GST 2.0 में सस्ती हुई चीजों के बीच ये आइटम्स रहेंगे महंगे, मोबाइल और लैपटॉप पर नहीं हुई कटौती

GST 2.0 में सस्ती हुई चीजों के बीच ये आइटम्स रहेंगे महंगे, मोबाइल और लैपटॉप पर नहीं हुई कटौती

22 सितंबर से लागू GST 2.0 में टैक्स स्लैब चार से घटाकर दो कर दिए गए हैं, जिससे रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतें कम होंगी। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अनुसार, इससे देश में कुल 2 लाख करोड़ रुपये की बचत होगी और घरेलू खपत बढ़ेगी, जिससे अर्थव्यवस्था को मजबूत उछाल मिलेगा।

GST 2.0: आज 22 सितंबर से GST 2.0 लागू हो गया है, जिसमें टैक्स स्लैब को चार (5%, 12%, 18%, 28%) से घटाकर सिर्फ दो (5% और 18%) कर दिया गया। इस बदलाव से रोजमर्रा की इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं की कीमतें घटेंगी और लोगों के हाथों में अधिक पैसा बचेगा। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि इस सुधार से देश की इकोनॉमी में कुल 2 लाख करोड़ रुपये का उछाल आएगा, जिससे घरेलू खपत और रोजगार दोनों बढ़ेंगे।

मोबाइल और लैपटॉप पर जीएसटी दर नहीं बदली

GST 2.0 में टैक्स स्लैब को सरल बनाने के बावजूद मोबाइल और लैपटॉप के दामों में कोई कटौती नहीं की गई। पहले जैसे ही इन पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगता था, अब भी यही दर लागू रहेगी। इसका मतलब यह है कि फेस्टिव सीजन में उपभोक्ताओं को इन प्रोडक्ट्स पर कोई सस्ती कीमत का फायदा नहीं मिलेगा। हालांकि, कंपनियां ग्राहकों को लुभाने के लिए अलग-अलग ऑफर और डील पेश कर सकती हैं।

वॉशिंग मशीन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स

मोबाइल और लैपटॉप के अलावा वॉशिंग मशीन पर भी जीएसटी रेट में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इस पर भी पहले की तरह 18 प्रतिशत टैक्स लगेगा। वहीं, टीवी और एयर कंडीशनर जैसे कुछ अन्य इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स पर राहत दी गई है। इसका उद्देश्य रोजमर्रा की जरूरतों और बड़े इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के बीच संतुलन बनाना है।

क्यों नहीं घटाए गए मोबाइल और लैपटॉप के दाम

मोबाइल और लैपटॉप बनाने वाली कंपनियां पहले से ही प्रोडक्शन इंसेन्टिव स्कीम (PLI) का लाभ उठा रही हैं। इसके कारण सरकार ने इन उत्पादों पर अतिरिक्त टैक्स कटौती नहीं की। यदि इस पर टैक्स कम किया जाता, तो आयात और उत्पादन लागत को एडजस्ट करने के बाद सरकार को वित्तीय घाटा उठाना पड़ता। इसलिए इन्हें 18 प्रतिशत स्लैब में ही रखा गया है।

सोने-चांदी पर भी कोई बदलाव नहीं

GST 2.0 के तहत सोने और चांदी पर लगने वाले टैक्स में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। सोने और चांदी की खरीदारी पर ज्वेलरी रेट पर 3 प्रतिशत और मेकिंग चार्ज पर 5 प्रतिशत जीएसटी लागू रहेगा। इससे ज्वेलरी खरीदने वालों को पहले की तरह ही टैक्स देना होगा।

जीएसटी 2.0 से सस्ती हुई वस्तुएं

जहां कुछ आइटम्स पर टैक्स में बदलाव नहीं हुआ, वहीं रोजमर्रा की कई चीजों की कीमतों में कमी की गई है। इसमें ब्रेड, बटर, दूध, घी, मक्खन जैसे खाने-पीने के सामान शामिल हैं। इससे आम उपभोक्ता को सीधा लाभ मिलेगा और घरेलू खपत में बढ़ोतरी होगी।

फेस्टिव सीजन में असर

GST 2.0 का लागू होना फेस्टिव सीजन से पहले हुआ है। इससे कई जरूरी सामानों के दाम घट जाएंगे। हालांकि, मोबाइल, लैपटॉप और वॉशिंग मशीन जैसी प्रीमियम चीजों पर कीमतें वैसे ही बनी रहेंगी। ऐसे में कंपनियां इन उत्पादों को बेचने के लिए अलग ऑफर और डिस्काउंट दे सकती हैं।

उपभोक्ता और कारोबारियों के लिए संतुलन

सरकार ने GST 2.0 में टैक्स स्लैब को सरल बनाते हुए रोजमर्रा की जरूरतों की वस्तुओं पर राहत दी है, लेकिन प्रीमियम और आयातित उत्पादों पर टैक्स में कोई बदलाव नहीं किया। इससे उपभोक्ताओं को रोजमर्रा की खरीदारी में फायदा होगा और कारोबारियों के लिए भी एक संतुलन बना रहेगा।

कुल मिलाकर

GST 2.0 के तहत रोजमर्रा के जरूरी सामान सस्ते हो गए हैं, जिससे आम जनता की क्रय शक्ति बढ़ेगी। वहीं, मोबाइल, लैपटॉप, वॉशिंग मशीन और सोने-चांदी पर जीएसटी दर वही रहेगी। इससे यह साफ है कि सरकार ने दैनिक उपयोग की वस्तुओं और प्रीमियम उत्पादों के बीच संतुलन बनाए रखा है। उपभोक्ताओं को कुछ चीजों पर सीधे लाभ मिलेगा, जबकि कुछ पर कीमतें वैसे ही बनी रहेंगी।

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