वैश्विक बाजारों में जारी अस्थिरता (volatility) और भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय सराफा बाजार में बुधवार को मिला-जुला रुख देखने को मिला। जहां एक ओर सोने की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई, वहीं चांदी ने मजबूती दिखाते हुए निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींचा।
बिजनेस न्यूज़: ग्लोबल मार्केट में जारी उतार-चढ़ाव और मिडिल-ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच आज भारतीय सराफा बाजार में मिला-जुला रुख देखने को मिला। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया (MCX) पर 29 अप्रैल को सोने की कीमतों में दबाव देखा गया और यह 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर से नीचे फिसल गया।
हालांकि बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट सीमित दायरे में है, लेकिन कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। वहीं दूसरी ओर, चांदी में मजबूती देखने को मिली है और यह 2.43 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के पार ट्रेड कर रही है।
सोने में गिरावट, लेकिन चांदी ने पकड़ी रफ्तार

अंतरराष्ट्रीय संकेतों के कारण सोने की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई है। निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली (profit booking) और डॉलर इंडेक्स में उतार-चढ़ाव ने गोल्ड पर दबाव बनाया है। आज भारतीय बाजार में 24 कैरेट सोना (24K Gold) लगभग ₹1,49,950 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर ट्रेड कर रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट सीमित है और लंबे समय में गोल्ड का सुरक्षित निवेश (safe haven asset) आकर्षण बरकरार रहेगा।
सोने के विपरीत चांदी ने आज बेहतर प्रदर्शन किया है। औद्योगिक मांग (industrial demand) और वैश्विक सपोर्ट के चलते चांदी की कीमतों में तेजी देखी गई।अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट सिल्वर में लगभग 1% की बढ़त दर्ज की गई, जिससे घरेलू बाजार में भी सकारात्मक असर पड़ा। चांदी फिलहाल मजबूत स्तरों पर बनी हुई है और निवेशकों के बीच इसकी मांग बढ़ रही है।
Global Market का असर
वैश्विक बाजार में सोने और चांदी की कीमतें कई फैक्टर्स से प्रभावित हो रही हैं, जिनमें सबसे बड़ा कारण है मध्य-पूर्व में बढ़ता तनाव और सप्लाई चेन की अनिश्चितता। Brent Crude Oil और WTI Crude Oil अभी भी ऊंचे स्तरों पर बने हुए हैं। ऊर्जा कीमतों में यह अस्थिरता महंगाई (inflation) के जोखिम को बढ़ा रही है, जिससे निवेशक सुरक्षित विकल्प के रूप में सोने की ओर रुख कर रहे हैं।
सबसे बड़ी चिंता Strait of Hormuz को लेकर बनी हुई है। इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से दुनिया की लगभग 20% तेल और गैस सप्लाई गुजरती है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और राजनीतिक बयानबाजी ने इस क्षेत्र को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है। International Energy Agency ने इसे हाल के वर्षों का सबसे बड़ा सप्लाई शॉक बताया है, जिससे वैश्विक महंगाई बढ़ने का खतरा और मजबूत हो गया है।









