H-1B Visa Update: अमेरिका ने 4 कंपनियों पर लगाया प्रतिबंध, भारतीय नौकरी चाहने वालों के लिए जरूरी अलर्ट

अमेरिका ने H-1B वीजा नियमों के उल्लंघन पर चार कंपनियों को प्रतिबंधित किया है। भारतीय नौकरी चाहने वालों को आवेदन से पहले कंपनी की पात्रता जांचने की सलाह दी गईहै।

अमेरिकी श्रम विभाग (DOL) ने H-1B वीजा नियमों के उल्लंघन के आरोप में चार कंपनियों को 'विलफुल वायलेटर्स' घोषित किया है। ये कंपनियां फिलहाल H-1B वीजा के तहत नई याचिकाएं दाखिल नहीं कर सकतीं।

नई दिल्ली: अमेरिका में H-1B वीजा के जरिए नौकरी करने की योजना बना रहे भारतीय पेशेवरों के लिए अहम खबर है। अमेरिकी श्रम विभाग (Department of Labor) ने H-1B कार्यक्रम से प्रतिबंधित कंपनियों की सूची अपडेट की है। नई सूची में चार कंपनियों को 'विलफुल वायलेटर्स' (Willful Violators) घोषित किया गया है, जिसके कारण वे निर्धारित अवधि तक H-1B वीजा के लिए नई याचिकाएं दाखिल नहीं कर सकेंगी।

चार कंपनियों पर H-1B प्रोग्राम में भाग लेने पर रोक

अमेरिकी श्रम विभाग के वेज एंड आवर डिवीजन (Wage and Hour Division) ने H-1B कार्यक्रम से प्रतिबंधित और 'विलफुल वायलेटर्स' घोषित नियोक्ताओं की सूची को अपडेट किया है। इस सूची के अनुसार GowraTech, LLC, Renotek Group LLC, Seeloz, Inc. और Sherwood at Mount Dora, Inc. (dba Sherwood Academy) को H-1B नियमों का जानबूझकर उल्लंघन करने वाला नियोक्ता माना गया है। इन कंपनियों को डिबारमेंट अवधि के दौरान नई H-1B याचिकाएं दाखिल करने की अनुमति नहीं होगी।

अमेरिका में नौकरी की तलाश कर रहे विदेशी पेशेवरों, विशेषकर भारतीय उम्मीदवारों के लिए यह जानकारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि किसी उम्मीदवार को इन कंपनियों से नौकरी का प्रस्ताव मिलता है, तो उसे यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कंपनी H-1B स्पॉन्सरशिप देने की पात्र है या नहीं।

क्या होता है 'विलफुल वायलेटर' का दर्जा?

अमेरिकी श्रम विभाग के अनुसार, किसी कंपनी को 'विलफुल वायलेटर' तब घोषित किया जाता है जब जांच या अंतिम एजेंसी कार्रवाई में यह पाया जाए कि उसने H-1B कार्यक्रम से जुड़ी शर्तों का जानबूझकर उल्लंघन किया है या लेबर कंडीशन एप्लिकेशन (LCA) में महत्वपूर्ण तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया है। ऐसे मामलों में कंपनी पर अतिरिक्त निगरानी रखी जाती है और उसे H-1B कार्यक्रम में भाग लेने पर अस्थायी प्रतिबंध का सामना करना पड़ सकता है।

इस श्रेणी में आने वाले नियोक्ताओं को भविष्य में H-1B से संबंधित आवेदन दाखिल करते समय अतिरिक्त अनुपालन शर्तों का पालन करना पड़ता है। साथ ही विभाग उनके खिलाफ यादृच्छिक जांच (Random Investigations) भी कर सकता है।

विदेश में नौकरी से पहले करें कंपनी की जांच

विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका में नौकरी स्वीकार करने से पहले उम्मीदवारों को यह अवश्य जांच लेना चाहिए कि संबंधित कंपनी H-1B स्पॉन्सरशिप देने के लिए अधिकृत है या नहीं। यदि कोई कंपनी डिबारमेंट सूची में शामिल है, तो वह प्रतिबंध अवधि के दौरान नई H-1B याचिकाएं दाखिल नहीं कर सकती, जिससे उम्मीदवार की वीजा प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

अमेरिकी श्रम विभाग समय-समय पर H-1B कार्यक्रम से जुड़ी कंपनियों की सूची अपडेट करता है। इसका उद्देश्य वीजा प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखना और यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति श्रम एवं आव्रजन नियमों के अनुरूप हो। ऐसे में अमेरिका में नौकरी की योजना बना रहे उम्मीदवारों को आधिकारिक U.S. Department of Labor – H-1B Program  जानकारी के आधार पर ही निर्णय लेने की सलाह दी जाती है।

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