इंडोनेशिया के पूर्वी नुसा तेंगारा में 7.7 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप से कम से कम 47 लोगों की मौत हुई। इसके बाद 6.5 और 6.0 के झटके आए। कई इमारतें और सड़कें क्षतिग्रस्त हुईं, जबकि अस्थायी सुनामी चेतावनी जारी की गई थी।
जकार्ता: इंडोनेशिया के पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत में शक्तिशाली भूकंपों की श्रृंखला ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। शनिवार को आए 7.7 तीव्रता के मुख्य भूकंप के बाद 6.5 और 6.0 तीव्रता के बड़े झटके महसूस किए गए। अधिकारियों के अनुसार कम से कम 47 लोगों की मौत हो चुकी है और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। राहत एवं बचाव अभियान जारी है, लेकिन भूस्खलन, क्षतिग्रस्त सड़कों और बिजली तथा संचार व्यवस्था में बाधा के कारण कई इलाकों तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है।
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण यानी USGS के मुताबिक मुख्य 7.7 तीव्रता का भूकंप फ्लोरेस द्वीप के पास समुद्र में आया। इसका केंद्र एंडे से लगभग 68 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में था और इसकी गहराई करीब 10 किलोमीटर दर्ज की गई। भूकंप की कम गहराई और तटीय इलाकों के पास केंद्र होने के कारण इसका प्रभाव कई क्षेत्रों में गंभीर रहा।
कुछ घंटों के भीतर कई शक्तिशाली झटके
मुख्य भूकंप के बाद क्षेत्र में लगातार आफ्टरशॉक महसूस किए गए। अधिकारियों और भूकंपीय निगरानी एजेंसियों के अनुसार 5 से अधिक तीव्रता वाले कई झटके आए, जबकि कुछ झटकों की तीव्रता 6 के आसपास या उससे अधिक थी। इससे स्थानीय लोगों में लगातार डर बना हुआ है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक मुख्य भूकंप के बाद 340 से अधिक आफ्टरशॉक दर्ज किए गए। लगातार झटकों के कारण क्षतिग्रस्त इमारतों में लौटने को लेकर भी लोगों को सावधान किया गया है। प्रशासन ने लोगों से सुरक्षित स्थानों पर रहने और नए झटकों की स्थिति में तुरंत खुले इलाकों की ओर जाने की अपील की है।
47 मौतों की पुष्टि, सैकड़ों घायल
आपदा के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक मरने वालों की संख्या 47 तक पहुंच गई थी, जबकि कई दर्जन लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। अलग-अलग इलाकों से मलबे में फंसे लोगों की सूचनाएं भी सामने आई हैं। राहत टीमों को कई जगहों पर मलबा हटाकर लोगों तक पहुंचना पड़ रहा है।
सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में मंगगराई और अन्य प्रशासनिक क्षेत्र शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार कई घर पूरी तरह ढह गए, जबकि सैकड़ों अन्य मकानों को नुकसान पहुंचा है। सार्वजनिक इमारतों, स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों को भी नुकसान हुआ है।
सड़कें और संचार व्यवस्था प्रभावित
भूकंप के बाद कई इलाकों में भूस्खलन हुआ, जिससे महत्वपूर्ण सड़कें बंद हो गईं। फ्लोरेस क्षेत्र की प्रमुख परिवहन कड़ी ट्रांस-फ्लोरेस हाईवे के कई हिस्सों पर भी असर पड़ा। इससे बचाव दलों के लिए दूरदराज के गांवों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई है। कुछ स्थानों पर पेट्रोल पंप भी बंद करने पड़े। रॉयटर्स के अनुसार बिजली कटौती के कारण करीब 20 पेट्रोल स्टेशन काम नहीं कर रहे थे। प्रशासन ने राहत सामग्री और बचाव कर्मियों की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयास शुरू किए हैं।
समुद्र का पानी पीछे हटने से सुनामी का डर
भूकंप के बाद कुछ तटीय क्षेत्रों में समुद्र का पानी अचानक पीछे हटने की खबरों से स्थानीय लोगों में सुनामी का डर पैदा हुआ। समुद्र के स्तर में असामान्य बदलाव को देखते हुए अधिकारियों ने कई तटीय इलाकों के लिए अस्थायी सुनामी चेतावनी जारी की।
बाद में निगरानी के आधार पर चेतावनी हटा दी गई, लेकिन छोटे स्तर की समुद्री लहरें दर्ज की गईं। रिपोर्टों के मुताबिक कुछ स्थानों पर लहरों की ऊंचाई डेढ़ मीटर से अधिक तक पहुंची। अधिकारियों ने लोगों को यह सलाह दी कि चेतावनी हटने के बावजूद वे क्षतिग्रस्त तटीय क्षेत्रों में तुरंत वापस न लौटें और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
प्रार्थना के दौरान गिरा भवन का हिस्सा
भूकंप के दौरान सिक्का इलाके के सेंट पीटर मेजर सेमिनरी में भी हादसा हुआ। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार सुबह की प्रार्थना के दौरान सभा भवन की छत का एक हिस्सा गिर गया। परिसर में मौजूद छात्र और नन घबराकर बाहर निकलने लगे।
जान बचाने की कोशिश में एक पादरी दूसरी मंजिल से कूद गए, जिससे उनके पैर में चोट लगने की सूचना है। यह घटना बताती है कि भूकंप का असर केवल आवासीय इमारतों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धार्मिक और सार्वजनिक संस्थान भी प्रभावित हुए।
