he Family Man 3 Review: श्रीकांत तिवारी vs जयदीप अहलावत, क्या तीसरा सीजन पहले से ज्यादा खतरनाक?

The Family Man 3 का तीसरा सीजन दर्शकों के लिए पहले से ज्यादा रोमांचक और खतरनाक साबित हो रहा है। जानें श्रीकांत तिवारी और जयदीप अहलावत की कहानी कैसे टकराती है

मनोज बाजपेयी की बहुप्रतीक्षित वेब सीरीज ‘द फैमिली मैन सीजन 3’ आखिरकार स्ट्रीम हो चुकी है। राज एंड डीके द्वारा निर्देशित इस लोकप्रिय फ्रैंचाइज़ का तीसरा भाग पहले से कहीं अधिक राजनीतिक, भावनात्मक और दमदार एक्शन से भरपूर है। 

  • वेब सीरीज रिव्यू: द फैमिली मैन सीजन 3
  • स्टारकास्ट: मनोज बाजपेयी, जयदीप अहलावत, प्रियामणि, शारिब हाशमी, निम्रत कौर, जुगल हंसराज, सीमा बिस्वास
  • निर्देशक: राज एंड डीके
  • प्लेटफॉर्म: अमेज़न प्राइम वीडियो
  • कुल एपिसोड: 7
  • रेटिंग: ★★★☆ (3.5 स्टार)

एंटरटेनमेंट न्यूज़: वेब सीरीज द फैमिली मैन के तीसरे सीजन में श्रीकांत तिवारी (मनोज बाजपेयी) कहते हैं—“दिस टाइम इट्स पर्सनल”, जो इस बार मिशन की व्यक्तिगत और निजी जिंदगी से जुड़े होने का संकेत देता है। देश की सुरक्षा और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाते श्रीकांत और उनके हास्यपूर्ण सहयोगी जेके (शारिब हाशमी) की कहानी इस बार नॉर्थ ईस्ट में सेट है, जबकि लंदन, इस्लामाबाद, म्यांमार, दिल्ली और मुंबई जैसी जगहें भी कहानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

पहले एपिसोड में ही श्रीकांत के मिशन की रूपरेखा स्पष्ट हो जाती है। कहानी की शुरुआत नागालैंड के कोहिमा में एक सांस्कृतिक उत्सव में हुए बम विस्फोट से होती है, जिससे उत्तर पूर्व के छह बड़े शहरों में बम धमाकों के बाद सैकड़ों लोग मारे जाते हैं। इन घटनाओं की गंभीरता दिल्ली तक पहुँचती है, जहां सरकार ने सारे विद्रोही समूहों को एक ही टेबल पर आने के लिए मनाने की कोशिश की है।

कहानी का आधार: इस बार मिशन है ‘पर्सनल’

सीरीज के शुरुआती सीन में ही श्रीकांत तिवारी (मनोज बाजपेयी) कहते हैं—“दिस टाइम इट्स पर्सनल। और यहीं से साफ हो जाता है कि इस बार कहानी केवल जासूसी नहीं, बल्कि श्रीकांत की निजी जंग भी है। कहानी की शुरुआत नागालैंड के कोहिमा में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान हुए भीषण बम विस्फोट से होती है। इसके बाद नॉर्थ ईस्ट के कई बड़े शहरों में सिलसिलेवार धमाके होते हैं, जिनकी तपिश दिल्ली तक महसूस की जाती है। सरकार इस क्षेत्र में शांति के लिए ‘सहकार प्रोजेक्ट’ नामक एक महत्वपूर्ण मिशन पर काम कर रही है, जिसका मकसद चीन के प्रभाव को रोकना है।

इसी बीच श्रीकांत और कुलकर्णी (दलीप ताहिल) स्थानीय नेता डेविड खुजो से बात करने कोहिमा पहुंचते हैं। लेकिन कहानी तब मोड़ लेती है जब ड्रग लॉर्ड रुक्मा (जयदीप अहलावत) दोनों पर हमला करता है, जिसमें कुलकर्णी और डेविड की मौत हो जाती है। घायल श्रीकांत किसी तरह बच जाता है, लेकिन इस हादसे के बाद पूरी कहानी नई दिशा पकड़ती है।

