IMF पर निर्भर नहीं रहेगा पाकिस्तान? रक्षा मंत्री के बयान से मचा सियासी शोर

IMF पर निर्भर नहीं रहेगा पाकिस्तान? रक्षा मंत्री के बयान से मचा सियासी शोर

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने दावा किया है कि अगले छह महीनों में IMF से कर्ज की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने JF-17 फाइटर जेट की संभावित डील को देश की आर्थिक राहत का आधार बताया।

Pakistan: पाकिस्तान की राजनीति और अर्थव्यवस्था में एक बार फिर बड़ा बयान सामने आया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने दावा किया है कि आने वाले छह महीनों में पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF से कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब पाकिस्तान लगातार आर्थिक संकट, महंगाई और विदेशी कर्ज के दबाव से जूझ रहा है।

ख्वाजा आसिफ के इस दावे ने न सिर्फ पाकिस्तान में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर ऐसा क्या बदल गया कि IMF पर निर्भर रहने वाला पाकिस्तान अचानक खुद को आर्थिक रूप से मजबूत बताने लगा है।

JF-17 फाइटर जेट बना उम्मीद की वजह

ख्वाजा आसिफ ने अपने बयान के पीछे जो वजह बताई है, वह पाकिस्तान की सैन्य ताकत से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए चार दिन के सैन्य टकराव के बाद पाकिस्तान के JF-17 थंडर फाइटर जेट की मांग अचानक बढ़ गई है।

आसिफ के मुताबिक, इस संघर्ष में JF-17 जेट के प्रदर्शन को देखकर कई देशों ने इसमें रुचि दिखाई है। उन्होंने दावा किया कि अगर इन संभावित ऑर्डरों को अंतिम रूप मिल जाता है, तो पाकिस्तान को IMF से किसी भी तरह की आर्थिक मदद लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

क्या है JF-17 थंडर फाइटर जेट

JF-17 थंडर एक multi role fighter jet है, जिसे पाकिस्तान और चीन ने मिलकर विकसित किया है। इसे खास तौर पर कम लागत और आसान मेंटेनेंस को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यह जेट पश्चिमी देशों के हथियार सिस्टम पर निर्भर नहीं है, जिससे पाकिस्तान को ट्रेनिंग और सप्लाई चेन में आसानी मिलती है।

पाकिस्तान लंबे समय से JF-17 को अपनी वायुसेना की रीढ़ के तौर पर पेश करता रहा है। सरकार और सेना का दावा है कि यह जेट कम कीमत में बेहतर combat capability देता है।

बांग्लादेश की दिलचस्पी से बढ़ा भरोसा

ख्वाजा आसिफ ने यह भी बताया कि बांग्लादेश ने हाल ही में JF-17 फाइटर जेट में रुचि दिखाई है। बांग्लादेश का एक रक्षा प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान के एयर चीफ से मिला और संभावित खरीद पर चर्चा की।

इसके साथ ही, पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच सीधी उड़ानें भी फिर से शुरू होने जा रही हैं। 29 जनवरी से दोनों देशों के बीच direct flights बहाल होंगी, जो दस साल से ज्यादा समय बाद हो रहा है। पाकिस्तान इसे अपने लिए एक बड़ा diplomatic और strategic signal मान रहा है।

सऊदी अरब के साथ बड़ी डील की चर्चा

पाकिस्तान की उम्मीदें सिर्फ बांग्लादेश तक सीमित नहीं हैं। ख्वाजा आसिफ ने संकेत दिए हैं कि सऊदी अरब के साथ भी JF-17 को लेकर बातचीत चल रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब के करीब 2 बिलियन डॉलर के कर्ज को JF-17 डील में बदलने पर चर्चा हो रही है। अगर ऐसा होता है, तो यह पाकिस्तान के लिए बड़ी राहत मानी जाएगी।

पिछले साल पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच एक mutual defense pact पर भी हस्ताक्षर हुए थे। इस समझौते को पाकिस्तान की कमजोर अर्थव्यवस्था और मिडिल ईस्ट में बदलते geopolitical हालात से जोड़कर देखा जा रहा है।

भारत का दावा और पाकिस्तान की कहानी

ख्वाजा आसिफ का पूरा दावा मई 2025 के भारत पाकिस्तान सैन्य टकराव पर टिका हुआ है। अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 नागरिकों की मौत हुई थी। भारत ने इसके जवाब में ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया था।

भारतीय वायुसेना का दावा है कि इस ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान के कई आतंकी ठिकानों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने नवंबर में कहा था कि इस कार्रवाई में कम से कम पांच पाकिस्तानी फाइटर जेट गिराए गए थे, जिनमें JF-17 भी शामिल था।

भारत के इस दावे के बाद पाकिस्तान के लिए JF-17 की सफलता की कहानी पर सवाल उठने लगे हैं।

IMF पर पाकिस्तान की पुरानी निर्भरता

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से IMF के सहारे चल रही है। विदेशी मुद्रा भंडार की कमी, बढ़ता व्यापार घाटा और कर्ज का बोझ पाकिस्तान को बार बार IMF के पास जाने को मजबूर करता रहा है।

सितंबर 2024 में IMF ने पाकिस्तान को 7 बिलियन डॉलर का बेलआउट पैकेज दिया था। इसके बाद मई 2025 में 1.4 बिलियन डॉलर का climate resilience fund भी मंजूर किया गया था। इन पैकेजों से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को कुछ समय के लिए राहत जरूर मिली, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया है।

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