न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम जनवरी में भारत दौरे पर आएगी। टीम का दौरा 10 जनवरी से शुरू हो रहा है, जब भारत और न्यूजीलैंड के बीच ODI सीरीज खेली जाएगी, इसके बाद 5 मैचों की T20I सीरीज का आयोजन होगा।
स्पोर्ट्स न्यूज़: न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम जनवरी में भारत दौरे पर आने वाली है, जहां दोनों देशों के बीच पहले वनडे (ODI) सीरीज और उसके बाद टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज खेली जाएगी। इस दौरे की शुरुआत 10 जनवरी से होने वाली ODI सीरीज से होगी, जबकि इसके बाद 5 मैचों की T20I सीरीज आयोजित की जाएगी। भारत दौरे के लिए न्यूजीलैंड क्रिकेट बोर्ड (NZC) ने 23 दिसंबर को अपनी वनडे और टी20 टीमों का ऐलान कर दिया है।
हालांकि, जैसे ही ODI स्क्वॉड सामने आया, क्रिकेट फैंस हैरान रह गए, क्योंकि इसमें न्यूजीलैंड के स्टार बल्लेबाज और पूर्व कप्तान केन विलियमसन का नाम शामिल नहीं था। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर केन विलियमसन भारत के खिलाफ वनडे सीरीज क्यों नहीं खेल रहे हैं?
ODI टीम से केन विलियमसन क्यों हैं बाहर?

केन विलियमसन पहले ही T20 इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं, लेकिन वह अभी भी वनडे और टेस्ट फॉर्मेट में न्यूजीलैंड के अहम खिलाड़ी माने जाते हैं। इसके बावजूद उनका भारत दौरे से बाहर रहना कई लोगों के लिए चौंकाने वाला रहा। दरअसल, इसकी सबसे बड़ी वजह है केन विलियमसन का कैजुअल कॉन्ट्रैक्ट। 35 वर्षीय विलियमसन ने न्यूजीलैंड क्रिकेट (NZC) के साथ एक ऐसा अनुबंध साइन किया है, जिसके तहत उन्हें यह स्वतंत्रता मिली हुई है कि वे अपनी पसंद के टूर्नामेंट और सीरीज चुन सकते हैं।
भारत और न्यूजीलैंड के बीच होने वाली वनडे सीरीज का शेड्यूल SA20 लीग 2025 से टकरा रहा है। SA20 लीग का चौथा सीजन 26 दिसंबर से शुरू हो रहा है, जिसमें केन विलियमसन डरबन सुपर जायंट्स टीम की ओर से खेलते नजर आएंगे। इसी वजह से उन्होंने भारत के खिलाफ वनडे सीरीज की बजाय SA20 लीग को प्राथमिकता दी है।
पहले भी लीग क्रिकेट को दे चुके हैं प्राथमिकता
यह पहला मौका नहीं है जब केन विलियमसन ने राष्ट्रीय टीम की जगह फ्रेंचाइजी क्रिकेट को तरजीह दी हो। इससे पहले भी वह जिम्बाब्वे के खिलाफ टेस्ट सीरीज और उससे पहले हुई T20I ट्राई-सीरीज का हिस्सा नहीं बने थे। उस दौरान उन्होंने इंग्लैंड में मिडलसेक्स के लिए T20 ब्लास्ट, काउंटी चैंपियनशिप और द हंड्रेड जैसे टूर्नामेंट खेले थे। साफ है कि अपने करियर के इस पड़ाव पर विलियमसन वर्कलोड मैनेजमेंट और आर्थिक अवसरों को ध्यान में रखते हुए फैसले ले रहे हैं।











