Anti Paper Leak Bill 2026: लोकसभा में पारित हुआ लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक

Anti Paper Leak Bill 2026: लोकसभा ने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी है। इस संशोधन का उद्देश्य एंटी पेपर लीक कानून

लोकसभा ने बुधवार को विपक्ष के भारी हंगामे के बीच लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के जंतर-मंतर पर छात्रों पर कथित गोलीबारी संबंधी बयान और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर लगाए गए आरोपों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।

नई दिल्ली: सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा लाया गया लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 लोकसभा से ध्वनिमत के जरिए पारित हो गया। हालांकि, विधेयक पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली और सदन में कई बार हंगामे की स्थिति भी बनी।

सरकार का कहना है कि यह संशोधन सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली को अधिक विश्वसनीय और सुरक्षित बनाएगा, जबकि विपक्ष ने परीक्षा व्यवस्था, छात्रों के आंदोलन और शिक्षा प्रणाली से जुड़े व्यापक मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश की।

ध्वनिमत से पारित हुआ संशोधन विधेयक

बुधवार को लोकसभा में लंबे समय तक चली बहस के बाद लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। चर्चा के दौरान विपक्ष ने छात्रों के हालिया विरोध-प्रदर्शनों और परीक्षा प्रणाली की खामियों का मुद्दा उठाया, लेकिन सरकार ने विधेयक को परीक्षा सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। विधेयक पारित होने के बाद लोकसभा की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।

सरकार ने क्या कहा?

विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए लगातार कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में एंटी पेपर लीक कानून लागू होने के बाद से अब तक 52 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। उनके अनुसार, यह दर्शाता है कि कानून का प्रभावी क्रियान्वयन हो रहा है और परीक्षा में अनियमितताओं पर सख्ती बढ़ी है।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार समय-समय पर कानून की समीक्षा करती है और जरूरत पड़ने पर आवश्यक संशोधन भी लाती है ताकि परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाया जा सके। सरकार का दावा है कि इस संशोधन का उद्देश्य केवल दंड बढ़ाना नहीं, बल्कि सार्वजनिक परीक्षाओं की पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को मजबूत करना है।

राहुल गांधी ने छात्रों की चिंताओं का उठाया मुद्दा

विधेयक पर चर्चा के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने छात्रों के हालिया आंदोलनों का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं की आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों का विरोध केवल किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे शिक्षा तंत्र में सुधार की मांग को दर्शाता है।राहुल गांधी ने कहा कि युवाओं के आंदोलन को गुस्से या हिंसा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग के रूप में समझना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा लगातार महंगी होती जा रही है और छात्रों पर बढ़ता आर्थिक दबाव भी चिंता का विषय है।

संशोधन का उद्देश्य क्या है?

सरकार के अनुसार, संशोधित कानून का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में होने वाली अनियमितताओं, पेपर लीक, संगठित परीक्षा धोखाधड़ी और अनुचित साधनों के इस्तेमाल पर प्रभावी रोक लगाना है। सरकार का मानना है कि मजबूत कानूनी व्यवस्था से परीक्षा प्रक्रिया में लोगों का भरोसा बढ़ेगा और प्रतिभाशाली उम्मीदवारों को निष्पक्ष अवसर मिलेगा।

विशेषज्ञों का भी मानना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए केवल कड़े कानून ही नहीं, बल्कि तकनीकी निगरानी, बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था और समयबद्ध जांच भी आवश्यक है।

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