भारत ने ईरान में अपने नागरिकों और छात्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए संतुलित कूटनीतिक रुख अपनाया। ट्रंप की धमकियों और विरोध प्रदर्शनों के बीच भारत ईरान से लगातार संपर्क बनाए हुए है।
Iran Protests: ईरान में हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं और इसी बीच भारत ने साफ कर दिया है कि वह पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने दोस्ताना रुख अपनाते हुए ईरान को लेकर अपना स्टैंड सार्वजनिक किया है। भारत सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों और छात्रों की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
विदेश सचिव का बयान बना अहम
भारत के विदेश सचिव विक्रम मिश्री ने दिल्ली से पूरी दुनिया को यह संदेश दिया कि ईरान में हो रहे हर बदलाव पर भारत की पैनी नजर है। उन्होंने कहा कि ईरान में भारतीय प्रवासियों और भारत से गए छात्रों का एक बड़ा समुदाय रह रहा है। तमाम अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और सीमित संसाधनों के बावजूद भारत का दूतावास छात्र समुदाय तक पहुंचने में सफल रहा है। दूतावास की रिपोर्ट के अनुसार सभी भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं और अब तक किसी तरह की गंभीर समस्या सामने नहीं आई है।
Indian Students की सुरक्षा पर फोकस
विदेश सचिव ने यह भी बताया कि ईरान में हालात को देखते हुए भारत सरकार ने अपने सभी नागरिकों के लिए स्पष्ट गाइडलाइन जारी की है। भारतीयों को सलाह दी गई है कि वे अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें और किसी भी तरह की अशांति या प्रदर्शन से दूरी बनाए रखें। सुरक्षित स्थानों पर रहना और स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करना जरूरी बताया गया है। भारत सरकार लगातार अपने मिशन के जरिए छात्रों और प्रवासियों के संपर्क में है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद दी जा सके।
Iran में हालात क्यों बिगड़े

यदि ईरान में मौजूदा हालात को समझा जाए तो इसकी जड़ें 28 दिसंबर से जुड़ी हैं। इसी दिन बढ़ती महंगाई और आर्थिक संकट के खिलाफ विरोध की शुरुआत हुई थी। शुरुआती तौर पर यह विरोध शांतिपूर्ण था, लेकिन धीरे धीरे यह सरकार विरोधी आंदोलन में बदल गया। सड़कों पर केवल युवा ही नहीं, बल्कि महिलाएं और बुजुर्ग भी खुलकर सामने आ गए। यह आंदोलन अब ईरान के धार्मिक नेतृत्व के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है।
Protest से Violence तक की कहानी
रिपोर्ट्स के मुताबिक बीते दो हफ्तों में ईरान में 500 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा 10,000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। सरकार और सुरक्षा बलों के साथ प्रदर्शनकारियों की झड़पें लगातार बढ़ती गईं। कई शहरों में इंटरनेट सेवाएं बाधित की गईं और सख्त कर्फ्यू जैसे हालात बना दिए गए। सरकार का दावा है कि वह हालात पर काबू पाने की पूरी कोशिश कर रही है, लेकिन जमीनी सच्चाई इससे कहीं ज्यादा गंभीर बताई जा रही है।
Iranian Government का आरोप
ईरान की सरकार ने इन प्रदर्शनों के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ बताया है। सरकार का कहना है कि यह आंदोलन देश की स्थिरता को कमजोर करने की साजिश का हिस्सा है। ईरानी नेतृत्व का दावा है कि कुछ बाहरी शक्तियां इन प्रदर्शनों को भड़का रही हैं ताकि ईरान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाया जा सके। सरकार ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी कीमत पर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैयार है।
War पर Iran का साफ रुख
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने तेहरान में विदेशी राजनयिकों के सम्मेलन के दौरान बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अगर हालात बिगड़ते हैं तो देश पूरी तरह तैयार है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान बातचीत के लिए भी तैयार है, लेकिन बातचीत बराबरी, आपसी सम्मान और निष्पक्ष शर्तों पर ही हो सकती है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की ओर से दबाव लगातार बढ़ रहा है।
Trump पर लगाया गंभीर आरोप
ईरान के विदेश मंत्री ने डोनाल्ड ट्रंप पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ईरान में हिंसक प्रदर्शन इस मकसद से कराए गए ताकि ट्रंप को हस्तक्षेप करने का बहाना मिल सके। हालांकि उन्होंने अपने इस दावे के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया। इसके बावजूद इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। कतर से संचालित अल जजीरा (Al Jazeera) नेटवर्क ने अराघची के इस बयान को प्रमुखता से प्रसारित किया है।











