जीएसटी काउंसिल की बैठक में इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के भुगतान की प्रक्रिया तेज करने के प्रस्ताव पर राज्यों के बीच पूरी सहमति नहीं बन पाई, जिसके चलते फिलहाल इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया जा सका।
बिजनेस न्यूज़: वस्तु एवं सेवा कर (GST) व्यवस्था के तहत इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का भुगतान तेज करने के प्रस्ताव पर जीएसटी काउंसिल की बैठक में सहमति नहीं बन सकी। राज्यों के बीच इस मुद्दे पर अलग-अलग राय सामने आने के बाद फिलहाल फैसला टाल दिया गया है। अब इस मामले की समीक्षा के लिए अधिकारियों की एक समिति गठित की गई है, जिसे अगले तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। रिपोर्ट पर विचार करने के बाद काउंसिल की अगली बैठक में अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने पर इसे अगले साल 1 अप्रैल से लागू करने पर विचार किया जा सकता है।
इस फैसले पर देशभर के कारोबारियों, खासकर छोटे उद्योगों और विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों की नजर है। मौजूदा व्यवस्था में कई बार सप्लाई चेन में शामिल किसी एक कारोबारी की गलती के कारण दूसरे कारोबारियों का टैक्स क्रेडिट अटक जाता है। इससे उनकी कार्यशील पूंजी प्रभावित होती है और कारोबार चलाने के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधनों की जरूरत पड़ सकती है।
क्या है इनपुट टैक्स क्रेडिट और क्यों उठ रही बदलाव की मांग?
इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC वह व्यवस्था है, जिसके तहत कारोबारी अपने व्यापार के लिए खरीदे गए सामान या सेवाओं पर चुकाए गए GST का क्रेडिट निर्धारित नियमों और शर्तों के अनुसार प्राप्त कर सकते हैं। इसका उद्देश्य एक ही वस्तु पर अलग-अलग चरणों में लगने वाले कर के दोहरे बोझ को कम करना है।
मौजूदा नियमों के तहत ITC का लाभ लेने के लिए कारोबारियों को निर्धारित शर्तें पूरी करनी होती हैं। इनमें वैध टैक्स इनवॉइस, सामान या सेवाओं की प्राप्ति, संबंधित रिटर्न और लागू नियमों के अनुसार आपूर्तिकर्ता की ओर से टैक्स भुगतान जैसी आवश्यकताएं शामिल हो सकती हैं।
उदाहरण के तौर पर, यदि कोई निर्माता किसी दूसरे कारोबारी से कच्चा माल खरीदता है और उस पर GST चुकाता है, तो वह नियमानुसार उस टैक्स का क्रेडिट लेने का हकदार हो सकता है। लेकिन सप्लाई चेन में शामिल आपूर्तिकर्ता की ओर से रिटर्न दाखिल नहीं करने या अन्य शर्तें पूरी नहीं होने पर क्रेडिट मिलने में परेशानी आ सकती है। ऐसी स्थिति में खरीद करने वाले कारोबारी की पूंजी लंबे समय तक अटकी रह सकती है।
राज्यों की आपत्ति से क्यों अटका फैसला?

जीएसटी काउंसिल की बैठक में राज्यों की ओर से यह चिंता जताई गई कि यदि ITC देने की प्रक्रिया में बदलाव किया जाता है, तो रिटर्न दाखिल नहीं करने वाले कारोबारियों पर निगरानी रखने की जिम्मेदारी बढ़ सकती है। फिलहाल कई कारोबारी अपने आपूर्तिकर्ताओं से नियमित रूप से GST रिटर्न दाखिल करने और नियमों का पालन करने का आग्रह करते हैं, ताकि उन्हें टैक्स क्रेडिट लेने में परेशानी न हो।
यदि इस व्यवस्था में ढील दी जाती है, तो कर अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए राज्यों को अतिरिक्त निगरानी और प्रशासनिक संसाधनों की जरूरत पड़ सकती है। राज्यों का मानना है कि पूरी सप्लाई चेन के कर संबंधी रिकॉर्ड की पुष्टि महत्वपूर्ण है। इसी वजह से प्रस्ताव पर तत्काल सहमति नहीं बन सकी।
अब अधिकारियों की समिति इस विषय के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करेगी। इसमें कारोबारियों की कार्यशील पूंजी पर पड़ने वाले प्रभाव, कर अनुपालन और राज्यों की प्रशासनिक जिम्मेदारियों जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं।
कारोबारियों की पूंजी फंसने की समस्या
वर्तमान ITC व्यवस्था को लेकर विनिर्माण और थोक व्यापार से जुड़े कारोबारियों की चिंता रही है। गारमेंट निर्माता और थोक कारोबारी श्रीभगवान बंसल के अनुसार, इनपुट टैक्स क्रेडिट के भुगतान से जुड़ी समस्या का समाधान होने पर कारोबारियों को राहत मिल सकती थी। उनका कहना है कि यदि किसी आपूर्तिकर्ता ने रिटर्न दाखिल नहीं किया है, तो उसका खामियाजा दूसरे कारोबारी को भुगतना पड़ सकता है।
इससे खासकर छोटे और मध्यम उद्यमों की पूंजी प्रभावित होती है। कारोबारियों के लिए यह समस्या इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि उन्हें कच्चे माल की खरीद, कर्मचारियों के वेतन और अन्य व्यावसायिक खर्चों के लिए लगातार नकदी की जरूरत होती है। हालांकि, किसी भी बदलाव के तहत कर चोरी रोकने और वास्तविक कारोबारियों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखना भी जरूरी होगा।
दवा निर्माताओं को प्लांट और मशीनरी पर ITC की राहत
जीएसटी काउंसिल की बैठक में इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर से प्रभावित कुछ क्षेत्रों के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। इनवर्टेड ड्यूटी की स्थिति तब बनती है, जब कच्चे माल या इनपुट पर लगने वाली GST दर तैयार उत्पाद पर लगने वाली दर से अधिक होती है। उदाहरण के लिए, यदि किसी दवा निर्माता को कच्चे माल पर 18 प्रतिशत GST चुकाना पड़ता है, जबकि तैयार दवा पर 5 प्रतिशत GST लागू होता है, तो इनपुट टैक्स और आउटपुट टैक्स के बीच अंतर पैदा हो सकता है। इससे निर्माता के लिए टैक्स क्रेडिट का संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
दी गई जानकारी के अनुसार, कुछ प्रभावित निर्माताओं को प्लांट और मशीनरी तथा पात्र सेवाओं पर ITC उपलब्ध कराने से संबंधित निर्णय लिया गया है। इसके अलावा, कुछ व्यावसायिक आयोजनों में कैटरिंग सेवाओं पर चुकाए गए GST के क्रेडिट से जुड़े नियमों में भी राहत का उल्लेख किया गया है। इन बदलावों की वास्तविक पात्रता और लागू होने की तारीख की पुष्टि आधिकारिक अधिसूचना से की जानी चाहिए।











