IIT बॉम्बे के सर्वे में खुलासा, 25% छात्रों ने मानी नकल की बात, आधे से ज्यादा बड़े शहरों से

IIT बॉम्बे के इनसाइट सर्वे 2026 में 25% छात्रों ने नकल की बात मानी। जानें छात्रों की पृष्ठभूमि, करियर योजनाओं और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े निष्कर्ष।

IIT बॉम्बे के इनसाइट सर्वे 2026 में छात्रों की पृष्ठभूमि, पढ़ाई, करियर और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े पहलुओं का आकलन किया गया। सर्वे में शामिल करीब 25% छात्रों ने एक या दो बार नकल करने की बात स्वीकार की, जबकि 50% से अधिक छात्र बड़े और मेट्रो शहरों से आए थे।

मुंबई: IIT बॉम्बे के स्टूडेंट मीडिया ग्रुप इनसाइट के सालाना सर्वे में 2026 बैच के छात्रों की शैक्षणिक और व्यक्तिगत जिंदगी से जुड़े कई तथ्य सामने आए हैं। सर्वे में शामिल 144 छात्रों में से लगभग एक-चौथाई ने मजबूरी में एक या दो बार नकल करने की बात स्वीकार की। इसके अलावा, छात्रों की पारिवारिक पृष्ठभूमि, ब्रांच बदलने की प्राथमिकताओं, करियर योजनाओं और काउंसलिंग से जुड़े अनुभवों की जानकारी भी सामने आई।

IIT बॉम्बे के 2026 बैच के छात्रों पर क्या कहता है सर्वे?

IIT बॉम्बे के स्टूडेंट मीडिया ग्रुप इनसाइट ने 2026 में ग्रेजुएट होने वाले छात्रों के बीच अपना सालाना सर्वे किया। इसमें छात्रों की जनसांख्यिकीय पृष्ठभूमि, शैक्षणिक प्रदर्शन, करियर की योजनाओं, कैंपस लाइफ और मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषयों को शामिल किया गया।

सर्वे के अनुसार, इसमें हिस्सा लेने वाले 32.6% छात्र बड़े शहरों और 20.8% छात्र मेट्रो शहरों से आए थे। वहीं, 37.5% छात्रों ने छोटे शहरों या कस्बों से आने की जानकारी दी, जबकि लगभग 9% छात्र ग्रामीण क्षेत्रों से थे।

छात्रों की पारिवारिक पृष्ठभूमि भी सर्वे का हिस्सा रही। इसमें 85% से अधिक छात्रों ने बताया कि उनके माता-पिता ने STEM या नॉन-STEM विषयों में ग्रेजुएशन या पोस्टग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है।

हालांकि, सर्वे में 2026 बैच के करीब 2,400 छात्रों में से केवल 144 ने हिस्सा लिया। इनसाइट ने भी स्पष्ट किया कि इसके निष्कर्ष पूरे बैच के अनुभवों और विचारों का प्रतिनिधित्व जरूरी नहीं करते।

करीब 25% छात्रों ने एक या दो बार नकल करने की बात मानी

सर्वे में छात्रों से संस्थान के ऑनर कोड और परीक्षा या असाइनमेंट के दौरान नकल से जुड़े सवाल पूछे गए। ज्यादातर छात्रों ने बताया कि उन्होंने कभी नकल नहीं की। हालांकि, करीब एक-चौथाई छात्रों ने स्वीकार किया कि उन्होंने मजबूरी में एक या दो बार ऐसा किया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस समूह में अच्छे परफॉर्मेंस इंडेक्स (CPI) वाले छात्र भी शामिल थे। वहीं, लगभग 65% प्रतिभागियों ने कहा कि उन्होंने दूसरे छात्रों को अक्सर नकल करते देखा है।

ये आंकड़े सर्वे में शामिल छात्रों के जवाबों पर आधारित हैं। सीमित भागीदारी के कारण इन्हें IIT बॉम्बे के सभी छात्रों के व्यवहार का प्रतिनिधि आंकड़ा नहीं माना जा सकता।

ब्रांच बदलने और करियर को लेकर छात्रों की पसंद

सर्वे में छात्रों से यह भी पूछा गया कि अगर उन्हें अपनी ब्रांच बदलने का अवसर मिले, तो वे किस विषय को चुनना चाहेंगे। लगभग एक-चौथाई छात्रों ने कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग को अपनी पसंद बताया। इसके अलावा, 32.4% छात्रों ने कहा कि बेहतर प्लेसमेंट के अवसर उन्हें ब्रांच बदलने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

करियर को लेकर भी छात्रों की राय अलग-अलग रही। लगभग 32% प्रतिभागियों ने कहा कि उन्हें निश्चित नहीं है कि वे अगले पांच वर्षों तक अपने मौजूदा क्षेत्र में काम करना चाहेंगे या नहीं। वहीं, 28% ने अपने वर्तमान क्षेत्र से बाहर जाने की योजना होने की बात कही।

इसके अलावा, 21% छात्रों ने बताया कि अगर आर्थिक बाधाएं नहीं होतीं, तो वे ग्रेजुएशन के बाद आगे की पढ़ाई या रिसर्च करना पसंद करते।

काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य पर छात्रों की राय

सर्वे में कैंपस के दौरान काउंसलिंग या थेरेपी लेने के अनुभवों पर भी सवाल पूछे गए। 41 छात्रों ने कहा कि उन्हें इसकी जरूरत महसूस नहीं हुई, जबकि 33 ने बताया कि उन्होंने दोस्तों और परिवार की मदद से अपनी परेशानियों का सामना किया।

वहीं, 24 छात्रों ने संस्थान की काउंसलिंग सेवा का इस्तेमाल करने की जानकारी दी। 25 छात्रों ने कहा कि वे काउंसलिंग लेना चाहते थे, लेकिन इसके लिए पहला कदम नहीं उठा पाए।

ये जवाब बताते हैं कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य संबंधी अनुभव और मदद लेने के तरीके अलग-अलग रहे। सर्वे के निष्कर्षों को समझते समय इसकी सीमित भागीदारी और प्रतिभागियों के व्यक्तिगत अनुभवों को ध्यान में रखना जरूरी है।

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