IN-SPACe ने 17 सितंबर 2026 को Hosted Payloads के लिए नई Guidelines जारी की हैं। इनमें भारतीय और विदेशी संस्थाओं के Payloads के Authorisation, सुरक्षा, ITU Filing, Spectrum और Regulatory Compliance से जुड़े नियम निर्धारित किए गए हैं।
IN-SPACe Hosted Payload Guidelines: भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) ने Hosted Payloads की स्थापना और संचालन के लिए नए नियम जारी किए हैं। 17 सितंबर 2026 को जारी दस्तावेज में भारतीय और विदेशी संस्थाओं के लिए Authorisation प्रक्रिया, तकनीकी और सुरक्षा मानकों, Spectrum, Orbital requirements और ITU Filing से जुड़े प्रावधान स्पष्ट किए गए हैं।
IN-SPACe ने क्यों जारी की नई गाइडलाइंस
IN-SPACe ने 17 सितंबर 2026 को भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 के तहत होस्टेड पेलोड की स्थापना और संचालन के लिए प्राधिकरण से संबंधित मानदंड, दिशानिर्देश और प्रक्रियाएं नाम से दस्तावेज जारी किया।
IN-SPACe देश में निजी संस्थाओं की अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़ी गतिविधियों के लिए सिंगल-विंडो एजेंसी के रूप में काम करता है। पिछले कुछ वर्षों में भारत में निजी अंतरिक्ष कंपनियों की भागीदारी बढ़ी है। इन कंपनियों को गैर-सरकारी भारतीय संस्थाएं यानी NGEs कहा जाता है।

ये संस्थाएं पृथ्वी अवलोकन, अंतरिक्ष विज्ञान, संचार, तकनीकी प्रदर्शन और अन्य अंतरिक्ष आधारित सेवाओं के लिए अलग-अलग पेलोड विकसित और तैनात कर रही हैं। ऐसे में होस्टेड पेलोड से जुड़ी गतिविधियों के लिए स्पष्ट नियमों की जरूरत बढ़ गई थी।नई गाइडलाइंस का उद्देश्य भारतीय कंपनियों को होस्टेड पेलोड के जरिए अंतरिक्ष आधारित बुनियादी ढांचे तक पहुंच उपलब्ध कराना है। साथ ही तकनीकी, सुरक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा, स्पेक्ट्रम, कक्षीय और अन्य नियामकीय आवश्यकताओं का पालन सुनिश्चित करना भी इसका प्रमुख उद्देश्य है।
भारतीय पेलोड के लिए मंजूरी जरूरी
नई व्यवस्था के तहत यदि किसी भारतीय संस्था के स्वामित्व वाला होस्टेड पेलोड किसी भारतीय या विदेशी सैटेलाइट पर लगाया जाना है, तो उसके लिए IN-SPACe से मंजूरी लेना आवश्यक होगा।
इसका मतलब है कि भारतीय कंपनी यदि अपना पेलोड किसी भारतीय या गैर-भारतीय सैटेलाइट पर भेजना चाहती है, तो उसे निर्धारित प्राधिकरण प्रक्रिया का पालन करना होगा। इससे पेलोड की तकनीकी प्रकृति, संचालन और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की समीक्षा की जा सकेगी।
होस्टेड पेलोड व्यवस्था निजी कंपनियों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके जरिए उन्हें अपना पूरा सैटेलाइट विकसित और लॉन्च किए बिना अंतरिक्ष आधारित बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल करने का अवसर मिल सकता है।
विदेशी संस्थाओं के लिए भी तय किए गए नियम
IN-SPACe की गाइडलाइंस में विदेशी संस्थाओं से जुड़े होस्टेड पेलोड के लिए भी नियम निर्धारित किए गए हैं। यदि किसी विदेशी संस्था का पेलोड भारतीय अंतरिक्ष व्यवस्था के तहत किसी सैटेलाइट पर होस्ट किया जाना है, तो उससे जुड़े प्राधिकरण और नियामकीय प्रावधानों का पालन करना होगा।
इस प्रक्रिया में सुरक्षा, तकनीकी मानकों और अन्य लागू नियमों को ध्यान में रखा जाएगा। इसके अलावा स्पेक्ट्रम और कक्षीय संसाधनों से जुड़े प्रावधान भी महत्वपूर्ण होंगे।
स्पेक्ट्रम और ITU फाइलिंग पर भी जोर
होस्टेड पेलोड के संचालन के लिए केवल सैटेलाइट पर पेलोड स्थापित करना पर्याप्त नहीं है। इसके साथ स्पेक्ट्रम उपयोग, कक्षीय स्थिति, तकनीकी मानकों और सुरक्षा आवश्यकताओं का पालन भी जरूरी है।
गाइडलाइंस में इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन यानी ITU से संबंधित फाइलिंग आवश्यकताओं को भी शामिल किया गया है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्पेक्ट्रम और कक्षीय संसाधनों से जुड़े नियमों के अनुपालन में मदद मिलेगी।
निजी अंतरिक्ष क्षेत्र को मिल सकता है बढ़ावा
IN-SPACe की नई व्यवस्था से भारत की निजी अंतरिक्ष कंपनियों के लिए होस्टेड पेलोड के अवसर बढ़ सकते हैं। कंपनियां दूसरे सैटेलाइट पर अपने पेलोड को होस्ट कराकर अंतरिक्ष आधारित तकनीकों का परीक्षण और उपयोग कर सकती हैं।
साथ ही स्पष्ट नियामकीय प्रक्रिया से कंपनियों को यह समझने में मदद मिलेगी कि होस्टेड पेलोड के लिए किस तरह की मंजूरी और अनुपालन आवश्यक है। इससे भारत में निजी अंतरिक्ष गतिविधियों के विस्तार और अंतरिक्ष आधारित सेवाओं के विकास को बढ़ावा मिलने की संभावना है।











