सड़क पर संघर्ष के बीच हरियाणा कांग्रेस में गुटबाजी, 6 में से 5 सांसदों के दम पर हुड्डा गुट भारी,विरोधियों ने खोला मोर्चा

हरियाणा कांग्रेस में ब्लॉक स्तर की बैठकें और विरोध प्रदर्शन तेज हुए। हुड्डा खेमे की सक्रियता के बीच संजय दत्त और राव नरेंद्र सिंह संगठन मजबूत करने में जुटे।

हरियाणा कांग्रेस में ब्लॉक स्तर की बैठकों और विरोध प्रदर्शनों के जरिए संगठनात्मक सक्रियता बढ़ी है। संजय दत्त और राव नरेंद्र सिंह नेताओं को एकजुट करने में जुटे हैं, वहीं हुड्डा खेमे के प्रभाव और अंदरूनी मतभेद भी चर्चा में हैं। 

चंडीगढ़: हरियाणा कांग्रेस में हाल के दिनों में सड़क पर राजनीतिक सक्रियता बढ़ी है। पार्टी प्रभारी संजय दत्त और प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह की अगुवाई में ब्लॉक स्तर पर कार्यकर्ता सम्मेलन और विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इसके समानांतर पार्टी के भीतर नेतृत्व और प्रभाव को लेकर अलग-अलग खेमों की गतिविधियां भी जारी हैं। भूपेंद्र सिंह हुड्डा और दीपेंद्र हुड्डा की सक्रियता के बीच दूसरे नेता भी अपनी राजनीतिक भूमिका मजबूत करने में जुटे हैं।

सड़क पर सक्रिय हुआ कांग्रेस संगठन

हरियाणा कांग्रेस में लंबे समय बाद संगठनात्मक गतिविधियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। पार्टी प्रभारी संजय दत्त और प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह की अगुवाई में ब्लॉक स्तर पर कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। इन बैठकों में किसानों, युवाओं, महिलाओं और अन्य जनसरोकार से जुड़े मुद्दों को उठाने के साथ संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।

हाल के दिनों में कांग्रेस ने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर भी राज्यभर में विरोध प्रदर्शन किए हैं। 6 अक्टूबर को पार्टी की ओर से जिला स्तर की गतिविधियां और 7 अक्टूबर को संगठनात्मक बैठकों का कार्यक्रम तय किया गया है। 8 अक्टूबर को ‘Save Vote, Save Nation’ अभियान के तहत जिला स्तर पर विरोध मार्च का भी कार्यक्रम है।

हुड्डा खेमे का प्रभाव और नेतृत्व की चर्चा

पार्टी की सार्वजनिक गतिविधियों के बीच हरियाणा कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में अलग-अलग नेताओं और खेमों की भूमिका भी चर्चा में है। पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा में विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा लगातार पार्टी के कार्यक्रमों में सक्रिय हैं। उनके साथ रोहतक सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा भी कई संगठनात्मक बैठकों और विरोध प्रदर्शनों में नजर आ रहे हैं।

दीपेंद्र हुड्डा की राजनीतिक सक्रियता के बीच पार्टी के भीतर नेतृत्व और भविष्य की भूमिका को लेकर चर्चाएं चलती रही हैं। वहीं कुमारी सैलजा समेत कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओं की अपनी राजनीतिक सक्रियता है। पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह और उनके बेटे बृजेंद्र सिंह भी पार्टी संगठन और चुनावी प्रदर्शन को लेकर अलग-अलग मौकों पर अपनी बात रखते रहे हैं।

संजय दत्त की भूमिका पर नजर

हरियाणा कांग्रेस के प्रभारी संजय दत्त की भूमिका मौजूदा संगठनात्मक गतिविधियों में महत्वपूर्ण हो गई है। वह कार्यकर्ताओं को ब्लॉक से बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने और जनता से लगातार संपर्क बनाए रखने पर जोर दे रहे हैं। सोनीपत की बैठक में उन्होंने युवाओं, महिलाओं, किसानों, मजदूरों और व्यापारियों की भागीदारी बढ़ाने तथा नए सदस्यों को संगठन से जोड़ने की बात कही।

प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह भी संगठन में बेहतर समन्वय और जमीनी स्तर पर गतिविधियां बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। दोनों नेताओं की कोशिश पार्टी के अलग-अलग नेताओं और कार्यकर्ताओं को साझा संगठनात्मक कार्यक्रमों से जोड़ने की है।

सामूहिक नेतृत्व के सामने बड़ी चुनौती

कांग्रेस के सामने अब चुनौती सड़क पर होने वाली राजनीतिक सक्रियता को एक साझा संगठनात्मक अभियान में बदलने की है। एक तरफ पार्टी नेता BJP सरकार के खिलाफ किसानों, युवाओं, रोजगार और चुनावी प्रक्रिया जैसे मुद्दे उठा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ संगठन के भीतर नेतृत्व और राजनीतिक प्रभाव को लेकर अलग-अलग समीकरण बने हुए हैं।

फिलहाल ब्लॉक स्तर की बैठकों और विरोध प्रदर्शनों में वरिष्ठ नेताओं की भागीदारी से कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ी है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अलग-अलग नेताओं की राजनीतिक गतिविधियां किस तरह साझा संगठनात्मक रणनीति में बदलती हैं और पार्टी अपने आंतरिक मतभेदों के बीच कितना प्रभावी समन्वय कायम कर पाती है।

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