केंद्र सरकार शीतकालीन सत्र में HECI बिल 2025 पेश करने जा रही है, जिसका उद्देश्य उच्च शिक्षा नियामक संस्थाओं UGC, AICTE और NCTE की जगह HECI को स्थापित करना है। दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षक संगठन DTF ने बिल का विरोध शुरू कर दिया है, उन्होंने इसे उच्च शिक्षा की स्वतंत्रता और संस्थागत ऑटोनॉमी के लिए खतरा बताया और व्यापक समीक्षा की मांग की है।
HECI Bill: केंद्र सरकार शीतकालीन सत्र में HECI बिल 2025 संसद में पेश करने की तैयारी कर रही है। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रमुख शिक्षक संगठन DTF ने बिल का विरोध शुरू किया है, उन्होंने सांसदों से मुलाकात कर उच्च शिक्षा संस्थानों की ऑटोनॉमी और फेडरलिज़्म पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर चिंताएँ साझा की हैं। DTF का कहना है कि बिल यूजीसी अधिनियम 1956 को निरस्त कर सकता है और इसे पास करने से पहले व्यापक रिव्यू और सार्वजनिक चर्चा आवश्यक है।
HECI बिल 2025 का उद्देश्य और विरोध
केंद्र सरकार शीतकालीन सत्र में HECI (Higher Education Council of India) बिल 2025 पेश करने की तैयारी कर रही है। इस बिल का उद्देश्य मौजूदा उच्च शिक्षा नियामक संस्थाओंम UGC, AICTE और NCTE की जगह HECI को स्थापित करना है। सरकार इसे उच्च शिक्षा प्रणाली के सुधार और केंद्रीकृत रेगुलेशन के लिए महत्वपूर्ण मान रही है।
हालांकि, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रमुख शिक्षक संगठन DTF ने बिल का विरोध शुरू कर दिया है। संगठन का कहना है कि HECI बिल 2025 उच्च शिक्षा संस्थानों की ऑटोनॉमी और फेडरलिज़्म के सिद्धांत को खतरे में डाल सकता है। DTF ने बिल के रिव्यू के लिए इसे Higher Education Standing Committee के पास भेजने की मांग की है।

शिक्षक संगठनों की चिंताएँ
DTF का कहना है कि HECI बिल 2025 यूजीसी अधिनियम 1956 को निरस्त कर देगा और बिना स्पष्टता के जल्दबाजी में पारित किया जा रहा है। संगठन ने मुख्य चिंताओं के रूप में फंडिंग और रेगुलेशन को अलग करने की आवश्यकता, HECI में सदस्यों की बनावट, केंद्रीकृत रेगुलेटरी सिस्टम, संस्थानों की विविधता और NEP 2020 से उत्पन्न संकटों को बढ़ाने जैसे बिंदु उठाए हैं।
पूर्व DUTA अध्यक्ष और DTF पदाधिकारी नंदिता नारायण ने बताया कि यह बिल 2018 में भी पेश किया गया था, लेकिन उस समय भारी विरोध के कारण इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। अब इसे संशोधित रूप में वापस लाया जा रहा है, जिसके चलते शिक्षक संगठन सक्रिय हो गए हैं।
संसद में विरोध और कदम
DTF ने HECI बिल 2025 के विरोध में संसद के सदस्यों से मुलाकात की। इस सिलसिले में एक कोर्डिनेशन कमेटी बनाई गई है, जो सांसदों को बिल के संभावित प्रभाव और उच्च शिक्षा पर इसके नकारात्मक परिणामों के बारे में अवगत करा रही है। CPI(M) के राज्यसभा सदस्य जॉन ब्रिटास ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस विषय पर लेटर भी लिखा है।
शिक्षक संगठन का आग्रह है कि HECI बिल 2025 को पास करने से पहले व्यापक रिव्यू और सार्वजनिक चर्चा आवश्यक है। DTF का यह भी कहना है कि इससे उच्च शिक्षा की संस्थागत स्वतंत्रता और गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है।












