मथुरा। खुद को आध्यात्मिक गुरु बताने वाले IITian बाबा अभिषेक मिश्रा उर्फ आदिकर्ता नारायण दास से जुड़े मामले में अब जमानत को लेकर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी है। बाबा पर युवतियों को कथित तौर पर अपने प्रभाव में लेकर यौन शोषण करने और 'गंधर्व विवाह' के नाम पर संबंध बनाने के गंभीर आरोप लगे हैं। मामले में गिरफ्तारी के बाद अब उसकी जमानत याचिका पर हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है। हालांकि, जमानत मिलने की पुष्टि नहीं हुई है और अदालत में मामले की सुनवाई जारी है।
पुलिस के मुताबिक, अभिषेक मिश्रा मूल रूप से ओडिशा के भुवनेश्वर का रहने वाला है और उसने IIT रुड़की से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। पढ़ाई के बाद उसने कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर मथुरा के राधाकुंड क्षेत्र में आध्यात्मिक गतिविधियां शुरू कीं। ऑनलाइन प्रवचन और सोशल मीडिया के जरिए वह युवाओं, खासकर शिक्षित युवक-युवतियों से संपर्क बनाता था। पुलिस जांच में उसके आश्रम से जुड़ी कई युवतियों और डिजिटल सामग्री की जानकारी सामने आने का दावा किया गया है।
मामले का खुलासा एक युवती की शिकायत के बाद हुआ। पुलिस के अनुसार, छत्तीसगढ़ की एक 22 वर्षीय युवती ने आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप है कि आरोपी ने आध्यात्मिक प्रभाव और भरोसे का इस्तेमाल कर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। FIR में एक पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी ने उसे विश्वास दिलाया कि दोनों का गंधर्व विवाह हो चुका है और इसी आधार पर उसके साथ संबंध बनाए गए।
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी के मोबाइल और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की भी पड़ताल की। विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस को कई युवतियों से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो मिलने की बात सामने आई थी। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि आरोपी ने कितनी महिलाओं को अपने प्रभाव में लिया था और क्या अन्य युवतियों के साथ भी इसी तरह का व्यवहार किया गया।
पुलिस जांच में यह भी आरोप सामने आया कि आरोपी खुद को भगवान कृष्ण का अवतार बताकर युवाओं को प्रभावित करता था। उसके आसपास रहने वाले युवाओं में कई इंजीनियरिंग, एमबीए और अन्य उच्च शिक्षा प्राप्त लोग बताए गए हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि धार्मिक और आध्यात्मिक बातों के जरिए लोगों पर किस तरह प्रभाव डाला जाता था और क्या किसी तरह का संगठित नेटवर्क भी बनाया गया था।
'गंधर्व विवाह' का नाम इस मामले में जांच का अहम हिस्सा बन गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने आरोप लगाया है कि आरोपी इस तरह की अनौपचारिक शादी की बात कहकर युवतियों को अपने प्रभाव में रखता था। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में साक्ष्यों और सुनवाई के बाद ही होगी।
मामले में आरोपी की गिरफ्तारी के बाद उसे जेल भेजा गया था। अब उसकी ओर से जमानत के लिए अदालत का रुख किया गया है। हाईकोर्ट में जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सरकार का पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा। अदालत द्वारा सरकार से जवाब मांगे जाने का अर्थ यह नहीं है कि आरोपी को जमानत मिल गई है; आगे की सुनवाई में राज्य का जवाब और केस रिकॉर्ड देखने के बाद अदालत अगला निर्णय लेगी।
जांच अभी जारी होने के कारण इस मामले में सामने आए आरोपों को अदालत के अंतिम फैसले के रूप में नहीं देखा जा सकता। पुलिस की ओर से लगाए गए आरोपों और पीड़िताओं के बयानों की न्यायिक जांच होना बाकी है। आरोपी को भी कानून के तहत अपना पक्ष रखने का अधिकार है।
इस पूरे मामले ने सोशल मीडिया के जरिए चलने वाली तथाकथित आध्यात्मिक गतिविधियों और उनके जरिए लोगों से संपर्क बनाने को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। पुलिस अब आरोपी के डिजिटल नेटवर्क, संपर्कों और आश्रम में आने-जाने वाले लोगों के बारे में जानकारी जुटा रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट हो सकता है कि मामला केवल एक शिकायत तक सीमित है या इसके पीछे और भी पीड़िताएं तथा लोग जुड़े हुए हैं।
फिलहाल IITian बाबा अभिषेक मिश्रा की जमानत पर हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है और सरकार से जवाब मांगा गया है। आगे की सुनवाई में अदालत के रुख से यह स्पष्ट होगा कि आरोपी को जमानत मिलती है या उसे फिलहाल जेल में ही रहना होगा।