस और अन्य व्यापार संबंधी आवेदनों के निपटारे को आसान बनाना है। डिजिटल प्रोसेसिंग के कारण आवेदन को संबंधित अधिकारी या कार्यालय तक पहुंचाने में लगने वाला समय भी कम हो सकता है।

निर्यातकों और आयातकों को क्या मिलेगा फायदा?

‘फेसलेस’ व्यापार सुविधा प्रणाली लागू होने के बाद निर्यातकों और आयातकों को कई स्तरों पर राहत मिलने की उम्मीद है। सबसे बड़ा फायदा आवेदन के प्रसंस्करण में लगने वाले समय को कम करने के रूप में सामने आ सकता है। इसके अलावा पूरी प्रक्रिया डिजिटल होने से कागजी दस्तावेजों पर निर्भरता कम होगी। व्यापारियों को किसी आवेदन के लिए अलग-अलग सरकारी कार्यालयों में व्यक्तिगत रूप से जाने की आवश्यकता भी कम हो सकती है।

इस व्यवस्था से प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिलेगी। आवेदन किस स्तर पर है और उसके निपटारे की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ रही है, इसे डिजिटल सिस्टम के माध्यम से अधिक व्यवस्थित तरीके से संभाला जा सकेगा। सरकार का मानना है कि ऐसी व्यवस्था Ease of Doing Business को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है। इससे भारत में कारोबार करने की प्रक्रिया सरल होने के साथ-साथ वैश्विक व्यापार के क्षेत्र में देश की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी मजबूत हो सकती है।

मानवीय हस्तक्षेप कम करने पर जोर

नई प्रणाली की एक अहम विशेषता मानवीय हस्तक्षेप को कम करना है। मौजूदा व्यवस्थाओं में कई बार व्यापारियों को आवेदन से संबंधित जानकारी या प्रक्रिया के लिए अधिकारियों और कार्यालयों से संपर्क करना पड़ता है। फेसलेस सिस्टम इस तरह की प्रत्यक्ष निर्भरता को कम करने की दिशा में काम करेगा। डिजिटल व्यवस्था भ्रष्टाचार की संभावनाओं को कम करने और प्रक्रिया में जवाबदेही बढ़ाने में भी मदद कर सकती है। हालांकि, नई प्रणाली के प्रभाव का वास्तविक आकलन इसके लागू होने और संचालन के बाद ही किया जा सकेगा।

केंद्रीय प्रसंस्करण विभाग को प्रभावी तरीके से संचालित करने के लिए अधिकारियों की तैनाती भी की गई है। जानकारी के मुताबिक, दिल्ली और क्षेत्रीय केंद्रों से कुल 53 DGFT अधिकारियों को नए विभाग में स्थानांतरित या तैनात किया गया है। इन अधिकारियों में 5 संयुक्त DGFT, 10 उप DGFT और 7 सहायक DGFT अधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी विभाग के संचालन में भूमिका निभाएंगे। सरकार की कोशिश है कि नई डिजिटल प्रणाली को संभालने के लिए पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध रहे।

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