नुवामा की रिपोर्ट के अनुसार मॉनसून के बाद इंडस्ट्रियल सेक्टर में कामकाज तेज हो रहा है। Q3 FY26 में ऑर्डर फ्लो मजबूत रहने और पावर सेक्टर की ऑर्डर बुक ₹12 लाख करोड़ तक पहुंचने की संभावना जताई गई है।
Power Stocks: पावर और इंडस्ट्रियल सेक्टर के लिए चालू तिमाही राहत भरी नजर आ रही है। पिछली तिमाही में ज्यादा बारिश की वजह से कई प्रोजेक्ट्स अटक गए थे, साइट पर काम रुका हुआ था और सप्लाई चेन भी प्रभावित रही थी। अब हालात सामान्य हो रहे हैं और इसी का असर ऑर्डर फ्लो और एग्जीक्यूशन दोनों पर दिखने लगा है। ब्रोकरेज फर्म नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट के मुताबिक Q3 FY26 में इंडस्ट्रियल सेक्टर में कामकाज तेज हो सकता है और करीब 17 प्रतिशत की ग्रोथ देखने को मिल सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार कंपनियों की कुल ऑर्डर बुक तेजी से बढ़ रही है और इसका आकार लगभग ₹12 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है। इस ऑर्डर बूम का सबसे बड़ा फायदा पावर सेक्टर से जुड़ी कंपनियों को मिलने की उम्मीद है, खासकर HV T&D सेगमेंट में।
इंडस्ट्रियल सेक्टर में क्यों बढ़ रही है हलचल
नुवामा की रिपोर्ट बताती है कि पिछली तिमाही में मॉनसून के कारण कई प्रोजेक्ट्स पर काम धीमा पड़ गया था। सड़क, पावर लाइन, ट्रांसमिशन टावर और प्लांट साइट्स पर काम करना मुश्किल हो गया था। अब बारिश खत्म होने के साथ ही रुके हुए प्रोजेक्ट्स दोबारा रफ्तार पकड़ रहे हैं।
इसके अलावा पावर जेनरेशन, रिन्यूएबल एनर्जी, ट्रांसमिशन लाइन, सबस्टेशन और ग्रिड से जुड़े कामों में नए ऑर्डर तेजी से आ रहे हैं। डेटा सेंटर, इलेक्ट्रिक व्हीकल, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग से भी बिजली की मांग बढ़ रही है। यही वजह है कि इंडस्ट्रियल कंपनियों के सामने काम की कमी नहीं दिख रही है।
HV T&D बना ग्रोथ का सबसे मजबूत सहारा
हाई वोल्टेज ट्रांसमिशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन यानी HV T&D इस तिमाही में ग्रोथ का सबसे बड़ा इंजन बना रहेगा। रिपोर्ट के मुताबिक इस सेगमेंट में नए ऑर्डर करीब 44 प्रतिशत तक बढ़ सकते हैं। वहीं कामकाज यानी एग्जीक्यूशन में भी लगभग 27 प्रतिशत की तेजी आने की उम्मीद है।
रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स तेजी से बढ़ रहे हैं और इन्हें ग्रिड से जोड़ने के लिए नई ट्रांसमिशन लाइन और सबस्टेशन की जरूरत है। सरकार भी ग्रिड की कमजोरियों को दूर करने और बिजली सप्लाई को मजबूत बनाने पर जोर दे रही है। इससे HV T&D कंपनियों को लगातार काम मिल रहा है। पिछली तिमाही में बारिश के कारण जो रुकावट आई थी, वह अब खत्म हो रही है और इसका सीधा फायदा इस तिमाही में दिख सकता है।
₹12 लाख करोड़ की ऑर्डर बुक का मतलब
₹12 लाख करोड़ की ऑर्डर बुक का मतलब यह है कि कंपनियों के पास आने वाले कई सालों के लिए काम सुरक्षित हो चुका है। बड़ी ऑर्डर बुक से कंपनियों को रेवेन्यू विजिबिलिटी मिलती है और निवेशकों का भरोसा भी बढ़ता है।
पावर प्लांट, रिन्यूएबल एनर्जी, ट्रांसमिशन लाइन, सबस्टेशन, रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन और इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे प्रोजेक्ट्स से ऑर्डर बुक मजबूत हो रही है। इसका असर कंपनियों की कमाई और मार्जिन पर भी पड़ सकता है, खासकर तब जब साइट पर काम सुचारु रूप से चलता रहे।
चीन से जुड़े टेंडर नियमों पर अब भी अनिश्चितता
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन से जुड़ी टेंडर पॉलिसी को लेकर अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। कुछ खबरों में कहा जा रहा है कि सरकार चीनी कंपनियों को सरकारी टेंडर में हिस्सा लेने की छूट दे सकती है। हालांकि इस पर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
नुवामा का मानना है कि अगर कोई राहत मिलती भी है, तो वह सिर्फ छोटे और कम अहम कंपोनेंट्स तक सीमित रह सकती है। बड़े और संवेदनशील प्रोजेक्ट्स में चीनी कंपनियों की एंट्री की संभावना कम ही है। ऐसी स्थिति में भारतीय कंपनियों को अपने मैन्युफैक्चरिंग और एग्जीक्यूशन पर ज्यादा फोकस करने का मौका मिलेगा।
नॉन पावर इंडस्ट्रियल सेक्टर में निवेश अभी कमजोर
जहां पावर सेक्टर में तेजी दिख रही है, वहीं नॉन पावर इंडस्ट्रियल सेक्टर में निजी निवेश अभी कमजोर बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार आने वाले 6 से 9 महीनों में भी निजी निवेश में बड़ी उछाल की उम्मीद कम है।
अभी निवेश मुख्य रूप से रिन्यूएबल एनर्जी, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित है। बाकी इंडस्ट्री जैसे सीमेंट, स्टील और भारी मशीनरी में निवेश धीमा है। अगर सरकार टैक्स में कटौती, GST सुधार, PLI स्कीम का विस्तार और ब्याज दरों में नरमी जैसे कदम उठाती है, तभी निजी निवेश में मजबूती आ सकती है।
EPC कंपनियों के लिए मॉनसून के बाद राहत
मॉनसून खत्म होने के बाद EPC यानी इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन कंपनियों के लिए हालात सुधरते दिख रहे हैं। साइट पर काम दोबारा शुरू हो गया है और सप्लाई चेन भी सामान्य हो रही है।
KEC इंटरनेशनल और KPIL जैसी कंपनियां इस तिमाही में अपने गाइडेंस के दायरे में अच्छा प्रदर्शन कर सकती हैं। L&T के लिए भी FY26 में ऑर्डर ग्रोथ 12 से 15 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। मिडिल ईस्ट से मिले बड़े ऑर्डर अब जमीन पर उतर सकते हैं, जिससे साल के दूसरे हिस्से में कंपनी की कमाई बेहतर रह सकती है।
ब्रोकरेज की टॉप पिक कंपनियां
नुवामा की रिपोर्ट के मुताबिक पावर और इंडस्ट्रियल सेक्टर में जिन कंपनियों पर सबसे ज्यादा भरोसा जताया जा रहा है, उनमें GVTD, Hitachi Energy, BHEL और CG Power शामिल हैं। इन कंपनियों को HV T&D, पावर इक्विपमेंट और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से मजबूत ऑर्डर मिलने की उम्मीद है।