खलनायक के रूप में दमदार जयदीप अहलावत

रुक्मा एक शांत, बेहद खतरनाक और अप्रत्याशित चरित्र है, जिसे जयदीप अहलावत ने अपनी बेहतरीन अदाकारी से जीवंत किया है। वह एक ऐसा विलेन है जो चीखता नहीं, लेकिन उसकी चुप्पी ही खौफ पैदा कर देती है। रुक्मा के पीछे हैं मीरा (निम्रत कौर), जो एक हाई-प्रोफाइल फिक्सर है और ग्लोबल हथियारों की डील कराने में अहम भूमिका निभाती है। उसका लक्ष्य नॉर्थ ईस्ट में अस्थिरता पैदा कर अपने क्लाइंट्स के लिए रास्ता साफ करना है।

हमले के बाद हालात तब बिगड़ते हैं जब कुलकर्णी की मौत का शक खुद श्रीकांत पर जा गिरता है। उसे परिवार संग भागना पड़ता है और TASC का नया अधिकारी यतीश चावला उसके पीछे लग जाता है। कहानी यहीं से तेज गति पकड़ती है—क्या श्रीकांत अपनी बेगुनाही साबित कर पाएगा? और क्या वह रुक्मा को रोककर देश को बचा सकेगा?

राज एंड डीके ने फिर दिखाया कमाल

इस जोड़ी की सबसे बड़ी ताकत है—जियो-पॉलिटिक्स को कहानी में सहज रूप से पिरोना।सीजन 3 में नॉर्थ ईस्ट की मिट्टी, संस्कृति, राजनीति और जटिलताओं को बेहद संवेदनशीलता से दर्शाया गया है। कई स्थानीय कलाकारों, संगीत और लोकेशन्स ने कहानी को प्रामाणिकता प्रदान की है। हालांकि, बीच के कुछ एपिसोड थोड़े खिंचे हुए लगते हैं और क्लाइमैक्स थोड़ा जल्दबाज़ी में समेटा गया महसूस होता है। इसके बावजूद सीरीज अपने मजबूत विषय और शानदार अदाकारी के कारण प्रभावशाली बन जाती है।

मनोज बाजपेयी का अभिनय पूरे सीजन के भावनात्मक और नाटकीय वजन को संभालता है। परिवार, मिशन, जिम्मेदारियों और गुस्से के बीच झूलते श्रीकांत का रोल उन्होंने जिस बारीकी से निभाया है, वह सीरीज की सबसे बड़ी ताकत है। उनके और जेके (शारिब हाशमी) के बीच की कॉमिक केमिस्ट्री इस सीजन में भी राहत और मनोरंजन देती है। ट्रेन वाला सीन खास तौर पर याद रह जाता है।

सपोर्टिंग कास्ट ने भी जीता दिल

प्रियामणि ने सुचि के रूप में बेहतरीन काम किया है। निम्रत कौर और जुगल हंसराज ग्लोबल कॉन्सपिरेसी एंगल को रोचक बनाते हैं। नॉर्थ ईस्ट के अभिनेताओं पालिन कबाक, तेनजिंग दल्हा, मिलो सुनका ने सीरीज को अलग ऊंचाई दी है। सीमा बिस्वास का प्रधानमंत्री के रूप में किरदार थोड़ा कमजोर लिखा गया है।विजय सेतुपति का छोटा कैमियो भी सीरीज में रोचकता बढ़ाता है।

‘द फैमिली मैन 3’ एक दमदार, प्रासंगिक और भावनात्मक रूप से जुड़ने वाली स्पाई-थ्रिलर है। कुछ कमजोरियों के बावजूद मजबूत अभिनय, उत्कृष्ट निर्देशन, नॉर्थ ईस्ट की अनोखी प्रस्तुति और एक क्लासिक श्रीकांत तिवारी–स्टाइल मिशन इसे देखने लायक बनाते हैं।

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