भारतीय मूल के NASA Astronaut अनिल मेनन ISS मिशन पर जाएंगे, 8 महीने अंतरिक्ष में रहेंगे

भारतीय मूल के NASA अंतरिक्ष यात्री Anil Menon जुलाई 2026 में ISS मिशन पर रवाना होंगे। वह करीब 8 महीने अंतरिक्ष में रहकर महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे।

भारतीय मूल के अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन जुलाई 2026 में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के लिए रवाना होंगे। डॉक्टर, इंजीनियर और पायलट रह चुके मेनन करीब आठ महीने तक अंतरिक्ष में रहकर वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम देंगे।

वॉशिंगटन: भारतीय मूल के NASA अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन अपने पहले अंतरिक्ष मिशन के लिए तैयार हैं। 14 जुलाई 2026 को वह सोयुज MS-29 अंतरिक्ष यान के जरिए अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए रवाना होंगे। यह मिशन उनके बहुआयामी करियर का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

डॉक्टर से अंतरिक्ष यात्री बनने तक का सफर

अनिल मेनन का जन्म अमेरिका के मिनियापोलिस में भारतीय और यूक्रेनी मूल के परिवार में हुआ था। बचपन से ही विज्ञान और तकनीक में रुचि रखने वाले मेनन ने अपनी उच्च शिक्षा प्रतिष्ठित संस्थानों से पूरी की। उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से न्यूरोबायोलॉजी में स्नातक की डिग्री हासिल की। इसके बाद स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से मेडिकल डिग्री और मैकेनिकल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री प्राप्त की।

भारतीय मूल के NASA Astronaut अनिल मेनन ISS मिशन पर जाएंगे, 8 महीने अंतरिक्ष में रहेंगे

मेडिकल प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने इमरजेंसी मेडिसिन और एयरोस्पेस मेडिसिन में विशेषज्ञता हासिल की। उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों ने उन्हें चिकित्सा और अंतरिक्ष विज्ञान दोनों क्षेत्रों में अलग पहचान दिलाई।

NASA और SpaceX में निभाई अहम भूमिका

अंतरिक्ष यात्री बनने से पहले अनिल मेनन NASA में फ्लाइट सर्जन के रूप में कार्य कर चुके हैं। इस भूमिका में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर कार्यरत अंतरिक्ष यात्रियों के स्वास्थ्य और चिकित्सा संबंधी जरूरतों का ध्यान रखा। उन्होंने रूस के स्टार सिटी में प्रशिक्षण भी प्राप्त किया, जहां उन्होंने सोयुज मिशनों से जुड़ी प्रक्रियाओं को करीब से समझा।

बाद में वह निजी अंतरिक्ष कंपनी SpaceX से जुड़े और कंपनी के पहले फ्लाइट सर्जन बने। उन्होंने अंतरिक्ष यात्रियों के लिए मेडिकल सिस्टम विकसित करने और मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। SpaceX के ऐतिहासिक Demo-2 मिशन में भी उनकी अहम भूमिका रही।

2026 में शुरू होगा पहला अंतरिक्ष मिशन

NASA ने अनिल मेनन का चयन 2021 में अंतरिक्ष यात्री उम्मीदवार के रूप में किया था। दो वर्षों के कठोर प्रशिक्षण के बाद उन्होंने 2024 में अपना आधिकारिक प्रशिक्षण पूरा किया। अब वह अपने पहले अंतरिक्ष मिशन के लिए तैयार हैं।

14 जुलाई 2026 को वह कजाकिस्तान के बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से Soyuz MS-29 अंतरिक्ष यान में सवार होकर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए रवाना होंगे। इस मिशन में उनके साथ रूसी अंतरिक्ष यात्री प्योत्र डुब्रोव और अन्ना किकिना भी होंगे। मिशन की अवधि लगभग 240 दिन यानी करीब आठ महीने होगी और उनकी वापसी 2027 के वसंत में प्रस्तावित है।

अंतरिक्ष में करेंगे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोग

ISS पर रहते हुए अनिल मेनन कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अनुसंधानों का हिस्सा बनेंगे। इन प्रयोगों का उद्देश्य चंद्रमा और मंगल ग्रह पर भविष्य के मानव मिशनों की तैयारी को मजबूत करना है। शोध के दौरान यह अध्ययन किया जाएगा कि सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण मानव शरीर, रक्त प्रवाह, नसों की संरचना और रक्त की संरचना को किस प्रकार प्रभावित करता है।

इसके अलावा वह ऐसी तकनीकों का परीक्षण भी करेंगे जिनकी मदद से अंतरिक्ष स्टेशन के पेयजल सिस्टम का उपयोग करके चिकित्सा उद्देश्यों के लिए अंतःशिरा (IV) तरल पदार्थ तैयार किए जा सकें। भविष्य के लंबी दूरी वाले अंतरिक्ष अभियानों में यह तकनीक बेहद उपयोगी साबित हो सकती है।

उड़ान और रोमांच का भी है लंबा अनुभव

अनिल मेनन केवल डॉक्टर और इंजीनियर ही नहीं, बल्कि एक कुशल पायलट भी हैं। वह प्रमाणित फ्लाइट इंस्ट्रक्टर हैं और 1,000 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव रखते हैं। इसके अलावा उन्होंने कई चुनौतीपूर्ण सहनशक्ति प्रतियोगिताओं में भी भाग लिया है।

उनका परिवार भी अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। उनकी पत्नी अन्ना मेनन SpaceX में कार्यरत हैं और कई मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रमों का हिस्सा रह चुकी हैं। दो बच्चों के पिता अनिल मेनन का यह मिशन भारतीय मूल के युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत माना जा रहा है।

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