IIT रुड़की से पढ़ाई के बाद क्षितिज गुरभेले बने IAS, पहले प्रयास में हासिल की AIR 441

IIT रुड़की से पढ़ाई के बाद क्षितिज गुरभेले ने पहले प्रयास में UPSC पास कर AIR 441 हासिल की। जानें उनकी तैयारी, सफलता की रणनीति और पिता को दिए सरप्राइज की कहानी।

IIT रुड़की से ग्रेजुएशन करने वाले क्षितिज गुरभेले ने हाई-पेइंग जॉब के बजाय सिविल सेवा को चुना। उन्होंने पहले प्रयास में UPSC परीक्षा पास कर AIR 441 हासिल की। पिता को दिया गया उनका सरप्राइज भी चर्चा में रहा।

 IAS Kshitij Gurbhele Success Story: UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए IAS क्षितिज गुरभेले की कहानी मेहनत, अनुशासन और स्पष्ट लक्ष्य की मिसाल है। IIT रुड़की से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अच्छी सैलरी वाली नौकरी के बजाय प्रशासनिक सेवा में जाने का फैसला किया। कॉलेज के समय से तैयारी शुरू करने और खुद की रणनीति पर भरोसा रखने वाले क्षितिज ने पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की।

IIT रुड़की से ग्रेजुएशन के बाद सिविल सेवा को बनाया लक्ष्य

IAS क्षितिज गुरभेले की सफलता की कहानी बताती है कि करियर में बड़ा फैसला लेने के लिए स्पष्ट लक्ष्य और खुद पर भरोसा होना कितना जरूरी है। उन्होंने IIT रुड़की से अपनी पढ़ाई पूरी की। इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद उनके सामने कैंपस प्लेसमेंट के जरिए अच्छी नौकरी पाने का विकल्प था, लेकिन उन्होंने सिविल सेवा में जाने का फैसला किया।

उनका यह निर्णय परिवार के लिए शुरुआत में चौंकाने वाला था। इसके बावजूद क्षितिज ने अपने लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखा। उन्होंने अपनी तैयारी के लिए दो प्रयासों का लक्ष्य निर्धारित किया था। कॉलेज के दिनों से ही UPSC की तैयारी शुरू करने का फायदा उन्हें आगे मिला। पढ़ाई के साथ परीक्षा की जरूरतों को समझने और नियमित अभ्यास करने से उन्हें अपनी रणनीति तैयार करने में मदद मिली।

बिना कोचिंग पहले प्रयास में UPSC पास कर हासिल की AIR 441

क्षितिज गुरभेले ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा के अपने पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की। उन्होंने ऑल इंडिया रैंक (AIR) 441 प्राप्त की और IAS अधिकारी बनने की दिशा में अपना लक्ष्य पूरा किया। उनकी तैयारी की खास बात यह रही कि उन्होंने अपनी पढ़ाई के लिए खुद की रणनीति पर भरोसा किया और कोचिंग के बजाय उपलब्ध ऑनलाइन संसाधनों का इस्तेमाल किया।

तैयारी के दौरान क्षितिज ने शॉर्ट नोट्स बनाए, ताकि जरूरी विषयों को कम समय में दोहराया जा सके। UPSC जैसी परीक्षा में लंबे सिलेबस को व्यवस्थित तरीके से पढ़ना और समय-समय पर रिवीजन करना महत्वपूर्ण होता है। उनके नोट्स ने तैयारी को व्यवस्थित रखने में मदद की।

उन्होंने आंसर राइटिंग की प्रैक्टिस पर भी ध्यान दिया। इसके साथ ही इंटरनेट पर उपलब्ध अध्ययन सामग्री का इस्तेमाल करते हुए अपना टाइम टेबल बनाया और अनुशासन के साथ तैयारी जारी रखी। उनकी सफलता यह दिखाती है कि कोचिंग के अलावा भी सही दिशा, नियमित अभ्यास और अपनी कमजोरियों पर काम करने से परीक्षा की तैयारी को प्रभावी बनाया जा सकता है।

