इनपुट कॉस्ट घटी तो बढ़ेगा मुनाफा, FMCG सेक्टर में चौथी तिमाही में दिख सकता है मार्जिन बूस्ट

इनपुट कॉस्ट घटी तो बढ़ेगा मुनाफा, FMCG सेक्टर में चौथी तिमाही में दिख सकता है मार्जिन बूस्ट

Antique Stock Broking की रिपोर्ट के अनुसार कई FMCG कंपनियों को कच्चे माल की कीमतों में नरमी से राहत मिल सकती है। कॉफी और कोपरा सस्ते होने से चौथी तिमाही में चुनिंदा कंपनियों के मार्जिन में सुधार संभव है।

FMCG Stocks: महंगे कच्चे माल से जूझ रही एफएमसीजी कंपनियों के लिए अब राहत की उम्मीद दिख रही है। Antique Stock Broking की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, कच्चे तेल और उससे जुड़े उत्पादों को छोड़ दें तो ज्यादातर अहम रॉ मैटेरियल की कीमतें या तो स्थिर हैं या गिरावट में हैं। अगर यही ट्रेंड जारी रहता है तो चौथी तिमाही में चुनिंदा कंपनियों के मार्जिन में सुधार देखने को मिल सकता है।

पिछले कुछ क्वार्टर में इनपुट कॉस्ट बढ़ने से कंपनियों के ग्रॉस मार्जिन पर दबाव था। अब कॉफी, कोपरा और कुछ अन्य कमोडिटी में आई नरमी से मुनाफे में सुधार की संभावना बन रही है।

कॉफी 18 प्रतिशत सस्ती

रिपोर्ट के मुताबिक तीसरी तिमाही के मुकाबले कॉफी की कीमतों में करीब 18 प्रतिशत की गिरावट आई है। फरवरी महीने में ही लगभग 16 प्रतिशत की मासिक गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट उन कंपनियों के लिए सकारात्मक है जिनके प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में कॉफी आधारित उत्पाद शामिल हैं।

कोपरा की कीमतें भी जुलाई 2025 के ऊंचे स्तर से लगभग 22 प्रतिशत नीचे आ चुकी हैं। हालांकि फरवरी में करीब 2 प्रतिशत की हल्की बढ़त देखी गई है। इससे संकेत मिलता है कि गिरावट का सिलसिला थम सकता है, लेकिन फिलहाल कीमतें पिछले उच्च स्तर से काफी नीचे हैं।

पाम ऑयल में जनवरी और फरवरी के दौरान 2 से 3 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है। यानी यहां हल्की महंगाई लौटती दिख रही है।

गेहूं, जौ और डेयरी में मिश्रित रुख

गेहूं की कीमतों में गिरावट का ट्रेंड बना हुआ है। जौ में मामूली तेजी आई है, लेकिन सालाना आधार पर कीमतें अब भी नीचे हैं।

डेयरी से जुड़े उत्पादों में स्किम्ड मिल्क पाउडर थोड़ा महंगा हुआ है, जबकि तरल दूध की कीमतें लगभग स्थिर बनी हुई हैं। इसका मतलब है कि डेयरी आधारित कंपनियों को आंशिक राहत मिल सकती है, लेकिन पूरी तरह से लागत दबाव खत्म नहीं हुआ है।

कच्चा तेल और पैकेजिंग बना चिंता का कारण

जहां कई रॉ मैटेरियल सस्ते हुए हैं, वहीं कच्चे तेल और उससे जुड़ी पैकेजिंग सामग्री की कीमतों में बढ़ोतरी चिंता का कारण बनी हुई है। तीसरी तिमाही के मुकाबले कच्चे तेल में करीब 10 प्रतिशत और एचडीपीई जैसी पैकेजिंग सामग्री में लगभग 4 प्रतिशत की तेजी आई है।

जनवरी और फरवरी में भी इनकी कीमतों में बढ़त देखी गई है। पैकेजिंग लागत बढ़ने से एफएमसीजी कंपनियों के खर्च पर असर पड़ सकता है, खासकर उन कंपनियों पर जो बड़े पैमाने पर प्लास्टिक आधारित पैकेजिंग का उपयोग करती हैं।

पेंट कंपनियों के लिए अहम कच्चा माल टीआईओ2 सस्ता हुआ है। इसकी कीमतें तिमाही आधार पर 5 प्रतिशत और सालाना आधार पर 15 प्रतिशत तक घटी हैं। इससे पेंट सेक्टर को राहत मिल सकती है।

साबुन कंपनियों के लिए जरूरी फैटी एसिड और डिटर्जेंट में इस्तेमाल होने वाला एलएबी अब भी महंगा बना हुआ है। वहीं हेयर ऑयल कंपनियों के लिए अहम एलएलपी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज हुई है।

किन कंपनियों के मार्जिन सुधर सकते हैं

रिपोर्ट के अनुसार यदि मौजूदा कच्चे माल की कीमतें इसी स्तर पर बनी रहती हैं तो चौथी तिमाही में कुछ कंपनियों के मार्जिन में सुधार संभव है।

Marico का ग्रॉस मार्जिन तिमाही आधार पर 160 से 200 बेसिस प्वाइंट तक बढ़ सकता है। कोपरा की कीमतों में आई गिरावट से इस कंपनी को सीधा फायदा मिल सकता है।

Asian Paints के मार्जिन में 180 से 250 बेसिस प्वाइंट तक सुधार संभव है। टीआईओ2 की कीमतों में कमी इस कंपनी के लिए सकारात्मक संकेत है।

Nestle India को भी तिमाही आधार पर कुछ राहत मिल सकती है, खासकर कॉफी और डेयरी से जुड़े इनपुट में स्थिरता के कारण।

हालांकि Godrej Consumer Products और Hindustan Unilever पर कुछ दबाव बना रह सकता है। प्रतिस्पर्धी कीमतों और बढ़े हुए खर्च के कारण इनके मार्जिन पर असर पड़ सकता है।

ब्रोकरेज की टॉप पिक्स

Antique Stock Broking ने उपभोक्ता क्षेत्र में Godrej Consumer Products, Marico और Bajaj Consumer Care को अपनी पसंदीदा कंपनियों में शामिल किया है। रिपोर्ट के मुताबिक जिन कंपनियों की ऑर्डर बुक मजबूत है और जिनका कच्चे माल पर नियंत्रण बेहतर है, वे मौजूदा माहौल में बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं।

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