अस्पतालों में भी मची अफरा-तफरी
भूकंप के बाद एहतियात के तौर पर कई अस्पतालों से मरीजों को बाहर निकालना पड़ा। कुछ स्वास्थ्य केंद्रों की इमारतों को नुकसान पहुंचने के बाद मरीजों का इलाज खुले स्थानों या अस्थायी शिविरों में किया गया।
तस्वीरों और वीडियो में स्वास्थ्यकर्मियों को मरीजों को स्ट्रेचर पर अस्पतालों से बाहर ले जाते देखा गया। कुछ स्थानों पर अस्पतालों के बाहर अस्थायी चिकित्सा क्षेत्र बनाए गए, जहां ऑक्सीजन, आईवी स्टैंड और अन्य जरूरी उपकरणों के साथ इलाज जारी रखा गया।

हजारों लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचे
भूकंप और आफ्टरशॉक के डर से हजारों लोगों ने अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों का रुख किया। रॉयटर्स के अनुसार करीब 5,000 लोग प्रभावित क्षेत्रों में खेल परिसरों और अस्थायी आश्रय स्थलों में पहुंचाए गए। सिक्का इलाके में बड़ी संख्या में लोगों ने खुले स्थानों या अस्थायी शिविरों में रात बिताई।
प्रशासन ने राहत शिविरों में भोजन, पानी, चिकित्सा सुविधा और अन्य जरूरी सामान पहुंचाने की कोशिश तेज कर दी है। हालांकि दुर्गम इलाकों और सड़क अवरोधों के कारण सहायता पहुंचाने की गति हर जगह समान नहीं है।
1,300 से अधिक घरों को नुकसान
भूकंप से आवासीय और सार्वजनिक ढांचे को व्यापक क्षति पहुंची है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार 1,300 से अधिक घरों को नुकसान पहुंचा, जबकि अन्य रिपोर्टों में सैकड़ों मकानों के पूरी तरह या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त होने की जानकारी दी गई है।
कई स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और अन्य सार्वजनिक भवन भी प्रभावित हुए हैं। प्रशासन अब नुकसान का विस्तृत आकलन कर रहा है। कई क्षेत्रों में मलबा हटाने और बिजली तथा संचार सेवाओं को बहाल करने का काम जारी है।
बचाव अभियान में सेना और पुलिस भी शामिल
राहत और बचाव अभियान में स्थानीय प्रशासन के साथ सेना और पुलिस के हजारों जवान लगाए गए हैं। रॉयटर्स के अनुसार 3,500 से अधिक सैन्य और पुलिसकर्मी प्रभावित इलाकों में अभियान में शामिल हैं। बचाव दल मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं और भूस्खलन से बंद रास्तों को खोलने का प्रयास जारी है।
अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन गांवों तक पहुंचना है जो सड़कें टूटने या भूस्खलन के कारण मुख्य नेटवर्क से कट गए हैं। कुछ इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाने के लिए वैकल्पिक मार्ग और समुद्री परिवहन का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
इंडोनेशिया में इतने भूकंप क्यों आते हैं?
इंडोनेशिया दुनिया के सबसे अधिक भूकंप प्रभावित देशों में शामिल है। इसकी प्रमुख वजह देश का प्रशांत महासागर के तथाकथित पैसिफिक रिंग ऑफ फायर में स्थित होना है। इस क्षेत्र में कई टेक्टोनिक प्लेटें एक-दूसरे के संपर्क में आती हैं, जिससे धरती के भीतर लगातार भूगर्भीय गतिविधियां होती रहती हैं।
जब प्लेटों के बीच जमा तनाव अचानक बाहर निकलता है तो भूकंप पैदा होता है। समुद्र के नीचे आने वाले बड़े और उथले भूकंप कुछ परिस्थितियों में समुद्री जल को तेजी से विस्थापित कर सकते हैं, जिससे सुनामी का खतरा पैदा हो सकता है। यही कारण है कि इंडोनेशिया में भूकंप और सुनामी दोनों की आशंका बनी रहती है।
2004 और 1992 की त्रासदियों की याद
इंडोनेशिया पहले भी बड़े भूकंप और सुनामी की भयावह घटनाओं का सामना कर चुका है। फ्लोरेस क्षेत्र में 1992 का विनाशकारी भूकंप भीषण तबाही के लिए जाना जाता है। वहीं 2004 में हिंद महासागर में आए विशाल भूकंप के बाद सुनामी ने इंडोनेशिया समेत कई देशों में भारी जनहानि की थी।
हालिया घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि इंडोनेशिया के तटीय और भूकंप संभावित इलाकों में आपदा तैयारी, मजबूत इमारतों और तेज चेतावनी व्यवस्था की कितनी महत्वपूर्ण भूमिका है।
राहत कार्य के बीच बढ़ती चिंता
सबसे बड़ी चिंता अभी यह है कि आफ्टरशॉक का सिलसिला जारी है। क्षतिग्रस्त इमारतों में जाने से नए हादसे हो सकते हैं और दूरदराज के इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचने में समय लग सकता है। प्रशासन ने लोगों से धैर्य बनाए रखने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
भूकंप के बाद मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि कई प्रभावित इलाकों का पूरा आकलन अभी बाकी है। राहत एजेंसियां लगातार नुकसान का सर्वे कर रही हैं और मलबे से लोगों को निकालने का अभियान जारी है।












