1 अप्रैल 2026 से इनकम टैक्स एक्ट 2025 लागू होगा। ITR फॉर्म 1 से 7 में डिजिटल फाइलिंग और ज्यादा खुलासे अनिवार्य होंगे। पुराने फॉर्म सीमित लोगों के लिए, टैक्सपेयर्स को नई शर्तों के अनुसार रिटर्न भरना होगा।
ITR Rules: भारत का इनकम टैक्स सिस्टम बड़े बदलाव की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। नए इनकम टैक्स एक्ट, 2025 और ड्राफ्ट नियमों के अनुसार टैक्स फाइलिंग का तरीका अब पहले से ज्यादा डिजिटल, पारदर्शी और सख्त होगा। टैक्सपेयर्स को अब पुराने फॉर्म भरने की आदत छोड़कर नए नियमों के अनुसार फॉर्म चुनना होगा।
वर्तमान कानून, जो साल 1961 से लागू है, अब खत्म होने वाला है। इसे बदलकर नया इनकम टैक्स एक्ट 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। इस नए कानून को लागू करने के लिए सरकार ने इनकम टैक्स रूल्स, 2026 का ड्राफ्ट तैयार किया है और ITR फॉर्म्स को भी नए सिरे से डिज़ाइन किया गया है। सरकार ने इन ड्राफ्ट नियमों और फॉर्म्स को जनता के लिए पब्लिक किया है ताकि लोग, टैक्स प्रोफेशनल और अन्य स्टेकहोल्डर्स अपनी राय दे सकें। इस फीडबैक के लिए समय सीमा 22 फरवरी 2026 तक है।
टैक्सपेयर्स के लिए नए नियमों का मतलब
ITR फॉर्म 1 से 7 तक के ढांचे में कुछ बड़े बदलाव आए हैं। पुराने सरल फॉर्म अब सीमित मामलों के लिए ही रहेंगे। सैलरीड लोग, बिजनेस वाले, कंपनियां, फर्म्स और ट्रस्ट्स सभी को अब अधिक सावधानी से फॉर्म चुनना होगा। नए ड्राफ्ट नियमों के अनुसार डिस्क्लोजर की शर्तें बढ़ाई गई हैं और टैक्सपेयर्स को पहले से ज्यादा जानकारी देनी होगी।
ITR-1: सरल और डिजिटल
ITR-1, जिसे सहज कहा जाता है, अब भी सबसे आसान फॉर्म रहेगा। यह उन रेजिडेंट इंडिविजुअल्स के लिए है जिनकी आय सैलरी, एक घर की प्रॉपर्टी और इंटरेस्ट जैसी साधारण इनकम से होती है।
लेकिन एक बड़ा बदलाव है। अब इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग डिफॉल्ट हो गई है। पेपर फाइलिंग सिर्फ 80 साल या उससे अधिक उम्र के टैक्सपेयर्स के लिए रहेगी। बाकी सभी टैक्सपेयर्स को इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन कोड (EVC) या डिजिटल सिग्नेचर से रिटर्न फाइल करना होगा। इसका मतलब है कि पेन-पेपर का जमाना अब खत्म।
सैलरी और साधारण इनकम वाले लोग ITR-1 ही फाइल करेंगे। अगर आय थोड़ी जटिल होगी तो उन्हें ITR-2 की तरफ जाना पड़ेगा।
ITR-2: कैपिटल गेंस और विदेश आय वाले
ITR-2 उन व्यक्तियों और HUFs के लिए है जिनके पास बिजनेस या प्रोफेशन से इनकम नहीं है। इसमें कैपिटल गेंस, कई घर की प्रॉपर्टी या विदेश से आय वाले लोग शामिल हैं।
नए नियमों में ITR-2 को डिफॉल्ट फॉर्म बनाया गया है। अगर कोई ITR-1 के लिए योग्य नहीं है तो सीधे ITR-2 फाइल कर सकता है। नए नियमों के तहत कैपिटल गेंस और फॉरेन एसेट्स के खुलासे अब ज्यादा डिटेल्ड होंगे। निवेशक और विदेश से आय वाले टैक्सपेयर्स को अब ज्यादा जानकारी देना अनिवार्य होगा।
