विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ INDIA ब्लॉक के नेताओं के रोजाना दिल्ली मार्च पर फिलहाल विराम लग गया है। पिछले सप्ताह से पांचवीं बार एकजुट होकर मार्च निकालने और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने के एक दिन बाद मंगलवार को राजधानी में विपक्षी नेताओं ने सड़क पर विरोध प्रदर्शन नहीं किया।
नई दिल्ली: देश में त्योहारों के मौसम के बीच विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक ने दिल्ली में रोजाना होने वाले विरोध मार्च को फिलहाल रोकने का फैसला किया है। हालांकि, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने स्पष्ट किया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का अभियान समाप्त नहीं हुआ है।
गठबंधन आगे भी इस मुद्दे पर राजनीतिक और कानूनी लड़ाई जारी रखने की तैयारी कर रहा है। राहुल गांधी के नेतृत्व में हुई विपक्षी नेताओं की बैठक में त्योहारों के दौरान प्रदर्शन की रणनीति, आगामी कार्यक्रमों और सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर चर्चा की गई। विपक्ष का कहना है कि विरोध प्रदर्शनों की रफ्तार अस्थायी रूप से धीमी हो सकती है, लेकिन उसकी मांगों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
अक्टूबर में नियमित मार्च नहीं करने पर विचार
विपक्षी गठबंधन के नेताओं के अनुसार, नवरात्रि, दुर्गा पूजा, दिवाली और छठ जैसे प्रमुख त्योहारों के कारण अक्टूबर में नियमित रूप से दिल्ली की सड़कों पर मार्च करना व्यावहारिक रूप से कठिन होगा। सूत्रों के मुताबिक, कम से कम अक्टूबर के तीसरे सप्ताह तक रोजाना संयुक्त विरोध प्रदर्शन नहीं करने पर विचार किया गया है।
हालांकि, बैठक के बाद अगले विरोध प्रदर्शन की तारीख और स्वरूप को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई। गठबंधन के नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि प्रदर्शन का अस्थायी विराम आंदोलन को खत्म करने का संकेत नहीं है। कांग्रेस की एक नवंबर को दिल्ली में प्रस्तावित रैली भी राजनीतिक गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके अलावा, आगामी चुनावों वाले राज्यों के नेताओं और सांसदों को अपने-अपने क्षेत्रों में संगठनात्मक गतिविधियों तथा चुनावी तैयारियों पर ध्यान देने की जरूरत है।
SIR और चुनाव आयोग के मुद्दे पर विपक्ष की कानूनी लड़ाई
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्ष की प्रमुख चिंता मतदाता सूची की समीक्षा की प्रक्रिया और उसके संभावित प्रभावों से जुड़ी है। विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। वे मामले में जल्द सुनवाई की मांग कर रहे हैं और अंतरिम राहत मिलने की उम्मीद जता रहे हैं।
विपक्ष का तर्क है कि मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि पात्र मतदाताओं के अधिकार सुरक्षित रहें। हालांकि, याचिका पर अंतिम निर्णय और किसी भी अंतरिम आदेश के संबंध में न्यायालय की आधिकारिक कार्रवाई ही निर्णायक होगी। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। INDIA ब्लॉक इस मुद्दे को चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता और संस्थागत जवाबदेही से जोड़कर उठा रहा है।
राहुल गांधी ने कहा- आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे

बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने विपक्षी गठबंधन की रणनीति को लेकर कहा कि उनकी टीम पीछे हटने वाली नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि विपक्ष ने आगे के लिए कुछ योजनाएं तैयार की हैं, जिनका पूरा विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। राहुल गांधी ने कहा कि लड़ाई आज, कल, कुछ दिन बाद या तीन महीने बाद भी जारी रह सकती है, लेकिन विपक्ष अपने अभियान को उसके अंतिम चरण तक ले जाएगा। उनके बयान से स्पष्ट है कि गठबंधन फिलहाल प्रदर्शन के तरीकों और समय में बदलाव कर सकता है, लेकिन SIR और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक एजेंडे में बनाए रखना चाहता है।
उन्होंने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन से संबंधित प्रतिबंधों को चुनौती देने की बात भी कही। इससे संकेत मिलता है कि विपक्ष सड़क पर प्रदर्शन के साथ-साथ कानूनी विकल्पों पर भी विचार कर रहा है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की जगह को लेकर विवाद
दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शनों से जुड़े प्रतिबंधों का मुद्दा भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन ने इस विषय को फिर से चर्चा में ला दिया है। विपक्षी दलों और विभिन्न संगठनों के सामने यह सवाल है कि राजधानी में विरोध प्रदर्शन किस स्थान और किस स्वरूप में आयोजित किए जाएं।
INDIA ब्लॉक के भीतर इस बात पर चर्चा हुई कि भविष्य में विरोध कार्यक्रम केवल दिल्ली तक सीमित रहें या उन्हें राज्यों और अन्य प्रमुख स्थानों तक भी विस्तारित किया जाए। कुछ नेताओं ने वाराणसी जैसे स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित करने का सुझाव दिया, जबकि अन्य नेताओं का मानना था कि राष्ट्रीय राजधानी में प्रदर्शन करने से व्यापक राजनीतिक और मीडिया का ध्यान आकर्षित किया जा सकता है। फिलहाल, गठबंधन ने इन विकल्पों पर कोई अंतिम निर्णय सार्वजनिक नहीं किया है।
विपक्षी नेताओं ने एकजुटता बनाए रखने पर दिया जोर
बैठक में राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी यादव, एनसीपी-एसपी की सुप्रिया सुले, शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत, समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधियों और वामपंथी दलों सहित कई विपक्षी नेताओं ने हिस्सा लिया। तृणमूल कांग्रेस की सागरिका घोष समेत अन्य नेताओं ने भी चर्चा में भाग लिया। बैठक में विपक्षी एकता बनाए रखने और संबंधित मुद्दों पर संयुक्त रूप से आगे बढ़ने पर जोर दिया गया। हालांकि, त्योहारों, चुनावी जिम्मेदारियों और अलग-अलग राज्यों की राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए प्रदर्शन की रणनीति में बदलाव की संभावना बनी हुई है।










