57वीं जीएसटी परिषद की बैठक में लिए गए फैसलों का कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने स्वागत किया है। कैट के राष्ट्रीय महामंत्री और चांदनी चौक से सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि इन निर्णयों से छोटे व्यापारियों, खुदरा कारोबारियों, एमएसएमई और स्टार्टअप्स को राहत मिलने की उम्मीद है।
बिजनेस न्यूज़: वस्तु एवं सेवा कर (GST) व्यवस्था में प्रस्तावित सुधारों को लेकर व्यापार जगत में सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने आई है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने 57वीं GST Council Meeting में लिए गए फैसलों का स्वागत करते हुए इन्हें छोटे व्यापारियों, खुदरा कारोबारियों, एमएसएमई और स्टार्टअप्स के लिए राहत देने वाला बताया है। संगठन का मानना है कि कर अनुपालन की प्रक्रिया सरल होने, रिफंड में तेजी आने और ई-कॉमर्स के माध्यम से कारोबार के अवसर बढ़ने से व्यापारियों को फायदा मिल सकता है।
CAIT के राष्ट्रीय महामंत्री और चांदनी चौक से सांसद प्रवीन खंडेलवाल के मुताबिक, इन फैसलों का उद्देश्य कारोबारियों पर अनावश्यक कानूनी दबाव कम करना और देश में कारोबार के अनुकूल माहौल तैयार करना है। हालांकि, इन उपायों का वास्तविक असर संबंधित प्रावधानों के लागू होने और उनके व्यावहारिक क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
GST के कानूनी प्रावधानों में बदलाव से कारोबारियों को राहत की उम्मीद
CAIT ने जीएसटी से जुड़े कानूनी प्रावधानों में प्रस्तावित बदलावों को महत्वपूर्ण बताया है। संगठन के अनुसार, गिरफ्तारी संबंधी प्रावधानों में बदलाव, अभियोजन की सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने और सामान्य दंड को 25,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये करने जैसे कदम व्यापारियों के लिए राहतकारी हो सकते हैं।
खंडेलवाल का कहना है कि छोटे कारोबारियों को अक्सर कर संबंधी नियमों और कानूनी प्रक्रियाओं को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है। ऐसे में नियमों को सरल बनाने से ईमानदारी से कारोबार करने वाले लोगों का भरोसा बढ़ सकता है। इससे व्यापारियों को कानूनी प्रक्रियाओं में समय और संसाधन खर्च करने के बजाय अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने पर ध्यान देने का अवसर मिलेगा। हालांकि, इन बदलावों का दायरा और लागू होने की तारीख जानने के लिए संबंधित अधिसूचनाओं और आधिकारिक नियमों की पुष्टि करना जरूरी है।
छोटे कारोबारियों के लिए रिटर्न और भुगतान प्रक्रिया आसान बनाने पर जोर
जीएसटी अनुपालन का बोझ कम करना छोटे कारोबारियों की प्रमुख मांगों में शामिल रहा है। CAIT ने पांच करोड़ रुपये तक का कारोबार करने वाले व्यापारियों के लिए वार्षिक रिटर्न और तिमाही कर भुगतान जैसी व्यवस्था का स्वागत किया है। वर्तमान में रिटर्न दाखिल करने, रिकॉर्ड रखने और कर संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने में छोटे कारोबारियों को समय और संसाधन लगाने पड़ते हैं। प्रक्रियाओं को सरल बनाने से उनका प्रशासनिक बोझ कम हो सकता है। इससे कारोबारी अपने ग्राहकों, बिक्री और व्यवसाय के विस्तार पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।

E-commerce से छोटे दुकानदारों को मिल सकते हैं नए बाजार
GST Council के फैसलों में छोटे विक्रेताओं को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए दूसरे राज्यों के ग्राहकों तक पहुंच बनाने का अवसर देना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। CAIT के अनुसार, इससे स्थानीय दुकानदारों, घरेलू उद्योगों, कारीगरों, महिला उद्यमियों और ग्रामीण कारोबारियों को अपने उत्पादों की बिक्री बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए कारोबार करने से छोटे व्यवसायों को पारंपरिक बाजार से बाहर निकलने का मौका मिलता है। हालांकि, इसका लाभ उठाने के लिए विक्रेताओं को संबंधित कर नियमों, प्लेटफॉर्म की शर्तों, डिलीवरी व्यवस्था और ग्राहक सेवा पर भी ध्यान देना होगा।
GST Refund में तेजी से कार्यशील पूंजी को मिलेगी मदद
व्यापारियों के लिए रिफंड में देरी एक बड़ी चुनौती हो सकती है, क्योंकि इससे कारोबार में इस्तेमाल होने वाली पूंजी लंबे समय तक अटकी रहती है। CAIT ने पात्र रिफंड दावों के 90 प्रतिशत तक का तीन कार्य दिवसों के भीतर स्वतः निपटान करने और आवेदन की स्वीकृति अवधि 15 दिन से घटाकर 10 दिन करने संबंधी फैसलों का स्वागत किया है।
यदि यह व्यवस्था निर्धारित शर्तों के साथ प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो कारोबारियों को नकदी प्रबंधन में मदद मिल सकती है। इससे दैनिक खर्च, आपूर्तिकर्ताओं को भुगतान और कारोबारी गतिविधियों को जारी रखने में आसानी होने की उम्मीद है।
माल परिवहन और लॉजिस्टिक्स में कम हो सकती हैं रुकावटें
वाहनों की जांच को विशिष्ट खुफिया जानकारी और पूर्व अनुमति जैसी शर्तों से जोड़ने के कदम को भी व्यापार के लिए सकारात्मक बताया गया है। CAIT का मानना है कि इससे माल ढुलाई के दौरान होने वाली अनावश्यक जांच और देरी कम हो सकती है। परिवहन में लगने वाला समय घटने से सप्लाई चेन अधिक सुचारु हो सकती है। इसका लाभ खास तौर पर उन व्यापारियों को मिल सकता है जिनका कारोबार दूसरे राज्यों से माल मंगाने या वहां उत्पाद भेजने पर निर्भर है।










