Gold Silver Rates: सोना-चांदी रिकॉर्ड स्तर पर, संसद में उठा सवाल- 'क्या सरकार लगाएगी कीमतों पर लगाम'

Gold Silver Rates: सोना-चांदी रिकॉर्ड स्तर पर, संसद में उठा सवाल- 'क्या सरकार लगाएगी कीमतों पर लगाम'

सोना और चांदी 2025 में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए हैं। बढ़ती कीमतों को लेकर संसद में सवाल उठा, लेकिन सरकार ने साफ किया कि कीमती धातुओं के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर और मांग-आपूर्ति से तय होते हैं।

Gold Silver Rates: साल 2025 में सोने और चांदी की कीमतों ने अब तक का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। दोनों कीमती धातुएं अपने ऑल टाइम हाई के आसपास कारोबार कर रही हैं। इस तेज उछाल ने आम लोगों से लेकर निवेशकों तक सभी का ध्यान खींचा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि संसद में भी यह सवाल उठ गया है कि क्या सरकार सोने और चांदी की बढ़ती कीमतों पर किसी तरह की लगाम लगा सकती है। त्योहारों और शादियों के सीजन को देखते हुए यह मुद्दा आम जनता से सीधे जुड़ा हुआ माना जा रहा है।

2025 में कितनी बढ़ी कीमतें

इस साल सोने और चांदी ने जबरदस्त रिटर्न दिया है। आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में सोने की कीमत करीब 63 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है। वहीं चांदी ने सोने से भी बेहतर प्रदर्शन करते हुए लगभग 118 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया है। चांदी का यह रिटर्न कई मामलों में शेयर बाजार से भी ज्यादा रहा है। यही वजह है कि निवेशकों के साथ साथ आम लोग भी इन कीमतों को लेकर चिंतित हैं।

भारतीयों के लिए अब भी सेविंग है सोना चांदी

भारत में सोना और चांदी सिर्फ गहनों तक सीमित नहीं हैं। दशकों से इन्हें सेविंग और सिक्योर इन्वेस्टमेंट के तौर पर देखा जाता रहा है। बड़ी संख्या में लोग आज भी फिजिकल गोल्ड और सिल्वर खरीदकर लॉन्ग टर्म के लिए रखते हैं। इतिहास गवाह है कि लंबे समय में सोने और चांदी ने निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया है। लेकिन मौजूदा समय में इतनी तेज बढ़त के बाद कीमतें आम लोगों की पहुंच से बाहर होती दिख रही हैं।

संसद में क्यों उठा सवाल

सोने और चांदी की बढ़ती कीमतों को लेकर डीएमके सांसद थिरु अरुण नेहरू और सुधा आर ने लोकसभा में सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि त्योहारों और शादियों के दौरान आम परिवारों पर बढ़ते खर्च को देखते हुए क्या सरकार कस्टम ड्यूटी में कटौती, टैक्स में बदलाव या रिटेल प्राइस कंट्रोल जैसे कोई स्टेबिलिटी उपाय करने पर विचार कर रही है। इसके साथ ही उन्होंने रुपये की स्थिरता में आरबीआई के गोल्ड रिजर्व की भूमिका पर भी सवाल किया।

सरकार ने क्या दिया जवाब

लोकसभा में इस सवाल का जवाब देते हुए वित्त मंत्रालय ने साफ किया कि सोने और चांदी की घरेलू कीमतें इंटरनेशनल बेंचमार्क, रुपये और डॉलर की एक्सचेंज रेट और टैक्स स्ट्रक्चर पर निर्भर करती हैं। सरकार सीधे तौर पर इनकी कीमतें तय नहीं करती। मंत्रालय के मुताबिक, हाल की तेजी की वजह जियोपॉलिटिकल टेंशन, ग्लोबल ग्रोथ को लेकर चिंता, सेफ हेवन डिमांड और सेंट्रल बैंकों की ओर से लगातार खरीदारी है।

कौन तय करता है कीमती धातुओं की कीमतें

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि सोना और चांदी जैसी कीमती धातुओं की कीमतें मार्केट फोर्स तय करती हैं, न कि सरकार। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने आम लोगों को राहत देने और कीमतों पर अप्रत्यक्ष असर डालने के लिए कई कदम उठाए हैं। इन उपायों का मकसद कीमतों में अस्थिरता को कम करना और इंपोर्ट पर निर्भरता घटाना है।

