उत्तर प्रदेश के मेरठ में गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे करीब 2000 एकड़ में औद्योगिक कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। परियोजना तीन चरणों में आगे बढ़ेगी। पहले चरण में भूखंडों के आवंटन की प्रक्रिया शुरू है, जबकि दूसरे चरण के लिए भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों से बातचीत जारी है।
मेरठ: उत्तर प्रदेश सरकार गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे मेरठ में बड़े औद्योगिक क्षेत्र को विकसित करने की तैयारी कर रही है। करीब 2000 एकड़ में प्रस्तावित इस औद्योगिक कॉरिडोर को तीन चरणों में विकसित किया जाएगा। पहले चरण में 530 एकड़ जमीन पर परियोजना आगे बढ़ रही है और 23 भूखंडों के आवंटन की प्रक्रिया जारी है। दूसरे चरण के लिए तीन गांवों की जमीन जुटाने में प्रशासन को किसानों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है।
गंगा एक्सप्रेसवे किनारे विकसित होगा बड़ा औद्योगिक क्षेत्र
मेरठ में गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए करीब 2000 एकड़ में औद्योगिक कॉरिडोर विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार एक्सप्रेसवे से जुड़े जिलों में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है। मेरठ में प्रस्तावित इस परियोजना का उद्देश्य छोटे और बड़े उद्योगों के लिए जमीन उपलब्ध कराना और निवेश की संभावनाओं को बढ़ाना है।
इस औद्योगिक कॉरिडोर को तीन चरणों में विकसित करने की तैयारी है। पहले चरण में 530 एकड़ जमीन पर काम आगे बढ़ रहा है। दूसरे चरण के लिए 722 एकड़ जमीन प्रस्तावित है, जबकि तीसरे चरण में 742 एकड़ क्षेत्र को शामिल करने की योजना है। इन तीनों चरणों का कुल क्षेत्रफल लगभग 1994 एकड़ होता है।
पहले चरण में 23 भूखंडों के आवंटन की प्रक्रिया
परियोजना के पहले चरण के लिए खरखौदा और बिजौली गांव की जमीन की खरीद लगभग पूरी कर ली गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, करीब 18 हेक्टेयर जमीन पर विवाद बना हुआ है और उसके अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है।
उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने पहले चरण में कुल 23 भूखंडों की योजना तैयार की है। इन भूखंडों के आवंटन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही औद्योगिक क्षेत्र में बुनियादी विकास कार्य कराने के लिए एजेंसी का चयन भी किया गया है। संबंधित एजेंसी ने मौके पर अपना प्लांट स्थापित कर लिया है और आगे के काम की तैयारी की जा रही है।
पहले चरण में जमीन और भूखंडों से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ औद्योगिक क्षेत्र के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। इससे भविष्य में यहां उद्योग स्थापित करने के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं विकसित करने में मदद मिल सकती है।
दूसरे चरण में किसानों का विरोध, प्रशासन कर रहा बातचीत
औद्योगिक कॉरिडोर के दूसरे चरण के लिए छतरी, गोविंदपुर और खड़खड़ी गांवों की करीब 722 एकड़ जमीन प्रस्तावित है। इस जमीन की खरीद के लिए अधिसूचना जारी की जा चुकी है, लेकिन संबंधित गांवों के किसान भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं। किसान अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं।
जिला प्रशासन ने किसानों की समस्याओं और मांगों पर विचार करने के लिए आठ विभागों की समिति गठित की है। समिति के माध्यम से किसानों से बातचीत कर सहमति बनाने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों को उम्मीद है कि बातचीत के जरिए समस्याओं का समाधान निकाला जा सकेगा और जमीन खरीद की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
हालांकि, दूसरे चरण का काम किसानों की सहमति और भूमि अधिग्रहण से जुड़ी प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगा। इसलिए परियोजना के इस हिस्से में आगे की प्रगति प्रशासन और किसानों के बीच बातचीत के परिणामों से तय होगी।
तीसरे चरण के लिए 742 एकड़ जमीन की पहचान
मेरठ में औद्योगिक कॉरिडोर का दायरा बढ़ाने के लिए तीसरे चरण में 742 एकड़ जमीन शामिल करने की योजना है। इसके लिए संबंधित क्षेत्र में जमीन की पहचान की जा रही है। जिला प्रशासन तहसील स्तर पर प्रस्तावित भूमि को चिह्नित करने की प्रक्रिया में जुटा है।
तीनों चरणों के पूरा होने पर यह औद्योगिक कॉरिडोर लगभग 2000 एकड़ में फैलेगा। इससे विभिन्न आकार के उद्योगों को स्थापित करने के लिए जमीन उपलब्ध कराने की योजना है। परियोजना से निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव भूमि अधिग्रहण, बुनियादी ढांचे के विकास और उद्योगों की स्थापना की गति पर निर्भर करेगा।









