गुरु गोबिंद सिंह जयंती 2025 के अवसर पर सिख समुदाय देशभर में उनके जीवन और शिक्षाओं को याद करेगा। इस साल यह पर्व साल में दूसरी बार मनाया जा रहा है। गुरुद्वारों में अखंड पाठ, कीर्तन, लंगर और नगर कीर्तन आयोजित होंगे, जबकि घरों में श्रद्धालु गुरबाणी का पाठ और सेवा कार्यों में हिस्सा लेंगे।
Guru Gobind Singh Jayanti: कल यानी 27 दिसंबर को सिखों के 10वें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी की जयंती मनाई जाएगी। यह पर्व बिहार सहित देश के विभिन्न स्थानों पर गुरुद्वारों और घरों में मनाया जाएगा। श्रद्धालु अखंड पाठ, कीर्तन और लंगर में भाग लेकर गुरु साहिब की शिक्षाओं को याद करेंगे और सेवा कार्य करेंगे। इस अवसर पर समाज सेवा और भक्ति का संदेश फैलाना मुख्य उद्देश्य है।
गुरु गोबिंद सिंह जयंती का महत्व
गुरु गोबिंद सिंह जयंती का महत्व केवल उनके जन्मदिन तक सीमित नहीं है। यह पर्व उनके आदर्शों और शिक्षाओं का स्मरण कराने का अवसर है। उनके द्वारा स्थापित खालसा पंथ ने सिख धर्म को एक नई पहचान और दिशा दी। जयंती के दिन श्रद्धालु गुरु साहिब जी की शिक्षाओं का अध्ययन करते हैं और उन्हें अपने जीवन में उतारने का संकल्प लेते हैं।
इस वर्ष, गुरु गोबिंद सिंह जयंती का पर्व पौष माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह तिथि 26 दिसंबर की दोपहर 01 बजकर 43 मिनट से शुरू होकर 27 दिसंबर 2025 की दोपहर 01 बजकर 09 मिनट तक चलेगी। इस समय अवधि में सिख समुदाय के लोग विशेष पूजा, पाठ और सेवा कार्य में भाग लेते हैं।
गुरुद्वारों में जयंती का उत्सव
गुरु गोबिंद सिंह जी की जयंती के अवसर पर देश भर के गुरुद्वारों में विशेष आयोजन होते हैं। सबसे महत्वपूर्ण आयोजन अखंड पाठ साहिब का होता है, जिसमें पूरे दिन गुरबाणी का पाठ किया जाता है। कीर्तन और भजन-भजन के माध्यम से गुरु साहिब की शिक्षाओं को याद किया जाता है और उनके संदेश को समाज में फैलाया जाता है।
इसके अलावा कई स्थानों पर भव्य नगर कीर्तन निकाले जाते हैं। नगर कीर्तन में समाज के लोग शामिल होकर गुरु साहिब के आदर्शों का प्रचार करते हैं। इस दिन गुरुद्वारों में लंगर का आयोजन भी विशेष रूप से किया जाता है, जिसमें श्रद्धालु और जरूरतमंदों को नि:शुल्क भोजन, कपड़े और दवाइयां वितरित की जाती हैं। लंगर का यह परंपरागत आयोजन सिख धर्म के सेवा और समानता के सिद्धांत को दर्शाता है।

घरों में भी पूजा और पाठ
सिर्फ गुरुद्वारों तक ही नहीं, घरों में भी श्रद्धालु इस दिन गुरबाणी का पाठ करते हैं। परिवार के सदस्य मिलकर गुरु साहिब की शिक्षाओं का अध्ययन करते हैं और आपसी प्रेम, सहयोग और सेवा के आदर्शों को अपनाने का प्रयास करते हैं। बच्चों को भी इस दिन गुरु साहिब के जीवन और उनकी शिक्षाओं के बारे में बताया जाता है, ताकि वे बचपन से ही धार्मिक और नैतिक मूल्यों को समझ सकें।
गुरु साहिब की शिक्षाएं और संदेश
गुरु गोबिंद सिंह जी की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने अपने जीवन में साहस, न्याय, धर्म और सेवा के मूल्यों को अपनाया और अपने अनुयायियों को भी यही मार्ग दिखाया। उनकी शिक्षाएं केवल धार्मिक दृष्टि से नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं। आज के समय में जब समाज में असमानता और अन्याय के कई रूप हैं, गुरु साहिब की शिक्षाएं लोगों को सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं।
उनकी शिक्षाओं में खासतौर पर सच्चाई, धैर्य, साहस और भक्ति को महत्व दिया गया है। उन्होंने अपने अनुयायियों को यह सिखाया कि समाज में अन्याय के खिलाफ खड़े होना और दूसरों की मदद करना हर व्यक्ति का धर्म है। इसी कारण जयंती के दिन श्रद्धालु समाज सेवा, दान और सहायता कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं।
जयंती की अनोखी बात साल में दूसरी बार
साल 2025 में गुरु गोबिंद सिंह जयंती का उत्सव दूसरी बार मनाया जा रहा है। पहला उत्सव 6 जनवरी को मनाया गया था और अब 27 दिसंबर को इसे फिर से मनाया जा रहा है। यह घटना धार्मिक पंचांग में पौष माह की सप्तमी तिथि की वजह से हुई है। ऐसे अवसर पर भक्तगण अपने आस्था और सेवा भावना को दोगुना कर देते हैं।