ITR-3: बिजनेस इनकम वाले के लिए

ITR-3 उन लोगों के लिए है जिनकी कमाई बिजनेस या प्रोफेशन से होती है। नए नियमों में पर्क्विजिट्स, कैपिटल गेंस और खास तरह की इनकम पर फोकस बढ़ गया है।
इस फॉर्म को भरते समय टैक्सपेयर्स को पहले से ज्यादा जानकारी देनी होगी। प्रोफेशनल्स, ट्रेडर्स और बड़े बिजनेस वाले अब अपनी इनकम से जुड़े हर पहलू को स्पष्ट करना जरूरी होगा। ITR-3 अब उन लोगों के लिए और जरूरी हो जाएगा जो साधारण रिटर्न के दायरे में नहीं आते।
ITR-4 (सुगम): सीमित मामलों के लिए
ITR-4, जिसे सुगम कहते हैं, प्रेसम्प्टिव टैक्सेशन वाले मामलों के लिए रहेगा। लेकिन नए नियमों में साफ किया गया है कि कई टैक्सपेयर्स अब ITR-4 नहीं भर पाएंगे।
यदि कोई टैक्सपेयर्स विदेश में एसेट रखता है, किसी कंपनी का डायरेक्टर है, अनलिस्टेड शेयर रखता है, सालाना कमाई 50 लाख रुपये से ज्यादा है, दो से अधिक घर हैं या खेती से 5,000 रुपये से ज्यादा कमाई होती है, तो वे ITR-4 नहीं भर पाएंगे। इसका मतलब है कि सुगम अब हर किसी के लिए आसान विकल्प नहीं रहा। कई छोटे कारोबारी और प्रोफेशनल्स अब ITR-3 की ओर जाएंगे।
ITR-5 और ITR-6: कंपनियों और फर्म्स के लिए
ITR-5 फर्म्स, LLP, AOP और BOI के लिए है, जबकि ITR-6 कंपनियों के लिए है। इन फॉर्म्स का ढांचा वैसा ही रहेगा, लेकिन डिजिटल कंप्लायंस, ऑडिट और रिपोर्टिंग की शर्तें सख्त हो गई हैं।
कंपनियों के लिए डिजिटल सिग्नेचर से रिटर्न फाइल करना जरूरी होगा। नए नियम बिजनेस रीऑर्गनाइजेशन और ब्लॉक असेसमेंट के साथ तालमेल भी मजबूत करेंगे।
ITR-7: ट्रस्ट्स और संस्थाओं के लिए
ITR-7 चैरिटेबल ट्रस्ट्स, राजनीतिक पार्टियों और छूट पाने वाली संस्थाओं के लिए है। नए नियमों में पारदर्शिता और डिजिटल कंप्लायंस पर जोर है। ऑडिट रिपोर्ट, डोनेशन और फंड्स के इस्तेमाल को सीधे रिटर्न से जोड़ दिया गया है।
यदि रिटर्न गलत या देर से फाइल हुआ, तो ट्रस्ट्स और संस्थाओं की टैक्स छूट या रजिस्ट्रेशन पर असर पड़ सकता है। अब इन्हें पहले से ज्यादा जवाबदेह रहना होगा।
नए नियमों से टैक्स सिस्टम में बदलाव
टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, नए नियम ITR सिस्टम को एक दिशा में ले जा रहे हैं। फॉर्म फाइलिंग पूरी तरह डिजिटल होगी। आसान फॉर्म केवल सीमित लोगों के लिए रहेंगे। टैक्सपेयर्स को पहले से ज्यादा जानकारी देनी होगी और टैक्स विभाग स्ट्रक्चर्ड डेटा पर ज्यादा भरोसा करेगा।
सरकार ने इन नियमों पर फीडबैक मांगा है, जिसका समय 22 फरवरी 2026 तक है। 1 अप्रैल 2026 से नया कानून लागू होगा। भले ही ITR के नाम वही रहें, लेकिन रिटर्न भरने का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा।











