H-1B और H-4 वीजा धारकों को अमेरिका लौटने से पहले भारत यात्रा में सावधानी बरतनी होगी। वीजा अपॉइंटमेंट में देरी, इमरजेंसी स्लॉट की कमी और नौकरी का जोखिम मुख्य चुनौती बन गए हैं।
H-1B Rule: अगर आप H-1B या H-4 वीजा पर अमेरिका में काम कर रहे हैं और किसी आपातकालीन कारण, फैमिली फंक्शन या शादी के लिए भारत आने का प्लान बना रहे हैं, तो आपको बहुत सावधानी बरतनी होगी। इमिग्रेशन अटॉर्नी ने चेतावनी दी है कि बिना नई वीजा स्टैम्पिंग के अमेरिका लौटना मुश्किल हो सकता है।
भारत आने का निर्णय अब पहले जैसी आसान प्रक्रिया नहीं रही। वीजा अपॉइंटमेंट 2026 तक टल चुके हैं और नए नियमों के तहत अब सोशल मीडिया की जांच भी काफी सख्त हो गई है। इस वजह से कई H-1B और H-4 वीजा धारक परेशान हैं कि वे कब और कैसे अमेरिका लौट पाएंगे।
वीजा अपॉइंटमेंट में देरी
दिसंबर 2025 में भारत में सैकड़ों वीजा अपॉइंटमेंट रद्द कर दिए गए थे। इन अपॉइंटमेंट को अब मार्च, अप्रैल या उससे भी बाद की तारीखों पर शेड्यूल किया गया है। अप्रैल में इंटरव्यू वाले कई लोग कन्फ्यूज हैं कि ट्रैवल करना सुरक्षित होगा या नहीं, क्योंकि फिर से अपॉइंटमेंट डेफर होने का डर है।
इमिग्रेशन अटॉर्नी राहुल रेड्डी के अनुसार, जिन लोगों को अमेरिका लौटने के लिए वीजा स्टैम्पिंग आवश्यक है, उन्हें भारत आने से बचना चाहिए जब तक यात्रा अत्यंत जरूरी न हो।
लंबे समय तक भारत में रुकने की संभावना
रेड्डी कहते हैं कि वीजा स्टैम्पिंग के लिए ट्रैवल करने वालों को हमेशा यह ध्यान रखना चाहिए कि उन्हें भारत में लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा, “लोगों को यह समझना चाहिए कि उनका भारत में रहने का समय अनिश्चित है। कोई नहीं जानता कि नए नियम कब लागू होंगे और प्रक्रिया कितनी लंबी होगी।”

इस स्थिति में अमेरिका लौटने का समय बहुत अनिश्चित है, जिससे पेशेवर और निजी जीवन दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
इमरजेंसी वीजा अपॉइंटमेंट के सीमित विकल्प
अमेरिकी दूतावास कभी-कभी इमरजेंसी अपॉइंटमेंट देता है, यदि कोई अप्रत्याशित या बहुत जरूरी स्थिति हो। लेकिन हर केस में अप्रूवल अलग होता है और स्लॉट की उपलब्धता पर निर्भर करता है।
रेड्डी बताते हैं कि भारत में इस समय इमरजेंसी अपॉइंटमेंट लगभग उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने कहा, “कई लोगों ने अपॉइंटमेंट के लिए कोशिश की, लेकिन स्लॉट उपलब्ध नहीं हुए। फैमिली इमरजेंसी भी हमेशा जल्दी अपॉइंटमेंट की योग्यता नहीं बनाती।”
नौकरी खोने का गंभीर खतरा
भारत में फंसे रहने वाले वीजा धारकों के लिए नौकरी का जोखिम भी बड़ा है। यदि कोई व्यक्ति अमेरिका लौटने से पहले अपनी जॉब खो देता है, तो नई कंपनी उसे हायर करना मुश्किल मान सकती है।
रेड्डी के अनुसार, नई कंपनी को H-1B पिटीशन फिर से फाइल करनी पड़ती है और लगभग 1 लाख डॉलर का फीस देना पड़ता है। ज्यादातर कंपनियां इस खर्च को उठाने को तैयार नहीं होतीं। इसलिए वीजा धारकों को यह समझना जरूरी है कि अनावश्यक ट्रैवल जॉब जोखिम को बढ़ा सकता है।
ट्रैवल से जुड़ी सावधानियां
अभी H-1B और H-4 वीजा धारकों के लिए रूटीन ट्रैवल भी चुनौतीपूर्ण हो गया है। 2026 में भी वीजा अपॉइंटमेंट की टाइमलाइन अनिश्चित है। ऐसे में सलाह है कि केवल अत्यधिक जरूरी मामलों में ही यात्रा की जाए।
ट्रैवल से पहले पूरी जानकारी लेना और संभावित जोखिम का आकलन करना जरूरी है। वीजा स्टैम्पिंग में देरी, इमरजेंसी अपॉइंटमेंट की अनुपलब्धता और नौकरी का खतरा ऐसे मामलों में ध्यान रखना चाहिए।