कस्टम ड्यूटी में बड़ी राहत

सरकार की ओर से उठाया गया सबसे बड़ा कदम जुलाई 2024 में देखने को मिला, जब सोने के इंपोर्ट पर कस्टम ड्यूटी को 15 प्रतिशत से घटाकर 6 प्रतिशत कर दिया गया। इस फैसले से सोने की लैंडेड कॉस्ट कम हुई। इसके साथ ही स्मगलिंग के इंसेंटिव पर भी असर पड़ा और कीमतों में जरूरत से ज्यादा उतार चढ़ाव पर कुछ हद तक लगाम लगी। इससे घरेलू कीमतें ग्लोबल ट्रेंड के ज्यादा करीब आई हैं।

फिजिकल गोल्ड की मांग घटाने की कोशिश

वित्त मंत्रालय ने बताया कि सरकार फिजिकल गोल्ड की मांग को कम करने और देश में बेकार पड़े सोने को सिस्टम में लाने के लिए कई योजनाएं चला रही है। इनमें Gold Monetization Scheme, Gold Exchange Traded Fund और Sovereign Gold Bond Scheme शामिल हैं। इन उपायों का मकसद यह है कि नई मांग को पूरा करने के लिए हर बार इंपोर्ट पर निर्भर न रहना पड़े और लोकल स्टॉक का बेहतर इस्तेमाल हो सके। इससे बाहरी दबाव और कीमतों में तेजी को सीमित किया जा सकता है।

आरबीआई के गोल्ड रिजर्व की स्थिति

वित्त मंत्रालय ने यह भी बताया कि 31 मार्च 2025 तक भारतीय रिजर्व बैंक के पास 879.58 टन सोना था। यह आंकड़ा एक साल पहले की तुलना में 57.48 टन ज्यादा है। आरबीआई की बढ़ती गोल्ड होल्डिंग्स से रुपये पर भरोसा मजबूत होता है और देश की बाहरी स्थिरता को सपोर्ट मिलता है। सरकार का मानना है कि यह रणनीति लॉन्ग टर्म में फाइनेंशियल सिक्योरिटी के लिए जरूरी है।

कीमतें थोड़ी घटीं लेकिन ऊंचे स्तर पर बनी

मंत्रालय के अनुसार, हाल के दिनों में सोने और चांदी की कीमतें अपने पीक लेवल से थोड़ी नीचे आई हैं। इसके बावजूद कीमतें अब भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। इसकी वजह ग्लोबल रिस्क, ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद और सेंट्रल बैंकों की लगातार खरीदारी है। इन फैक्टर्स के चलते बाजार में पूरी तरह राहत के संकेत अभी नजर नहीं आ रहे हैं।

क्यों आई इतनी बड़ी तेजी

सरकार के मुताबिक, सोने और चांदी की कीमतों में तेजी के पीछे कई बड़े कारण हैं। कमजोर अमेरिकी डॉलर और यूएस फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में जल्द कटौती की उम्मीद ने सोने को सपोर्ट दिया है। वहीं चांदी के मामले में मजबूत इंडस्ट्रियल डिमांड और सप्लाई की कमी ने कीमतों को रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचाया है। यही वजह है कि चांदी इस साल सोने से भी ज्यादा मजबूत साबित हुई है।

आगे भी बना रह सकता है उतार चढ़ाव

कमोडिटी मार्केट के जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में भी सोने और चांदी की कीमतों में उतार चढ़ाव बना रह सकता है। मेहता इक्विटीज के कमोडिटी एक्सपर्ट राहुल कलंत्री के मुताबिक, सोने को इंटरनेशनल मार्केट में 4,275 से 4,245 डॉलर प्रति औंस पर सपोर्ट मिल सकता है। वहीं 4,340 से 4,375 डॉलर प्रति औंस पर रेजिस्टेंस देखा जा सकता है। चांदी के लिए 64 से 64.55 डॉलर प्रति औंस का स्तर अहम माना जा रहा है।

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