जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक 7 अक्टूबर 2026 को होने वाली है। बैठक में टैक्स से जुड़े नियमों और प्रक्रियाओं में बदलाव पर चर्चा हो सकती है।
बिजनेस न्यूज़: वस्तु एवं सेवा कर (GST) से जुड़े नियमों और प्रक्रियाओं में बड़े बदलाव की तैयारी है। जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक 7 अक्टूबर 2026 को होने वाली है। बैठक में टैक्सपेयर्स और कारोबारियों के लिए अनुपालन प्रक्रिया आसान बनाने से जुड़े कई प्रस्तावों पर चर्चा हो सकती है। इनमें जीएसटी अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्तियों में बदलाव, आपराधिक कार्रवाई की सीमा बढ़ाना, छोटे ई-कॉमर्स विक्रेताओं के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया आसान करना और वास्तविक खरीदारों के इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) को सुरक्षित करने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं।
इन संभावित सुधारों को GST 2.0 के तहत टैक्स सिस्टम को अधिक सरल और कारोबारी-अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रस्तावों का उद्देश्य टैक्स विभाग और करदाताओं के बीच अनावश्यक विवादों को कम करना और छोटे कारोबारियों पर अनुपालन का बोझ घटाना है।
GST अधिकारियों की गिरफ्तारी के नियम बदल सकते हैं
बैठक में केंद्रीय जीएसटी (CGST) एक्ट की धारा 69 में बदलाव के प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है। मौजूदा व्यवस्था में कुछ मामलों में कमिश्नर की मंजूरी के आधार पर गिरफ्तारी की कार्रवाई की जा सकती है। प्रस्तावित बदलाव के तहत गंभीर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में भी गिरफ्तारी से पहले अदालत की मंजूरी जरूरी किए जाने पर विचार किया जा रहा है।
इस बदलाव से कारोबारियों को मनमानी या जल्दबाजी में होने वाली गिरफ्तारी से सुरक्षा मिल सकती है। हालांकि, गंभीर टैक्स धोखाधड़ी और जानबूझकर की गई कर चोरी के मामलों में कानून की कार्रवाई जारी रहने की संभावना है।
टैक्स चोरी पर आपराधिक कार्रवाई की सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव
GST कानून के तहत आपराधिक कार्रवाई शुरू करने के लिए मौजूदा सीमा 1 करोड़ रुपये है। काउंसिल की बैठक में इस सीमा को बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करने के प्रस्ताव पर विचार किया जा सकता है। इस बदलाव का सीधा असर उन मामलों पर पड़ सकता है, जहां टैक्स विवाद की राशि अपेक्षाकृत कम है। हालांकि, फर्जी इनवॉइस के मामलों को इस प्रस्तावित राहत से अलग रखा जा सकता है। बिना सामान या सेवा की वास्तविक आपूर्ति के फर्जी बिल जारी करना गंभीर अपराध की श्रेणी में बना रह सकता है।
सामान्य टैक्स विवाद में गिरफ्तारी नहीं

GST कानून में एक अन्य महत्वपूर्ण बदलाव यह हो सकता है कि केवल टैक्स की व्याख्या या दर को लेकर हुए विवाद को आपराधिक मामला न माना जाए। किसी वस्तु या सेवा की टैक्स दर, वर्गीकरण या इनपुट टैक्स क्रेडिट को लेकर कारोबारी और टैक्स अधिकारी अलग-अलग राय रख सकते हैं। प्रस्तावित व्यवस्था में जब तक जानबूझकर टैक्स चोरी या धोखाधड़ी का स्पष्ट मामला सामने नहीं आता, तब तक ऐसे सामान्य विवादों को अपराध की श्रेणी से बाहर रखने पर जोर दिया जा सकता है। इससे ईमानदारी से कारोबार करने वाले टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
छोटे ई-कॉमर्स कारोबारियों को मिल सकती है राहत
ऑनलाइन कारोबार करने वाले छोटे विक्रेताओं के लिए भी बैठक के प्रस्ताव महत्वपूर्ण हो सकते हैं। नए प्रावधान के तहत ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के वेयरहाउस को GST रजिस्ट्रेशन के लिए कारोबारी के पंजीकृत पते के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति देने पर विचार किया जा रहा है। इससे छोटे ऑनलाइन विक्रेताओं को अलग-अलग राज्यों में कार्यालय या दुकान किराए पर लेने की जरूरत कम हो सकती है।
किराया, सिक्योरिटी डिपॉजिट और कर्मचारियों से जुड़े खर्चों में कमी आने से ई-कॉमर्स कारोबार शुरू करना और उसका विस्तार करना आसान हो सकता है। प्रस्तावित बदलाव से बड़ी संख्या में छोटे विक्रेताओं को फायदा मिलने की उम्मीद है।
सही खरीदारों का ITC सुरक्षित करने की तैयारी
GST व्यवस्था में इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) को लेकर कारोबारियों की एक बड़ी चिंता सप्लायर के टैक्स भुगतान से जुड़ी है। कई बार खरीदार के पास वैध इनवॉइस होने के बावजूद सप्लायर द्वारा सरकार को टैक्स जमा नहीं करने की वजह से खरीदार का ITC प्रभावित हो जाता है। प्रस्तावित व्यवस्था में वास्तविक और ईमानदार खरीदारों के ITC को अधिक सुरक्षा देने पर विचार किया जा रहा है। यदि खरीदार के पास वैध दस्तावेज और वास्तविक लेनदेन का प्रमाण है, तो डिफॉल्ट करने वाले सप्लायर से टैक्स की वसूली करने की व्यवस्था को प्राथमिकता दी जा सकती है।











