Induction Stove Subsidy: क्या सस्ता होगा इंडक्शन चूल्हा? LPG पर निर्भरता घटाने के लिए राष्ट्रीय योजना की तैयारी

Induction Stove Subsidy: LPG पर निर्भरता घटाने के लिए सरकार इलेक्ट्रिक और इंडक्शन कुकिंग को बढ़ावा देने की तैयारी में है। जानें सब्सिडी, सस्ते लोन और इंडक्शन

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में जारी अस्थिरता के बीच केंद्र सरकार रसोई गैस के आयात और बढ़ते सब्सिडी बोझ को कम करने के लिए इंडक्शन चूल्हों को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है।

बिजनेस न्यूज़: अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में बढ़ती अनिश्चितता और आयातित रसोई गैस पर भारत की निर्भरता को कम करने के प्रयासों के बीच केंद्र सरकार इलेक्ट्रिक इंडक्शन चूल्हों को बड़े स्तर पर बढ़ावा देने की योजना पर विचार कर रही है। प्रस्तावित पहल के तहत उपभोक्ताओं को इंडक्शन स्टोव खरीदने पर सब्सिडी देने के साथ उपकरणों की लागत कम करने और बिजली वितरण ढांचे को मजबूत बनाने जैसे कदमों पर विचार किया जा रहा है।

योजना का उद्देश्य देश में खाना पकाने के लिए LPG सिलेंडरों पर निर्भरता कम करना और इलेक्ट्रिक कुकिंग को एक किफायती विकल्प के रूप में विकसित करना है। हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर अंतिम सरकारी घोषणा और विस्तृत योजना का इंतजार है।

क्यों बढ़ी इंडक्शन चूल्हों को बढ़ावा देने की जरूरत?

भारत दुनिया के प्रमुख LPG उपभोक्ता और आयातक देशों में शामिल है। देश में रसोई गैस की मांग का एक बड़ा हिस्सा आयात से पूरा किया जाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारत की ऊर्जा लागत और LPG सब्सिडी पर पड़ता है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत की सालाना LPG मांग करीब 3.3 करोड़ टन है, जिसमें लगभग 65 प्रतिशत जरूरत आयात से पूरी होती है। आयातित आपूर्ति का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशियाई देशों से आता है।

ऐसे में वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव या ऊर्जा आपूर्ति में किसी तरह की बाधा भारत की घरेलू LPG व्यवस्था और कीमतों पर असर डाल सकती है। इसी जोखिम को कम करने के लिए इलेक्ट्रिक कुकिंग को वैकल्पिक समाधान के रूप में देखा जा रहा है।

इंडक्शन चूल्हे पर मिल सकती है सब्सिडी

सरकार जिस राष्ट्रीय योजना पर विचार कर रही है, उसमें कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हो सकते हैं। प्रस्तावित मॉडल के तहत इंडक्शन चूल्हे की खरीद पर प्रत्यक्ष सब्सिडी देने की संभावना है। इसके अलावा, इंडक्शन उपकरणों के निर्माण या उनसे जुड़े प्रमुख कंपोनेंट्स पर आयात शुल्क में बदलाव पर भी विचार किया जा सकता है। इसका उद्देश्य उपकरणों की कीमत कम करना और उन्हें अधिक से अधिक परिवारों की पहुंच में लाना हो सकता है।

हालांकि योजना अभी विचार-विमर्श के चरण में बताई जा रही है। इसलिए सब्सिडी की राशि, पात्रता और लाभार्थियों की संख्या जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होंगी।

34 करोड़ उपभोक्ताओं की LPG निर्भरता कम करने का लक्ष्य

देश में बड़ी संख्या में परिवार खाना पकाने के लिए LPG सिलेंडरों का इस्तेमाल करते हैं। प्रस्तावित योजना के जरिए इलेक्ट्रिक कुकिंग को बढ़ावा देकर करीब 34 करोड़ LPG उपभोक्ताओं के लिए एक वैकल्पिक विकल्प उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा सकता है। नीति निर्माताओं का मानना है कि अगर अधिक परिवार इंडक्शन जैसे इलेक्ट्रिक उपकरणों को अपनाते हैं, तो आयातित LPG पर दबाव कम हो सकता है।

इसका एक अन्य फायदा ऊर्जा स्रोतों में विविधता बढ़ने के रूप में भी देखा जा रहा है। भविष्य में घरेलू बिजली उत्पादन में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ने के साथ इलेक्ट्रिक कुकिंग को अपेक्षाकृत स्वच्छ विकल्प के तौर पर भी विकसित किया जा सकता है।

LPG के मुकाबले कितना सस्ता पड़ सकता है इंडक्शन?

इंडक्शन कुकिंग को बढ़ावा देने के पीछे लागत भी एक प्रमुख कारण है। उपलब्ध आकलनों के अनुसार, पारंपरिक LPG चूल्हे की तुलना में इंडक्शन चूल्हे पर खाना पकाने का खर्च करीब 33 प्रतिशत तक कम हो सकता है। हालांकि वास्तविक खर्च कई बातों पर निर्भर करेगा। इनमें स्थानीय बिजली दर, LPG सिलेंडर की कीमत, सब्सिडी, परिवार की बिजली खपत और खाना पकाने की आदतें शामिल हैं। यानी हर राज्य और हर परिवार के लिए इंडक्शन की बचत एक जैसी नहीं होगी। जिन क्षेत्रों में बिजली की दरें अधिक हैं, वहां लागत का अंतर कम हो सकता है।

LPG सब्सिडी का बढ़ता वित्तीय दबाव

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों में तेजी का असर सरकार और तेल विपणन कंपनियों के वित्तीय बोझ पर भी पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू LPG सिलेंडरों पर अंडर-रिकवरी बढ़ने की चिंता सामने आई है। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में पेट्रोलियम और LPG सब्सिडी के लिए लगभग 30,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यदि अंतरराष्ट्रीय कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो वास्तविक सब्सिडी खर्च बढ़ सकता है।

इसी वित्तीय दबाव को देखते हुए सरकार दीर्घकालिक विकल्पों पर विचार कर रही है। इंडक्शन कुकिंग को बढ़ावा देना केवल उपभोक्ताओं के लिए लागत कम करने का प्रयास नहीं, बल्कि देश की ऊर्जा आयात निर्भरता और सब्सिडी बोझ को नियंत्रित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है।

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