UPSC इंटरव्यू में आत्मविश्वास और ईमानदारी ने बनाई अलग पहचान

UPSC इंटरव्यू सिविल सेवा चयन प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। इसमें उम्मीदवार के ज्ञान के साथ उसकी सोच, निर्णय लेने की क्षमता और परिस्थितियों को समझने के तरीके को भी परखा जाता है। क्षितिज के लिए इंटरव्यू का अनुभव भी खास रहा।

उन्होंने बताया कि इंटरव्यू के दौरान जब उनसे पूछा गया कि वह खुद को 10 में से कितने अंक देंगे, तो उन्होंने जवाब दिया कि यदि पैनल उन्हें 7 अंक देता है, तब भी वह एक सिविल सर्वेंट बनकर बाहर निकलेंगे। उनका जवाब आत्मविश्वास और अपनी क्षमता को लेकर स्पष्ट सोच को दर्शाता है।

इस तरह के सवालों में केवल प्रभावशाली जवाब देना ही महत्वपूर्ण नहीं होता, बल्कि अपनी बात को सहजता और ईमानदारी के साथ रखना भी मायने रखता है। क्षितिज की तैयारी और उनके स्पष्ट दृष्टिकोण ने उनके सफर में अहम भूमिका निभाई।

पिता को सरप्राइज देकर साझा की सफलता की खुशी

क्षितिज की सफलता की कहानी का सबसे भावुक हिस्सा उनके पिता से जुड़ा है। UPSC में सफलता मिलने के बाद वह अपने पिता के ऑफिस पहुंचे, जहां उनके पिता सहकर्मियों के साथ लंच कर रहे थे। क्षितिज ने उन्हें सरप्राइज देते हुए कहा, ‘बड़ा अफसर आया है, उठ जाइए।’

उनकी इस बात में मजाक के साथ अपने पिता के प्रति सम्मान और सफलता की खुशी भी छिपी थी। बेटे की उपलब्धि देखकर पिता भावुक हो गए। यह पल दिखाता है कि किसी भी बड़ी सफलता के पीछे परिवार का समर्थन और उनके त्याग की अहम भूमिका हो सकती है।

क्षितिज की कहानी केवल परीक्षा पास करने तक सीमित नहीं है। यह अपने माता-पिता के योगदान को समझने और अपनी उपलब्धियों में उन्हें शामिल करने का संदेश भी देती है।
UPSC की तैयारी करने वालों के लिए क्षितिज की सीख

क्षितिज गुरभेले का मानना है कि सिविल सेवा की तैयारी में मेहनत के साथ सही माइंडसेट भी जरूरी है। तैयारी के दौरान हर समय मोटिवेशन महसूस करना संभव नहीं होता, इसलिए लक्ष्य के प्रति निरंतरता बनाए रखना अधिक महत्वपूर्ण है।

उनकी यात्रा से अभ्यर्थी कुछ बातें सीख सकते हैं। अपनी जरूरत के अनुसार पढ़ाई की रणनीति बनाना, छोटे और उपयोगी नोट्स तैयार करना, नियमित रिवीजन करना और उत्तर लेखन का अभ्यास करना तैयारी को बेहतर बना सकता है। इसके साथ ही ऑनलाइन संसाधनों का सही इस्तेमाल और समय का अनुशासित प्रबंधन भी मददगार होता है।

क्षितिज की सफलता यह संदेश देती है कि किसी प्रतिष्ठित संस्थान से डिग्री हासिल करना या अच्छी नौकरी का अवसर मिलना ही करियर की अंतिम मंजिल नहीं है। यदि किसी का लक्ष्य स्पष्ट है और वह उसके लिए लगातार प्रयास करता है, तो अपने चुने हुए रास्ते पर आगे बढ़ सकता है।

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